फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   saifuddin soz says Kashmiri making laboratory, Killing Kashmiris Not Solving

सोज ने कहा, हिन्दुस्तान की 'लेबोरेट्री' बना कश्मीर, कश्मीरियों को मारना हल नहीं

Tue, 26 Jun 2018 12:36 AM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Jun 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
saifuddin soz says Kashmiri making laboratory, Killing Kashmiris Not Solving
saifuddin soz
कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा कि इन दिनों कश्मीर भारत को पहचानने की 'लेबोरेट्री; बन गया है और असहिष्णुता, दलित जैसे मुद्दे गायब हो गए हैं। वहीं सोज ने अपने पहले के बयान से पलटते हुए कहा कि कश्मीर की आज़ादी संभव नहीं है और इसे भारतीय संविधान के तहत अपने साथ समाहित करना होगा। 
विज्ञापन


सोमवार को अपनी किताब 'कश्मीर: गिलम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एंड द स्टोरी ऑफ स्ट्रगल' के विमोचन पर कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा कि वे कश्मीर के लोगों के साथ बातचीत के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही कश्मीर मामले का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपनी किताब में मैंने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए बीच के रास्ते सुझाए हैं। 
विज्ञापन


वहीं उनकी बुक लॉन्चिंग से कांग्रेस के दूरी बनाए रखने पर उन्होंने कहा कि यह पार्टी को सोचना है और उन्हें पार्टी से कोई गिला-शिकवा नहीं है। इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। इसमें मैने तथ्य सामने रखे हैं। मैंने शोध किया। बहुत अच्छी तरह शोध किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरी किताब का कांग्रेस से कुछ लेना देना नहीं है, लेकिन इसकी वजह से जो विवाद हुआ उसे लेकर मुझे दुख है। गौरतलब है कि सोज के विवादास्पद बयान के चलते उनकी बुक लॉन्चिंग से कांग्रेस के नेताओं ने दूरी बना कर रखी थी और उन्होंने चिदंबरम और मनमोहन सिंह लॉन्चिंग पर नहीं पहुंचे, लेकिन जयराम रमेश बतौर श्रोता इस कार्यक्रम में जरूर शामिल हुए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सोज ने अमित शाह के बयान को झूठा बतात हुए कहा कि ये सफेद झूठ है और मैंने कभी कश्मीर की आज़ादी की बात नहीं की, ये नहीं हो सकता। शाह ने कहा था कि सोज़ को भारत से आज़ादी चाहिए। सोज ने हुए कहा कि आज़ादी संभव नहीं, लेकिन भारतीय संविधान के तहत कश्मीर को समाहित (अकोमोडेट) करना होगा। वहीं मुशर्रफ के बयान पर सोज ने कहा कि मैं मुशर्रफ के विचार का समर्थन नहीं करता। यह सब मीडिया ने कर दिया। मुशर्रफ ने खुद अपने जनरल से कहा था कि कश्मीर की आजादी संभव नहीं। 

वहीं, सोज ने मोदी सरकार की मस्कुलर पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को मारने से हल नहीं निकलेगा, चाहे आप कितने भी सैन्य बल और पैरा मिलिट्री फोर्सेज भेज दीजिए। सोज ने कहा कि आप कश्मीरियों को मारते रहिए लेकिन ये समाधान नहीं है, सरकार को कश्मीरियों से बात करनी होगी और इसमें विपक्ष को भी शामिल होना होगा और सिर्फ बातचीत से ही समस्या का समाधान हो सकता है। 

सोज ने इस किताब में कुछ सुझाव भी दिए हैं। सोज ने बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को इंश्योरेंस देने की बात कही है जिनके घर-बार गोलाबारी में बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे अवाम में भरोसा बढ़ेगा।   

बुक लॉन्चिंग पर पैनल डिस्कशन में सोज ने कहा कि उन्होंने इस किताब के लिए उन्होंने बहुत रिसर्च की है और इसके सबूत मौजूद हैं कि सरदार पटेल ने लियाकत अली से कहा था कि हैदराबाद के बारे में बात न करें लेकिन कश्मीर ले लें। सोज ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल दोनों भारत के महान सपूत थे, लेकिन दोनों के रुख में फर्क थे। दोनों भारत को मजबूत बनाना चाहते थे। 

वहीं सोज ने यह भी कहा कि हम कश्मीर मुद्दे के समाधान के दो मौके चूक गए। पहला मौका अटल बिहारी वाजपेयी के समय और दूसरा मौका मनमोहन सिंह के समय था। सोज ने कहा कि 2007 में मनमोहन सिंह मुशर्रफ के साथ एक फैसले पर पहुंच गए थे, जहां सीमा नहीं बदलने वाली थी लेकिन पाकिस्तान में हालात खराब हो गए और उस समझौते के लिए मनमोहन सिंह पाकिस्तान नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि मनमोहन का तरीका था कि वे ज्यादा शोर नहीं मचाते थे, यहां तक कि वे अपनी सरकार की कामयाबियों को भी नहीं गिन सकते थे। 

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्जीकल स्ट्राइक' करार देते हुए आरोप लगाया कि चीन, पाकिस्तान और बैंक को लेकर मोदी सरकार के पास कोई नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सवाल सेना पर नहीं उठा रहे हैं बल्कि सरकार इसे जिस तरह से प्रचारित कर रही है, वह गलत है। इस अवसर पर शौरी ने कहा कि सिर्फ हिन्दू मुसलमान के बीच दूरी पैदा करके राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही है।


शौरी ने हुर्रियत के साथ बातचीत की पैरवी करते हुए कहा कि उनसे बातचीत करने में क्या बुराई है। उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि कश्मीरी, कश्मीरी की तरह न सोचे, बल्कि एक मुसलमान की तरह सोचे। उन्होंने कहा कि इतिहास के बारे में ज्यादा सोचने की बजाुवा य समस्या के हल पर जोर दें। उन्होंने हुर्रियत के अलावा घाटी में उभर रहे नए नेताओं यहां तक कि पत्थर बाजों से भी बातचीत शुरू करने को कहा, ताकि उन्हें पाकिस्तान की सोच से अलग किया जा सके।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed