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सबरीमाला, मस्जिदों में महिलाओं से भेदभाव पर दस दिन में सुनवाई पूरी करेगा सुप्रीम कोर्ट

Wed, 29 Jan 2020 03:23 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Wed, 29 Jan 2020 03:23 AM IST
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Sabarimala Case Solicitor General Tushar Mehta mentioned matter before CJI in Supreme Court
सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट विभिन्न धर्मों और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामले की सुनवाई दस दिन के भीतर पूरी करेगा। इसमें सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने का मामला भी शामिल है। 

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह विशुद्ध रूप से कानूनी पहलू से जुड़े सवालों पर ही विचार करेगी और दस दिन के भीतर सुनवाई पूरी करेगी। अगर कोई और समय मांगता है तो नहीं दिया जाएगा।
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संविधान पीठ मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं का खतना और गैर पारसी व्यक्ति से विवाह वाली पारसी महिलाओं को ‘अज्ञारी’ में पवित्र अग्नि स्थल पर प्रवेश से वंचित करने से संबंधित मुद्दों पर विचार करेगी। 
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को पीठ से समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए कहा, कोर्ट के निर्देशानुसार वकीलों की बैठक हुई, लेकिन इसमें संविधान पीठ के विचार के लिए समान कानूनी संबंधी सवालों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। 

संविधान पीठ ने मेहता को वे मुद्दे पेश करने का निर्देश दिया था, जिन पर बैठक में वकीलों के बीच चर्चा हुई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी को चार वरिष्ठ वकीलों को बैठक कर इस मामले से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने का निर्देश दिया था।

सात कानूनी मुद्दे किए थे तैयार

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजते हुए कहा था कि धार्मिक स्थानों पर महिलाओं व लड़कियों को प्रवेश से वर्जित करने जैसी धार्मिक परंपराओं की सांविधानिक वैधता के बारे में बहस का मुद्दा सिर्फ सबरीमाला मामले तक सीमित नहीं है। पीठ ने नौ सदस्यीय पीठ के विचार के लिए सात कानूनी मुद्दे तैयार किए थे। 

इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता का परस्पर प्रभाव, सांविधानिक नैतिकता के भाव को अलग करना और किसी धार्मिक प्रथा के बारे में जांच पड़ताल करने की न्यायालय की सीमा, अनुच्छेद 25 के अंतर्गत हिंदुओं के वर्गों तात्पर्य और एक वर्ग या समुदाय की आवश्यक धार्मिक प्रथाओं को अनुच्छेद 26 के तहत संरक्षण प्राप्त होने संबंधी सवाल थे।

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