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Samwad 2025: 'आगे बढ़ते रहने के लिए जूनून-हौसला और जज्बा लगता है', 'संवाद' में बोले गौर गोपाल दास
Tue, 10 Jun 2025 05:58 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 10 Jun 2025 05:58 PM IST
सार
Amar Ujala Uttarakhand Samvad 2025: अमर उजाला उत्तराखंड संवाद 2025 में प्रेरक वक्ता गौर गोपाल दास ने भी शिरकत की है। इस दौरान उन्होंने जीवन से जुड़े अपने अनुभव साझा करने के साथ सफलता के कई मंत्र भी बताएं हैं।
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गौर गोपाल दास, प्रेरक वक्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जाने-माने प्रेरक वक्ता और आध्यात्मिक विद्वान गौर गोपाल दास ने अमर उजाला संवाद 2025 के मंच पर शिरकत की है। इस दौरान उन्होंने मजेदारी कहानी साझा की। उन्होंने कहा - मुंबई में एक ऑल मेंस क्लब था, उसमें एक शर्मा जी थे, उनकी 50वीं शादी की सालगिरह थी। 50 साल शादीशुदा रहना आसान बात नहीं है। इस पर वहां मौजूद सभी लोगों ने उनसे इसका राज पूछा है। तो उन्होंने कहा- कि मैंने 25 वीं शादी की सालगिरह पर मैं अपनी पत्नी को हॉलीडे के लिए स्विटजरलैंड ले गया। इस पर सभी लोग कहने लगे, देखो ऐसे शादी निभाई जाती है इसे कहते हैं प्यार। इस पर एक शख्स ने पूछा आप 50वें शादी की सालगिरह पर क्या करने वाले हैं। तो उन्होंने बताया कि अब स्विटजरलैंड जा रहा हूं, उसे वापस लाने के लिए।
'रिश्ते की लंबाई उसके पीछे की गहराई पर निर्भर होती है'
गौर गोपाल दास ने आगे कहा कि- अगर आपको साथ नहीं रहना है और फिर आपका रिश्ता चल जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन 50 साल तक एक छत के नीचे साथ में रहना है, सारे उतार-चढ़ाव एकसाथ देखने हैं। एक दूसरे के अहंकार को झेलना है, तब 50 साल हो जाए, उसको मनाना होता है। हम न किसी रिश्ते की लंबाई को मनाते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते के लंबाई के पीछे की जो गहराई है, उसको कोई नहीं मनाता है। क्योंकि किसी भी रिश्ते की लंबाई उसके पीछे की गहराई पर निर्भर करती है।
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'रिश्ते की लंबाई उसके पीछे की गहराई पर निर्भर होती है'
गौर गोपाल दास ने आगे कहा कि- अगर आपको साथ नहीं रहना है और फिर आपका रिश्ता चल जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन 50 साल तक एक छत के नीचे साथ में रहना है, सारे उतार-चढ़ाव एकसाथ देखने हैं। एक दूसरे के अहंकार को झेलना है, तब 50 साल हो जाए, उसको मनाना होता है। हम न किसी रिश्ते की लंबाई को मनाते हैं। लेकिन किसी भी रिश्ते के लंबाई के पीछे की जो गहराई है, उसको कोई नहीं मनाता है। क्योंकि किसी भी रिश्ते की लंबाई उसके पीछे की गहराई पर निर्भर करती है।
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गौर गोपाल दास, प्रेरक वक्ता
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला का अभिनंदन- गौर गोपाल दास
60 साल से ऊपर अमर उजाला की पत्रकारिता, इनका अखबार सारे उत्तर भारत में चल रहा है। उतार-चढ़ाव, मुसीबतों के बावजूद आगे बढ़ता रहना, 60 साल से ज्यादा समय तक, उसके लिए जूनून, एक जज्बा, हौसला लगता है, कि चाहे कुछ भी हो जाए हम करके दिखाएं। ये देवभूमि उत्तखंड में गंगा के जैसा है, कितने दुर्गम रास्ते आती हैं। और हमेशा आगे बढ़ती है। सभी उतार-चढ़ाव और मुसीबतों में सबसे बड़ी चीज उम्मीद होती है। बिना उम्मीद के जूनून, एक जज्बा, हौसला नहीं होता है। और हम उम्मीद बड़ी जल्दी खो देते हैं।
आरसीबी की जीत और बंगलूरू भगदड़ पर बोले गौर गोपाल दास
इस दौरान गौर गोपाल दास ने कहा- वो उम्मीद ही थी, जिसने 18 साल के इंतजार के बाद आरसीबी के हाथ में आईपीएल की ट्रॉफी आई। बाद में जो भी हुआ, वो दर्दनाक हुआ है। लेकिन 18 साल का जूनून, जज्बा, हौसला और पागलपन से तब एक ट्रॉफी हाथ में आई।
उम्मीद पर ही सारी दुनिया टिकी है- गौर गोपाल दास
