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BEFI: चुनावी बॉन्ड पर बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया की मांग, कहा- सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा का पालन करे SBI

Wed, 06 Mar 2024 11:06 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 06 Mar 2024 11:06 PM IST
सार

बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने बुधवार को मांग की कि भारतीय स्टेट बैंक को चुनावी बॉन्ड योजना में शामिल नामों का चुनाव आयोग को खुलासा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा का पालन करना चाहिए।

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SBI should follow Supreme Court deadline on electoral bond scheme: Bank employees' union
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बैंक कर्मचारियों के एक ट्रेड यूनियन ने बुधवार को मांग की कि भारतीय स्टेट बैंक को चुनावी बॉन्ड योजना में शामिल नामों का चुनाव आयोग को खुलासा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा का पालन करना चाहिए। एसबीआई ने राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉन्ड के विवरण का खुलासा करने के लिए 30 जून तक का समय बढ़ाने की मांग करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पिछले महीने अपने फैसले में अदालत ने बैंक को छह मार्च तक चुनाव पैनल को विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
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बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) ने यह भी आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उसके कर्मियों का इस्तेमाल सत्तारूढ़ ताकतों के राजनीतिक हित के लिए किया जा रहा है और कहा कि वह इसका विरोध करता है। गौरतलब है कि बीईएफआई एक संघ है जिसमें वाणिज्यिक बैंकों भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के कर्मचारी शामिल हैं।
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चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक फैसला बताते हुए यूनियन ने कहा कि देश ने देखा कि फैसले के 17 दिन बाद एसबीआई ने मार्च की समय सीमा से सिर्फ दो दिन पहले चार मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने की संभावना है। हालांकि चुनाव आयोग द्वारा कार्यक्रम की घोषणा की जानी बाकी है। यूनियन ने सचिव एस हरि राव द्वारा हस्ताक्षरित अपने बयान में कहा कि भारत के सबसे बड़े बैंक एसबीआई द्वारा बताया गया कारण यह है कि कुछ डेटा भौतिक रूप में सीलबंद कवर में इकट्ठा किया जाता है, जो डिजिटल युग में कई लोगों को आश्चर्यचकित करता है। 
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड योजना को यह कहते हुए रद्द करते हुए कहा यह सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है।
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