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Gopi Chand Narang Death: ख्यात साहित्यकार पद्मभूषण गोपी चंद नारंग अलविदा, अमेरिका में ली अंतिम सांस
Thu, 16 Jun 2022 09:27 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 16 Jun 2022 09:27 AM IST
सार
नारंग ने उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में भाषा, साहित्य और संस्कृति पर 65 से अधिक पुस्तकें लिखीं। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रोफेसर रहे।
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professor gopichand narang died
- फोटो : social media
विस्तार
देश के अग्रणी साहित्यकार और भाषाविद प्रो. गोपी चंद नारंग का अमेरिका में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। उन्हें पद्मभूषण समेत कई सम्मानों से नवाजा गया था। नारंग के निधन से साहित्य जगत में शोक छा गया।
प्रो. नारंग का जन्म अविभाजित भारत के डुक्की कस्बे में हुआ था। यह अब पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। उन्हें पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके परिवार में पत्नी मनोरमा नारंग और उनके बेटे अरुण नारंग और तरुण नारंग हैं। देश के अनेक साहित्यकारों व प्रकाशन समूहों ने नारंग के निधन पर शोक प्रकट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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छह भाषाओं के थे महारथी, पाकिस्तान ने दिया था 'सितार-ए-इम्तियाज'
प्रो. नारंग हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और पश्तो सहित छह भाषाओं के महारथी थे। उन्होंने उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी में भी किताबें लिखीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया था। वे यहीं शिक्षक भी रहे। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण तो पाकिस्तान सरकार ने 'सितार-ए-इम्तियाज' से नवाजा था।
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नारंग ने उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में भाषा, साहित्य और संस्कृति पर 65 से अधिक पुस्तकें लिखीं। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रोफेसर रहे। वे दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में प्रोफेसर रहे। अमेरिका में वे अपने बेटे के साथ रहे थे, वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।
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प्रो. नारंग का जन्म अविभाजित भारत के डुक्की कस्बे में हुआ था। यह अब पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है। उन्हें पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके परिवार में पत्नी मनोरमा नारंग और उनके बेटे अरुण नारंग और तरुण नारंग हैं। देश के अनेक साहित्यकारों व प्रकाशन समूहों ने नारंग के निधन पर शोक प्रकट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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छह भाषाओं के थे महारथी, पाकिस्तान ने दिया था 'सितार-ए-इम्तियाज'
प्रो. नारंग हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और पश्तो सहित छह भाषाओं के महारथी थे। उन्होंने उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी में भी किताबें लिखीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया था। वे यहीं शिक्षक भी रहे। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण तो पाकिस्तान सरकार ने 'सितार-ए-इम्तियाज' से नवाजा था।