सबरीमाला: आरएसएस नेता ने तोड़ा मंदिर का रिवाज, हुआ विवाद
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24 घंटे से ज्यादा समय के लिए सबरीमाला मंदिर के दरवाजे सोमवार शाम को खोले गए थे। बहुत से हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में पुलिसबलों की तैनाती की गई थी। इसी बीच मंदिर की परंपरा और रीति-रिवाज को बचाने के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक नेता और त्रावणकोर देवासम बोर्ड के अधिकारी द्वारा परंपरा का उल्लंघन करने से विवाद पैदा हो गया है। दोनों ने पारंपरिक इरूमुदिकेत्तु (पूजा और अन्य सामग्री) के बिना ही मंदिर की पवित्र 18 सीढ़ियां चढ़ीं जोकि परंपरा के विरुद्ध है।
आरएसएस के प्रदेश नेता वल्सान थिल्लानकेरी को इरूमुदिकेत्तु के बिना गर्भगृह की तरफ जाने वाली 18 सीढ़ियों पर चढ़ते हुए देखा गया। इस मुद्दे पर थिल्लानकेरी का कहना है कि उन्होंने किसी परंपरा का उल्लंघन नहीं किया है। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि वह पूजा सामग्री लेकर सीढ़ियों पर चढ़े थे। मंदिर दर्शन के लिए भक्तों को इरूमुदिकेतु लेकर ही सीढ़ियों पर चढ़ना होता है। इसके बाद उन्हें तेजी से सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
आरएसएस नेता के कुछ देर बाद त्रावणकोर बोर्ड के सदस्य पी शंकरदास भी इरूमुदिकेतु के बिना पवित्र सीढ़ियों पर चढ़ गए। जब इस मामले पर सबरीमाला मंदिर के तंत्री कंडारारू राजीवारू से पूछा गया तो उन्होंने साफ किया कि केवल तंत्री और पंडालम शाही परिवार के पूर्ववर्ती सदस्य ही बिना पूजा सामग्री के सीढ़ियों पर चढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि परंपरा के हुए उल्लंघन की वजह से विशेष शुद्धीकरण कराया गया है।
घटना के बाद मंगलवार को थिल्लानकेरी ने एक न्यूज चैनल से कहा कि वह और उनके समर्थकों ने निसंदेह मंदिर की पवित्र परंपरा तोड़ी है और इसकी क्षतिपूर्ति के लिए उन्होंने शुद्धिकरण भी करवाया। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, 'नेता होने की वजह से हमारे ऊपर यह जिम्मेदारी है कि हम किसी भी तरह की अवांछित घटना से बचें। इसी वजह से मैंने पवित्र सीढ़ियों पर चढ़कर भक्तों को संबोधित किया। यह पुलिस की एक मदद थी।'
मंदिर खुलने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 10-50 उम्र की किसी भी महिला को मंदिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। दोबारा मंदिर खुलने पर भी श्रद्धालुओं ने महिलाओं को मंदिर के अंदर प्रवेश करने नहीं दिया। इसी बीच एक महिला भगवान अयप्पा के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंची थी लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उसे रोक दिया। उनका कहना था कि वह 50 साल से ऊपर की नहीं है। हालांकि बाद में साफ हो गया है कि महिला 52 साल की है। जिसके बाद उसे जाने की इजाजत दी गई।