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'इस्लाम नहीं, जिद पर चल रहा है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड'
बीबीसी, हिन्दी
Updated Mon, 12 Feb 2018 04:30 PM IST
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मौलाना सैयद सलमान हुसैन नदवी
- फोटो : BBC
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अयोध्या में रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद का अदालत के बाहर हल तलाशने के लिए आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रवि शंकर के साथ कोशिश में जुटे मौलाना सैयद सलमान हुसैन नदवी को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बाहर कर दिया है।
इस फैसले के बाद बीबीसी से बातचीत में सैयद नदवी ने कहा कि अयोध्या मामले पर अदालत के बाहर सुलह की कोशिश जारी रहेगी और वो इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे।
वहीं रविवार को हैदराबाद में हुई बैठक में सैयद नदवी को बाहर करने के फैसले को सही ठहराते हुए बोर्ड के सदस्य कासिम इलियास ने कहा कि जो भी सार्वजनिक मंच पर बोर्ड की राय के खिलाफ बात करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई तो होगी।
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'बोर्ड के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं'
कासिम इलियास ने कहा, "बोर्ड ने 1991 और 1993 में एक मत से जो फैसला लिया था उस पर सलमान नदवी साहब के भी दस्तख्त थे। उन्होंने इतने सालों में कभी उस पर बातचीत नहीं की और अब उसके खिलाफ जा रहे हैं। उन्हें बोर्ड का स्टैंड मालूम है। उसके खिलाफ पब्लिक में राय रखने की इजाजत कहां से मिली?"
इस पर सैयद नदवी कहते हैं कि वक्त और हालात के मुताबिक सोच और फैसले बदलने जरूरी हो जाते हैं। वो कहते हैं, "दुनिया बदल जाती है। राय बदल जाती है। हालात को देखा जाता है। 1990 में एक बात तय कर ली तो वही रहेगी। वहीं मस्जिद बनेगी चाहे खून बह जाए। ये इस्लाम नहीं कहता। ये कुरान नहीं कहता। ये इनकी जिद है।"
सैयद नदवी कहते हैं कि उनकी राय में मसले को अच्छी तरह सुलझाया जाना चाहिए। वो कहते हैं कि अगर हिंदू और मुसलमानों के बीच भाईचारा हो जाएगा तो पूरे मुल्क में अच्छा संदेश जाएगा। वो कहते हैं, "इसके नतीजे में हम अपनी मस्जिद बनाएंगे जहां नमाजें पढ़ी जाएंगी। मस्जिद इसके लिए होती है या झगड़े के लिए होती है।"
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इस फैसले के बाद बीबीसी से बातचीत में सैयद नदवी ने कहा कि अयोध्या मामले पर अदालत के बाहर सुलह की कोशिश जारी रहेगी और वो इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे।
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वहीं रविवार को हैदराबाद में हुई बैठक में सैयद नदवी को बाहर करने के फैसले को सही ठहराते हुए बोर्ड के सदस्य कासिम इलियास ने कहा कि जो भी सार्वजनिक मंच पर बोर्ड की राय के खिलाफ बात करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई तो होगी।
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'बोर्ड के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं'
कासिम इलियास ने कहा, "बोर्ड ने 1991 और 1993 में एक मत से जो फैसला लिया था उस पर सलमान नदवी साहब के भी दस्तख्त थे। उन्होंने इतने सालों में कभी उस पर बातचीत नहीं की और अब उसके खिलाफ जा रहे हैं। उन्हें बोर्ड का स्टैंड मालूम है। उसके खिलाफ पब्लिक में राय रखने की इजाजत कहां से मिली?"
इस पर सैयद नदवी कहते हैं कि वक्त और हालात के मुताबिक सोच और फैसले बदलने जरूरी हो जाते हैं। वो कहते हैं, "दुनिया बदल जाती है। राय बदल जाती है। हालात को देखा जाता है। 1990 में एक बात तय कर ली तो वही रहेगी। वहीं मस्जिद बनेगी चाहे खून बह जाए। ये इस्लाम नहीं कहता। ये कुरान नहीं कहता। ये इनकी जिद है।"
सैयद नदवी कहते हैं कि उनकी राय में मसले को अच्छी तरह सुलझाया जाना चाहिए। वो कहते हैं कि अगर हिंदू और मुसलमानों के बीच भाईचारा हो जाएगा तो पूरे मुल्क में अच्छा संदेश जाएगा। वो कहते हैं, "इसके नतीजे में हम अपनी मस्जिद बनाएंगे जहां नमाजें पढ़ी जाएंगी। मस्जिद इसके लिए होती है या झगड़े के लिए होती है।"
'मंदिर का क्या कर लिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने?'
