कोरोना के इलाज में बदइंतजामी: यूं ही नहीं अपनी ही सरकार पर भड़क रहे 'मंत्री और नेता'
- अधिकारियों की लापरवाही से मरीजों को नहीं मिल पा रहा है इलाज
- सत्ता पक्ष के नेता से लेकर विपक्ष के नेता तक इसी वजह से सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को घेर रहे हैं
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उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने अपनी सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को लंबा चौड़ा पत्र लिखा। पत्र में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बदहाल हालातों पर मंत्री ने न सिर्फ जिम्मेदार अधिकारियों को बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी जमकर घेरा। सिर्फ उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में सत्ता पक्ष के नेताओं ने कोरोना के दौर में बदहाल व्यवस्थाओं पर अपनी ही सरकार को आड़े हाथों लिया। दरअसल इन नेताओं ने सरकार की कार्यशैली और बाबुओं की ज्यादा दखलअंदाजी को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज की है।
देश के ज्यादातर राज्यों में कोरोना के हालात बहुत बदहाल हो चुके हैं। यही वजह है कि जनता से लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता तक के निशाने पर सरकारी व्यवस्थाएं हैं। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कानून मंत्री बृजेश पाठक ने ही अपनी सरकार पर दनादन सवाल दाग दिए। कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक की चिट्ठी में इतना दर्द है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम लोगों के लिए कितनी मुसीबतें पेश हो रही होंगी।
मध्यप्रदेश के इंदौर में भाजपा के ही कुछ सभासदों ने अपनी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। इन सभासदों का आरोप था कि सरकार न सिर्फ इलाज में लापरवाही बरत रही है बल्कि श्मशान घाट पर भी बंदोबस्त नहीं है। भाजपा शासित राज्यों में भाजपा के नेता और मंत्री विरोध में बोल रहे हैं तो कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस के नेता विरोध में बोल रहे हैं।
राजस्थान के गंगानगर में कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बिगड़ते हालात पर नगर पालिका के जिम्मेदार लोगों को कटघरे में खड़ा कर दिया। महाराष्ट्र के पुणे जैसे शहरों में बेकाबू हुए हालात पर सत्ता पक्ष के ही स्थानीय नेताओं ने सरकार को कोसना शुरू कर दिया। स्थानीय नेताओं ने बाकायदा पुणे महानगरपालिका में ज्ञापन देकर बेहतर चिकित्सकीय बंदोबस्त की मांग की। स्थानीय नेताओं का रुख था कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते उनके प्रदेश की जनता को दर-दर ठोकरें खानी पड़ रही हैं और बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर आनंद कुमार बताते हैं, दरअसल जब जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से हटकर नेताओं को खुश करने लगे तो हालात बदतर ही होने लगते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले साल और इस साल के कोविड मैनेजमेंट को लेकर आनंद कुमार कहते हैं कि अस्पतालों में बेड की संख्या से लेकर कोविड-19 अस्पतालों की तैयारियों को देखिए। इस बार हालात ज्यादा बदहाल हैं लेकिन प्रबंधन पिछले साल की तुलना में ज्यादा खराब है।
यही वजह है कि कि जिम्मेदार अधिकारियों की नाराजगी से कैबिनेट मंत्री तक परेशान हैं। सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सत्तापक्ष के एक विधायक ने बताया कि उनकी भी बहुत ज्यादा नहीं सुनी जा रही है। उक्त विधायक का कहना है कि जब व्यवस्थाएं ही नहीं दुरुस्त हैं तो उनकी सुनवाई कहां से होगी। उन्होंने कहा जिम्मेदार अधिकारियों को अगर सरकार ने काम करने के लिए खुली छूट दी है तो अधिकारी आंख में धूल ना झोंक कर अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा करें।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया ऐसा नहीं है जिन राज्यों में कोविड के हालात बुरे हैं वहां पर सरकारें काम नहीं कर रही हैं। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक बाकायदा अस्पतालों में जाकर दौरे कर रहे हैं। हालात पर नजर बनाए हुए हैं। बावजूद इसके ग्राउंड लेवल पर जो काम किया जाना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है। इसकी प्रमुख वजह अधिकारियों के ऊपर ज्यादा से ज्यादा निर्भरता है। अगर यह अधिकारी वक्त रहते सरकारी और निजी अस्पतालों में तालमेल के साथ-साथ कोविड-19 सेंटर और समर्पित कोविड-19 हॉस्पिटल तैयार करा सकते तो आज यह हालात नहीं होते। उक्त नेता ने उत्तर प्रदेश का संदर्भ देते हुए कहा कि यहां पर जितने अस्पताल शहरी और जिले से लेकर ग्रामीण स्तर पर हैं वहां पर ही अगर जिम्मेदार अधिकारी बेहतर व्यवस्थाएं कर देते तो शायद आज मरीजों को ये दिन न देखने पड़ते।