गौर गोपाल दास ने आगे कहा- उम्मीद ही एक रिश्ते का सबसे बड़ा आधार है, चाहे वो किसी तरह का रिश्ता हो। ये उम्मीद हर तरफ है, पढ़ाई, करियर में यहां तक की अध्यात्म में भी उम्मीद है कि, एक दिन ईश्वर का दर्शन हो जाएगा और उम्मीद है कि मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। उम्मीद पर ही सारी दुनिया टिकी है। चाहे कुछ भी हो जाए, एक चीज कभी नहीं छूटनी चाहिए- उम्मीद। इस को जीतने की मानसिकता कहते हैं। एक बात तो पक्की है, सभी लड़ाई मन में लड़ी जाती है और वहीं जीतना मायने रखा है। अगर मन में हार गए तो हर जगह हार जाएंगे।
कभी किसी को कॉपी न करें- गौर गोपाल दास
जीवन में सभी की समस्याएं अलग-अलग हैं। दूसरों को देखकर कॉपी करने की बजाय खुद को देखें और अवलोकन करें। तुलना करना और दूसरा को देखना एक रोग है। अगर आपको ऊपर उठना है, तो अपने मन को स्थिर करे और किसी से स्पर्धा और होड़ न करें। सफलता और कामयाबी में जितना ऊपर जाएंगे, उतना अकेले होते जाएंगे, क्योंकि आपको पता ही नहीं विश्वास किसमें करना है। लोग आपका इस्तेमाल करना चाहते हैं, आपसे प्यार नहीं करते। इस्तेमाल करना दुनिया की रीत हो गई है। लोग आपके साथ नहीं आपके बदले हुए वक्त के कारण आपके साथ जुड़ना चाहते हैं।
'आजकल के रिश्ते मामूली विवाद पर खत्म हो जाते हैं'
गौर गोपाल दास ने आगे रिश्तों पर बात करते हुए कहा- आजकल के रिश्ते मामूली विवाद पर खत्म हो जाते हैं, पहले होता था एक नजर में प्यार। लेकिन आजकल लव एट फर्स्ट साइट और डिवोर्स एट फर्स्ट फाइट की स्थिति बन गई है। किसी की बात को सुनना और सबसे बड़ा हल है। लोग अपने मन की बात किसी से साझा नहीं कर पा रहे हैं। जीवन जीने के लिए रिश्ते और अपने लोगों की बहुत जरूरत है।
60 साल से ऊपर अमर उजाला की पत्रकारिता, इनका अखबार सारे उत्तर भारत में चल रहा है। उतार-चढ़ाव, मुसीबतों के बावजूद आगे बढ़ता रहना, 60 साल से ज्यादा समय तक, उसके लिए जूनून, एक जज्बा, हौसला लगता है, कि चाहे कुछ भी हो जाए हम करके दिखाएं। ये देवभूमि उत्तखंड में गंगा के जैसा है, कितने दुर्गम रास्ते आती हैं। और हमेशा आगे बढ़ती है। सभी उतार-चढ़ाव और मुसीबतों में सबसे बड़ी चीज उम्मीद होती है। बिना उम्मीद के जूनून, एक जज्बा, हौसला नहीं होता है। और हम उम्मीद बड़ी जल्दी खो देते हैं।
आरसीबी की जीत और बंगलूरू भगदड़ पर बोले गौर गोपाल दास
इस दौरान गौर गोपाल दास ने कहा- वो उम्मीद ही थी, जिसने 18 साल के इंतजार के बाद आरसीबी के हाथ में आईपीएल की ट्रॉफी आई। बाद में जो भी हुआ, वो दर्दनाक हुआ है। लेकिन 18 साल का जूनून, जज्बा, हौसला और पागलपन से तब एक ट्रॉफी हाथ में आई।
उम्मीद पर ही सारी दुनिया टिकी है- गौर गोपाल दास
गौर गोपाल दास ने आगे कहा- उम्मीद ही एक रिश्ते का सबसे बड़ा आधार है, चाहे वो किसी तरह का रिश्ता हो। ये उम्मीद हर तरफ है, पढ़ाई, करियर में यहां तक की अध्यात्म में भी उम्मीद है कि, एक दिन ईश्वर का दर्शन हो जाएगा और उम्मीद है कि मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। उम्मीद पर ही सारी दुनिया टिकी है। चाहे कुछ भी हो जाए, एक चीज कभी नहीं छूटनी चाहिए- उम्मीद। इस को जीतने की मानसिकता कहते हैं। एक बात तो पक्की है, सभी लड़ाई मन में लड़ी जाती है और वहीं जीतना मायने रखा है। अगर मन में हार गए तो हर जगह हार जाएंगे।
कभी किसी को कॉपी न करें- गौर गोपाल दास
जीवन में सभी की समस्याएं अलग-अलग हैं। दूसरों को देखकर कॉपी करने की बजाय खुद को देखें और अवलोकन करें। तुलना करना और दूसरा को देखना एक रोग है। अगर आपको ऊपर उठना है, तो अपने मन को स्थिर करे और किसी से स्पर्धा और होड़ न करें। सफलता और कामयाबी में जितना ऊपर जाएंगे, उतना अकेले होते जाएंगे, क्योंकि आपको पता ही नहीं विश्वास किसमें करना है। लोग आपका इस्तेमाल करना चाहते हैं, आपसे प्यार नहीं करते। इस्तेमाल करना दुनिया की रीत हो गई है। लोग आपके साथ नहीं आपके बदले हुए वक्त के कारण आपके साथ जुड़ना चाहते हैं।
'आजकल के रिश्ते मामूली विवाद पर खत्म हो जाते हैं'