'मंदिर का क्या कर लिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने?'
नदवी बोर्ड के फैसलों और उसके काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हैं। सैयद नदवी कहते हैं, "वहां मंदिर बना हुआ है। मस्जिद टूट चुकी है। 25 साल तो टूटे हुए हो गए। 1949 में मूर्ति रखी गई। तो क्या कर लिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने। शरीयत हमें इजाजत देती है कि मस्जिद शिफ्ट की जा सकती है। इससे पहले जब मस्जिद तोड़ी गई और हजारों लोग शहीद कर दिए गए तब क्या किया मौलानाओं ने? क्या किया पर्सनल बोर्ड ने? क्या कर सके ये लोग?"
सैयद नदवी आरोप लगाते हैं कि बोर्ड के लोग ये नहीं सोच रहे हैं कि उनके रुख का नतीजा क्या होगा।
'मस्जिद से बड़ी हैं इंसानों की जानें'
नदवी कहते हैं, "इंसान का ढांचा मस्जिद से अफजल है। इंसानों की जानें जो गईं उनका मुकदमा क्यों नहीं लड़ रहे हैं ये। फिर दोबारा वहीं मंजर गर्म करना चाह रहे हैं कि इंसानों की लाशें हों"
सैयद नदवी ने कहा कि उन्हें बाहर किए जाने के बोर्ड के फैसले का सुलह की कोशिश पर कोई असर नहीं होगा। वो कहते हैं, "श्रीश्री रविशंकर साहब ने इब्दता की है। हम अयोध्या जाएंगे। जितने भी साधु संत हैं उनसे और शंकराचार्य से मिलेंगे। मोदी जी से भी मुलाकात करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के जजों से कहेंगे कि आप इसे इंडोर्स कर दीजिए कि बाहर फैसला हो, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने तो खुद सलाह दी थी कि बाहर फैसला हो।"
मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी ये दावा भी करते हैं कि वो पहले ही बोर्ड से अलग होने का ऐलान कर चुके थे। उनका आरोप है कि बोर्ड की मीटिंग में उन्हें सही तरीके से पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। उसी वक्त उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया था।
नदवी बोर्ड के फैसलों और उसके काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाते हैं। सैयद नदवी कहते हैं, "वहां मंदिर बना हुआ है। मस्जिद टूट चुकी है। 25 साल तो टूटे हुए हो गए। 1949 में मूर्ति रखी गई। तो क्या कर लिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने। शरीयत हमें इजाजत देती है कि मस्जिद शिफ्ट की जा सकती है। इससे पहले जब मस्जिद तोड़ी गई और हजारों लोग शहीद कर दिए गए तब क्या किया मौलानाओं ने? क्या किया पर्सनल बोर्ड ने? क्या कर सके ये लोग?"
सैयद नदवी आरोप लगाते हैं कि बोर्ड के लोग ये नहीं सोच रहे हैं कि उनके रुख का नतीजा क्या होगा।
'मस्जिद से बड़ी हैं इंसानों की जानें'
नदवी कहते हैं, "इंसान का ढांचा मस्जिद से अफजल है। इंसानों की जानें जो गईं उनका मुकदमा क्यों नहीं लड़ रहे हैं ये। फिर दोबारा वहीं मंजर गर्म करना चाह रहे हैं कि इंसानों की लाशें हों"
सैयद नदवी ने कहा कि उन्हें बाहर किए जाने के बोर्ड के फैसले का सुलह की कोशिश पर कोई असर नहीं होगा। वो कहते हैं, "श्रीश्री रविशंकर साहब ने इब्दता की है। हम अयोध्या जाएंगे। जितने भी साधु संत हैं उनसे और शंकराचार्य से मिलेंगे। मोदी जी से भी मुलाकात करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के जजों से कहेंगे कि आप इसे इंडोर्स कर दीजिए कि बाहर फैसला हो, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने तो खुद सलाह दी थी कि बाहर फैसला हो।"
मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी ये दावा भी करते हैं कि वो पहले ही बोर्ड से अलग होने का ऐलान कर चुके थे। उनका आरोप है कि बोर्ड की मीटिंग में उन्हें सही तरीके से पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। उसी वक्त उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया था।