फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   sabrimala case: tribes on protest said impure women cannot enter in the temple

सबरीमाला मुद्दे पर अब आदिवासियों ने जताया विरोध, कहा अशुद्ध महिलाएं नहीं कर सकतीं मंदिर में प्रवेश

Wed, 17 Oct 2018 01:38 PM IST
भाषा, निलक्कल
भाषा, निलक्कल Updated Wed, 17 Oct 2018 01:38 PM IST
विज्ञापन
sabrimala case: tribes on protest said impure women cannot enter in the temple
sabrimala temple

उच्चतम न्यायालय ने 10 से 50 साल की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश से रोकने की सदियों पुरानी परंपरा पर पिछले महीने रोक लगा दी थी और सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति दी थी। उस आदेश के बाद अब पहली बार मंदिर के द्वार खुलेंगे।

विज्ञापन


हालांकि, स्थितियां अब भी सामान्य नहीं हैं। भगवान अयप्पा की सैकड़ों महिला भक्तों ने मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार माने जाने वाले आधार शिविर निलाकल में मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं और लड़कियों को रोकने के लिए रास्ते में वाहन रोके और उन्हें आगे नहीं जाने दिया। इसके बाद से वहां तनाव और बढ़ गया है। 

विज्ञापन

इसी बीच सबरीमाला की आसपास की पहाड़ियों पर रहने वाले आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि सरकार और त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देकर सदियों पुरानी प्रथा को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने दावा किया कि रजस्वला लड़कियों और महिलाओं पर लगी बंदिशें केरल के जंगलों में रहने वाले आदिवासी समाजों के रीति-रिवाज का हिस्सा हैं। आदिवासियों ने यह भी कहा कि सबरीमाला मंदिर और इससे जुड़ी जगहों पर जनजातीय समुदायों के कई अधिकार सरकारी अधिकारियों और मंदिर का प्रबंधन करने वाले टीडीबी के अधिकारियों द्वारा छीने जा रहे हैं। 

अट्टाथोडू इलाके में आदिवासियों के मुखिया वी के नारायणन (70) ने कहा, ‘देवासम बोर्ड ने सबरीमाला के आसपास की विभिन्न पहाड़ियों में स्थित आदिवासी देवस्थानों पर भी नियंत्रण कर लिया है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मंदिर से जुड़े सदियों पुराने जनजातीय रीति-रिवाजों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। 

नारायणन ने कहा, ‘मेरी त्वचा को देखिए। हम आदिवासी हैं। जिन संस्थाओं पर हमारे रीति-रिवाजों के संरक्षण की जिम्मेदारी है, वही उन्हें खत्म कर रहे हैं।’ यहां आदिवासियों के मुखिया को ‘मूप्पेन’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि रजस्वला लड़कियों और महिलाओं को अशुद्ध मानना एक द्रविड़िय रिवाज है और आदिवासियों द्वारा की जा रही प्रकृति पूजा से जुड़ा है।


सबरीमाला आचार संरक्षण समिति के प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे नारायणन ने कहा कि भगवान अयप्पा हमारे भगवान हैं। किसी खास आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हमारे रीति-रिवाज का हिस्सा है। घने जंगलों में स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में पूजा करने के लिए रीति-रिवाजों का पालन करना बहुत जरूरी है।

इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अशुद्ध महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं देनी चाहिए।’’ 

 

  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed