रूसी राजदूत ने कश्मीर को बताया भारत का आंतरिक मामला, कहा- जिन्हें शक हो वो जाकर देखें
- कश्मीर भारत का आंतरिक मामला रूस के लिए मुद्दा नहीं
- रूसी राजदूत बोले जिन्हें भारत की नीतियों पर शक वो जाएं कश्मीर
- अमेरिका पर साधा निशाना कहा संशोधन एजेंडा वाला देश
- 2025 में एस 400 की शक्ति से लैस हो जाएगा भारत
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कश्मीर मामले में खुल कर भारत का समर्थन करते हुए रूस ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है। राजदूत निकोले कुदाशेव ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताया और कहा कि इस संबंध में भारत सरकार की जो भी नीति है, रूस उसके साथ खड़ा है। अमेरिका सहित कई देशों के राजनयिकों की कश्मीर यात्रा के संबंध में उन्होंने कहा कि हमें भारत की नीतियों पर शक नहीं है, जिन्हें शक है वह कश्मीर का दौरा करें।
शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में रूसी राजदूत ने कहा है कि कश्मीर पर भारत की नीतियों को ले कर उन्हें कोई शक नहीं है। रूस भारत सरकार की नीतियों का समर्थक है। हमें कोई शक नहीं है, इसलिए हम कश्मीर नहीं गए। जिन्हें शक है वह कश्मीर जाएं।
इस दौरान पाकिस्तान की चीन के जरिए कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की लगातार कोशिशों के संदर्भ में कुदाशेव ने कहा कि रूस कभी इस मुद्दे को यूएन में लाने के पक्ष में नहीं रहा है। यह पूरी तरह से द्विपक्षीय मुद्दा है। कश्मीर पर चर्चा के मामले में यूएन में भी आम सहमति नहीं है।
अमेरिका पर निशाना
इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश दूसरे देशों के अस्तित्व को नकारना चाहते हैं। इनका संशोधनवादी एजेंडा है। अमेरिका दुनिया में ऐसा वैकल्पिक नजरिया बढ़ाना चाहता है जो प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ विभाजनकारी भी है।
सवाल उठता है कि हम क्यों उनके नजरिये को अपनाएं जब दुनिया में पहले ही ऐसी कई रणनीतियां हैं जो विचारशील और समावेशी है। रूसी राजदूत ने कहा कि पश्चिमी देशों के विचार चिंता पैदा करने वाले हैं। अमेरिका चीन को मिटाना चाहता है।
चीन-रूस-ईरान के संयुक्त युद्घाभ्यास पर
रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रामन बाबुशकिन ने चीन-रूस-ईरान के संयुक्त नौसैनिक युद्घाभ्यास में भारत को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने कहा कि रूस देखेगा कि ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने इस युद्घाभ्यास को जमीनी स्थिति को समझने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
बाबुशकिन ने कहा कि न्योता नहीं दिए जाने से भारत और रूस के संबंध खराब नहीं होंगे। हमारे हिस्से में रूस और भारतीय नौ सेना में अच्छा संपर्क है। जहां तक प्रतिबंध (ईरान पर) का सवाल है तो ऐसे प्रतिबंधों से भारत-रूस के संबंधों में दूरी नहीं आने वाली।