गौर गोपाल दास ने आगे रिश्तों पर बात करते हुए कहा- आजकल के रिश्ते मामूली विवाद पर खत्म हो जाते हैं, पहले होता था एक नजर में प्यार। लेकिन आजकल लव एट फर्स्ट साइट और डिवोर्स एट फर्स्ट फाइट की स्थिति बन गई है। किसी की बात को सुनना और सबसे बड़ा हल है। लोग अपने मन की बात किसी से साझा नहीं कर पा रहे हैं। जीवन जीने के लिए रिश्ते और अपने लोगों की बहुत जरूरत है।
गौर गोपाल दास के बारे में जानिए
25 साल से अधिक समय से सात्विक और संत के समान जीवन जी रहे गौर गोपाल दास मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। गोपाल दास का परिचय संत, लेखक और फिल्ममेकर के रूप में भी दिया जाता है। सोशल मीडिया पर इनके वीडियो काफी लोकप्रिय होते हैं। 500 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल करने वाले इनके वीडियो युवाओं के बीच भी खासे लोकप्रिय हैं। गौर गोपाल दास कहते हैं कि उनका लक्ष्य केवल सकारात्मक बदलाव लाना है। वे मानवीय रिश्तों, आनंद और जीवन के उद्देश्य को लेकर युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।
जाने-माने प्रेरक वक्ता व लाइफ कोच
सोशल मीडिया में 51 लाख से अधिक अनुयायी वाले गौर गोपाल दास जाने-माने प्रेरक वक्ता व लाइफ कोच हैं। इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ने के बाद वे इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) से जुड़ गए।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
महाराष्ट्र में जन्मे दास ने कुसरो वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। 1992 में स्नातक करने के बाद पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1995 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री की और एक नामी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी।
1996 में नौकरी छोड़ इस्कॉन में शामिल
1996 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इस्कॉन में शामिल हो गए। जीवन के अद्भुत रहस्य, जीवन में संतुलन और उद्देश्य उनकी चर्चित पुस्तक रही। भारतीय जीवन शैली को लेकर उनकी गहन पकड़ है, जिस पर लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दराज से आते हैं।
25 साल से अधिक समय से सात्विक और संत के समान जीवन जी रहे गौर गोपाल दास मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक विद्वान के रूप में जाने जाते हैं। गोपाल दास का परिचय संत, लेखक और फिल्ममेकर के रूप में भी दिया जाता है। सोशल मीडिया पर इनके वीडियो काफी लोकप्रिय होते हैं। 500 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल करने वाले इनके वीडियो युवाओं के बीच भी खासे लोकप्रिय हैं। गौर गोपाल दास कहते हैं कि उनका लक्ष्य केवल सकारात्मक बदलाव लाना है। वे मानवीय रिश्तों, आनंद और जीवन के उद्देश्य को लेकर युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।
जाने-माने प्रेरक वक्ता व लाइफ कोच
सोशल मीडिया में 51 लाख से अधिक अनुयायी वाले गौर गोपाल दास जाने-माने प्रेरक वक्ता व लाइफ कोच हैं। इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ने के बाद वे इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) से जुड़ गए।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
महाराष्ट्र में जन्मे दास ने कुसरो वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। 1992 में स्नातक करने के बाद पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 1995 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री की और एक नामी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी।
1996 में नौकरी छोड़ इस्कॉन में शामिल
1996 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इस्कॉन में शामिल हो गए। जीवन के अद्भुत रहस्य, जीवन में संतुलन और उद्देश्य उनकी चर्चित पुस्तक रही। भारतीय जीवन शैली को लेकर उनकी गहन पकड़ है, जिस पर लोग उन्हें सुनने के लिए दूर-दराज से आते हैं।