सार्क की सामूहिक ताकत के प्रभावी इस्तेमाल की जरूरत : स्वराज

टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 17 Mar 2016 08:34 PM IST
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स्वराज और अजीज के बीच हुई अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ता
स्वराज और अजीज के बीच हुई अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ता - फोटो : Amarujala

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सार्क देशों के मंत्री स्तरीय सम्मेल में भारत ने बृहस्पतिवार को सार्क की ‘सामूहिक ताकत’ को प्रभावकारी तरीके से इस्तेमाल करने की वकालत की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बेहतर कनेक्टिविटी और रेल तथा मोटर वाहनों के लंबित पड़े समझौतों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ साउथ एशिया इकोनॉमिक फोरम की जरूरत को रेखांकित किया। स्वराज ने कहा कि दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के देश व्यक्तिगत तौर पर बेहतर कर रहे हैं लेकिन वे प्रभावी तरीके से अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
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स्वराज ने सार्क देशा की 37वीं मंत्री परिषद बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमने अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एसएएफटीए और साउथ एशियन ट्रेड इन सर्विसेज एग्रीमेंट के जरिए आगे बढ़ाने जैसे कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अगर हमें साउथ एशियन इकोनॉमिक यूनियन का लक्ष्य पाना है तो इन जरूरतों को आगे विकसित और समेकित करने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आज यह क्षमता है कि वह वृद्धि और समृद्धि का अगुवा बन सके और यह क्षेत्र विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला क्षेत्र है। लेकिन, उन्होंने क्षेत्रीय तालमेल में कमी की ओर भी इशारा किया। स्वराज ने कहा, ‘आंकडे़ बताते हैं कि वैश्विक व्यापार में हमारे क्षेत्र की हिस्सेदारी महज दो फीसदी और वैश्विक एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में 1.7 फीसदी है। हमारा अंतर-क्षेत्रीय कारोबार हमारे वैश्विक कारोबार के छह फीसदी से कम है और अंतर-क्षेत्रीय एफडीआई कुल एफडीआई प्रवाह का सिर्फ तीन फीसदी है।’
स्वराज ने कहा कि मजबूत ग्रोथ और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति के बावजूद सार्क क्षेत्र में विश्व के सबसे अधिक लोक गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं। इससे यही प्रदर्शित होता है कि भले ही हम व्यक्तिगत तौर पर बेहतर कर रहे हों लेकिन हम अपनी सामूहिक ताकत का प्रभावकारी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं। सार्क में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं।
 
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सार्क देशों के लिए भी है ‘सबका साथ, सबका विकास’ : स्वराज
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पहले ही दिन से कार्यभार संभालने के बाद से भारत सरकार ‘सबसे पहले पड़ोसी’ की नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का हमारा विजन पूरे सार्क क्षेत्र के लिए है और हम मिलकर क्षेत्रीय तालमेल, सहयोग और सामाजिक-आर्थिक विकास का एक व्यवहार्य ईकोसिस्टम बना सकते हैं।

सार्क देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने नेपाल पहुंची हैं विदेश मंत्री
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाक पीएम के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के बीच बृहस्पतिवार को नेपाल में अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हुई। सार्क देशों की मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल होने पोखरा पहुंचीं स्वराज ने सुबह के नाश्ते के बाद अजीज से वार्ता की। सूत्रों के मुताबिक इस बीच दोनों पक्षों ने सार्क स्तरीय प्राकृतिक प्रकोप व्यवस्थापन केंद्र के बारे में विचार-विमर्श हुआ। नेपाल के विदेश मंत्रालय के पदाधिकारियों ने बताया कि स्वराज और अजीज के बीच औपचारिक वार्ता भी होगी। 
 
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नवंबर में पाक में होगा 19वां सार्क सम्मेलन 
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बृहस्पतिवार को सार्क देशों की 37वीं मंत्रिस्तरीय बैठक का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ओली ने दक्षिण एशिया के देशों को गरीबी से साथ मिलकर लड़ने का आह्वान किया। बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत अन्य दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधि शामिल रहे। स्थायी समिति ने सार्क का शिखर सम्मेलन प्रत्येक दो वर्ष में नवंबर में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। इसी तरह 19वां सार्क शिखर सम्मेलन आने वाले नवंबर में पाकिस्तान में करने का प्रस्ताव पारित हुआ है। मंत्रिस्तरीय बैठक में सार्क देशों में हो रही गतिविधियों विशेषकर जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा, जैविक ऊर्जा, स्वास्थ्य, वातावरण व अन्य अहम मुद्दों पर बात हुई। 

विदेश मंत्रियों ने फेवा झील के बीच में किया नाश्ता 
सार्क देशों के विदेश मंत्रियों ने बृहस्पतिवार को नौका पर बैठकर फेवा झील में घूमते हुए सुबह का नाश्ता किया। विदेश मंत्रियों ने सुबह आठ बजे नौका पर सवार होकर फेवा झील के बीच में स्थित फिस्टेल लॉज में नाश्ता किया। पोखरा की प्रतिष्ठित फेवा झील से अन्नपूर्ण हिमालय का मनोरम दृश्य दिखता है । यह नेपाल की दूसरी सबसे बड़ी झील है। 
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