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SAARC में नहीं जाएगा श्रीलंका, इनकार करने वाला बना 5वां देश

Fri, 30 Sep 2016 03:30 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Sep 2016 03:30 PM IST
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SAARC summit cancelation is Major diplomatic setback for Pakistan
सार्क देश

उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर पटखनी देने में भारत को सफलता मिलती दिखाई दे रही है। भारत की नाराजगी और सार्क सम्मेलन में ना जाने के फैसले के बाद 19वां सार्क सम्मेलन रद्द हो गया। आतंकवाद पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम में भारत के बहिष्कार के बाद अफगानिस्तान, भूटान और बांग्लादेश भी उसके साथ आ गए। शुक्रवार को श्रीलंका ने भी  सार्क में जाने से इनकार कर दिया।

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हालांकि मौजूदा सार्क अध्यक्ष नेपाल सम्मेलन की जगह पाकिस्तान से बदलने की बात कहकर उसे बचाने की कोशिश में जुटा रहा। वर्तमान में 8 देशों के इस गुट में अब पाकिस्तान के साथ नेपाल, श्रीलंका और मालदीव ही बचे हैं। हालांकि सम्मेलन रद्द होने को पाकिस्तान ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
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1985 में बने इस गुट में भारत सबसे बडा सदस्य है। नए नियम के मुताबिक सभी देशों की मौजूदगी में ही सम्मेलन हो सकता है वरना इसे रद्द करना पड़ेगा। भारत के सम्मेलन से बहिष्कार के बाद अन्य तीन देशों के साथ आने से सम्मेलन के ना होने की बात स्पष्ट हो गई है। हालांकि अभी सम्मेलन के रद्द होने का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है।

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भारत की ताकत का असर सार्क का रद्द होना

SAARC summit cancelation is Major diplomatic setback for Pakistan

1985 के बाद ऐसा पहली बार हुआ भारत ने सम्मेलन का बहिष्कार करने का फैसला लिया। भारत के इस बहिष्कार से सार्क सारी तैयारियां धरी रह जाएंगी। भारत के इस फैसले के बाद श्रीलंका ने भी कहा था कि भारत के सम्मेलन में न आने की स्थिति में सार्क सम्मेलन संभव नहीं है।

भारत के सार्क से बहिष्कार के बाद चार देश उसके पक्ष में आ जाने से एक बात ये स्पष्ट हो गई है कि दक्षिण एशिया में भारत अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है। हालांकि इन चार देशों में अफगानिस्तान और बांग्लादेश खुद आतंकी परिस्थितियों से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन श्रीलंका और भूटान जैसे देशों का भारत की तरफदारी करना उसकी ताकत दिखा रहा है।

जीडीपी के मुताबिक सार्क की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। दुनिया की पूरी आबादी का 21 फीसदी हिस्सा भी इन सार्क देशों में ही है। भारत की सार्क में स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2011 मं भारत में आई आर्थिक मंदी का असर भी सीधे तौर पर सार्क पर पड़ा था। क्योंकि सार्क की 80 फीसदी इकोनॉमी भारत के हिस्से में है।

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