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Russia Ukraine News: किसकी चूक से रूस-यूक्रेन जंग में फंस गए भारतीय छात्र? 'मुल्जिम तो है, चाहे हाथ में तलवार नहीं है'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 02 Mar 2022 07:10 PM IST
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सार
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने कहा, कैसे कह दें कि मोदी सरकार गुनहगार नहीं है, मुल्जिम तो है, चाहे हाथ में तलवार नहीं है, लाखों बच्चों को मौत के मुंह में धकेल कर, किस मुंह से कह रहे हैं कि ये जिम्मेदार नहीं हैं...
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Russia Ukraine News update: Congress says that it is the responsibility of the government to bring the Indian children stucked in Ukraine, it's a responsibility of PM Modi and Ministry of External Affairs but government is fail
दिल्ली के लिए रवाना हुए भारतीय छात्र - फोटो : Agency

विस्तार

रूस-यूक्रेन की लड़ाई में भारतीय छात्र फंस गए हैं। यूक्रेन से पड़ोसी देशों में गए छात्रों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए केंद्र सरकार ने ऑपरेशन गंगा शुरू किया है। कई मंत्रियों को विदेश भेजा गया है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने कहा, कैसे कह दें कि मोदी सरकार गुनहगार नहीं है, मुल्जिम तो है, चाहे हाथ में तलवार नहीं है, लाखों बच्चों को मौत के मुंह में धकेल कर, किस मुंह से कह रहे हैं कि ये जिम्मेदार नहीं हैं।



जानकारों का कहना है कि यूक्रेन से छात्रों को निकालने में कहीं न कहीं कोई चूक तो अवश्य हुई है। जिसके चलते रूस-यूक्रेन जंग में भारतीय छात्र फंस गए। अगर भारतीय दूतावास पहली ही बार में ही निकलने पर जोर देता तो बहुत से छात्र लड़ाई शुरू होने से पहले स्वदेश लौट सकते थे। कांग्रेस पार्टी ने कह दिया है कि ये सरकार की जिम्मेदारी होती है, ये मोदी जी की जिम्मेदारी बनती है, विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी बनती है। सरकार इस मामले में फेल रही है।   

दो बार आई एडवाइजरी

यूक्रेन पर रूस का हमला होने से पहले का एक सप्ताह बहुत अहम था। लड़ाई शुरू होने से पहले सुरक्षित देश वापसी करने वाले हरियाणा के रोहतक जिले के छात्रों ने बताया कि दो सप्ताह से वहां भय का माहौल था। भारतीय दूतावास की तरफ से दो बार एडवाइजरी आई थी। छात्र भी लगातार दूतावास में फोन कर रहे थे। एक सप्ताह पहले उनसे कहा गया, भारतीय छात्रों को अब स्वदेश लौट जाना चाहिए। कई छात्रों ने इसे हल्के में लिया और सोचते रहे कि रूस हमला नहीं करेगा। अभी वे अपना सिलेबस या प्रेक्टिकल कार्य पूरा कर सकते हैं। इस बीच अनेक छात्रों ने अपनी एयर टिकट बुक कर ली। सप्ताह के आखिर में दूतावास की ओर से कहा गया कि अब चले जाओ। पहले कहा था कि चले जाना चाहिए। बाद में कहा, चले जाओ। पहले कहा था, जाना चाहिए, बाद में कहा, चले जाओ। इसके बाद उन्हें मौका नहीं मिला। यदि पहले ही चले जाओ कहते, तो आज इतने छात्र नहीं फंसते। सरकारी एडवाइयरी सख्त होती तो अनेक छात्र वापस लौट सकते थे।  

पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने साधा केंद्र पर निशाना

केंद्र सरकार की ओर से जब यह बात कही गई कि ऑपरेशन गंगा तब तक चलेगा जब तक एक-एक भारतीय को यूक्रेन या उसके पड़ोसी देशों से नहीं निकाल लिया जाता। पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस मामले में एक ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साध दिया। उन्होंने लिखा, 1990 में जब खाड़ी युद्ध हुआ था, तब भारत सरकार ने इराक और कुवैत से पौने दो लाख से अधिक भारतीयों को निकाला था। उस समय की तस्वीर आपको नहीं मिलेगी कि मंत्री एयरपोर्ट पर हैं। काम पूरा होने से पहले प्रचार पूरा हो जाता है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने कहा, यूक्रेन में फंसी एक भारतीय स्टूडेंट अपने वीडियो में कह रही है कि यूक्रेन में भारत के छात्रों को मदद नहीं मिल रही है। जब वे खुद से बॉर्डर क्रॉस करने की कोशिश करते हैं, उन्हें अगवा कर लिया जा रहा है। तीन लड़कियों को अगवा कर लिया गया है।

अमेरिका ने तो यह काम एक महीना पहले ही कर दिया था

डॉ. रागिनी नायक ने कहा, अमेरिका जैसे देश एक महीना पहले ही अपने लोगों को निकाल चुके थे। उन्होंने ऐसा इसलिए किया कि बाद में कोई अप्रूवल लेने का चक्कर पड़ेगा। भारत के छात्र दूसरे देशों के बॉर्डर पर फंसे हैं। क्या भारतीय दूतावास ने हंगरी, पोलैंड या रोमानिया जैसे किसी ऐसे देश से बात की है। किस देश के साथ बात हो गई है, कौन सा ऐसा बॉर्डर हैं, जहां हमारे स्टूडेंट सेफ पैसेज के साथ सीमा लांघ सकते हैं। क्या ऐसी कोई जानकारी विदेश मंत्रालय के पास हैं। चाहे नमामी गंगे हो या ऑपरेशन गंगा हो, इनके नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं। ये ऊंची दुकान तो हैं पर इनके फीके पकवान हैं। यूक्रेन में बमबारी के बीच भारतीय छात्रों को लावारिस छोड़ दिया है। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारतीय नागरिकों को निकालने में हुई देरी की आलोचना किए जाने का जवाब देते हुए कहा, भारतीय दूतावास ने कई दिन पहले कई एडवाइजरी जारी की थी। लोगों से यूक्रेन छोड़कर जाने की सलाह दी। वे कहते हैं कि कई छात्र पढ़ाई अधूरी छोड़ कर वापस लौटने में संकोच कर रहे थे।

यूक्रेन में भारतीय राजनयिक को निलंबित किया जाए

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि खारकीव में भारतीय छात्र नवीन की बमबारी में हुई मौत बहुत दुखद घटना है। राजनीतिक पार्टियां व सरकारी अमला, पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में व्यस्त हैं। अगर समय रहते 20 हजार छात्रों को स्वदेश लाया जाता तो आज जैसी नौबत नहीं आती। यूक्रेन में भारतीय राजनयिक को निलंबित किया जाए, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। लड़ाई के मुहाने पर एडवाइजरी जारी करना, पल्ला झाड़ने जैसा है। यूक्रेन और आसपास के देशों के बॉर्डर पर लोगों का भूख-प्यास से बुरा हाल है। जीरो से नीचे तापमान में छात्रों को पोलैंड तो कभी रोमानिया के बार्डर पर मीलों पैदल चलना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन उन्हें दुत्कार रहा है। कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि भारतीय वायुसेना के मालवाहक जहाजों को ज्यादा संख्या में इस्तेमाल किया जाए। विदेश मंत्रालय, यूक्रेन के पड़ोसी देशों में विशेष तौर पर राहत एंबेसडर नियुक्त करे।

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