अजीत सिंह के भाजपा में आने की चर्चाओं से लामबंद हुए पार्टी के जाट नेता
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राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजित सिंह की भाजपा से नजदीकी बढ़ने की चर्चाओं से पार्टी के जाट नेताओं की नींद उड़ी हुई है। गठजोड़ से पहले ही पार्टी में उनका विरोध शुरू हो गया है। अजित के खिलाफ पार्टी के सभी जाट नेता लामबंद हो गए हैं। इस विरोध की आवाज संघ के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच गई है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा देख रहे संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल से इस मामले में मुलाकात की है।
इससे पहले ये नेता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी अपनी मंशा जता चुके हैं। अपने जाट नेताओं के तेवर देखकर भाजपा नेतृत्व हैरान है। पार्टी के शीर्ष नेता मिशन 2017 के लिए केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व वाली टीम यूपी के मंथन में जुटे हैं। इस बीच, दल के भीतर अजित सिंह का विरोध मुश्किलें बढ़ा रहा है।
टीम यूपी को लेकर राज्य प्रभारी ओम माथुर के घर पर पार्टी नेता शुक्रवार को एक बार फिर मंथन बैठक करेंगे। इससे पहले बुधवार को शीर्ष नेताओं ने यूपी के क्षेत्रीय अध्यक्षों और मौर्य की टीम पर मंथन किया। लेकिन जाट नेताओं के रुख ने उनकी उलझन बढ़ा दी है।
चौ. बीरेंद्र और बालियान गठजोड़ के खिलाफ
सूत्र बताते हैं कि 6 मई को दिल्ली स्थित यूपी भवन में जाट नेताओं ने अजित पर आगे की रणनीति तय करने के लिए अहम बैठक की थी। इसके बाद कुछ जाट नेताओं ने संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल से मुलाकात की। उन्होंने कृष्ण गोपाल को अजित सिंह के सियासी अवसरवाद के पुराने कदमों का हवाला दिया। साथ ही इस गठजोड़ के नफा-नुकसान गिनाये। बताया जा रहा है कि अजित सिंह को लेकर पार्टी के जाट नेता आर-पार के मूड में हैं।
अजित के खिलाफ भाजपा में झंडा बुलंद कर रहे नेताओं को चौधरी बीरेंद्र सिंह और संजीव बालियान सरीखे नेताओं का वरदहस्त प्राप्त होने की चर्चाएं हैं। वहीं संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे युवा नेता अजित सिंह के साथ भाजपा के गठजोड़ के पक्ष में बताए जा रहे हैं। अजित सिंह एक नौकरशाह के जरिये भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि अपने जाट नेताओं के विरोध ने भाजपा आलाकमान को इस दिशा में कोई फैसला लेने से पहले सोचने को मजबूर कर दिया है।