{"_id":"58f0e2244f1c1bc342cf79b9","slug":"rti-settled-case-in-just-58-minutes-instead-of-30-days","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"RTI- 30 दिन की बजाए सिर्फ 58 मिनट में निपटा दिया केस ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
RTI- 30 दिन की बजाए सिर्फ 58 मिनट में निपटा दिया केस
amarujala.com- Presented by: मोहित
Updated Sat, 15 Apr 2017 03:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
समय पर आरटीआई आवेदन के जवाब न मिलने के मामले अक्सर सुने जा सकते हैं, लेकिन गुरुवार को कुछ ऐसा हुआ जो केन्द्र सरकार की काम करने की गति और लापरवाही दोनों को ही उजागर करती हैं।
विज्ञापन
वित्त मंत्रालय के एक विभाग के जनसूचना अधिकारी ने सिर्फ 58 वें मिनट में आरटीआई आवेदन का निस्तारण कर दिया। लेकिन जानकारी देने के लिए और समय लेने की बजाए इन्होंने कह दिया कि नहीं है जानकारी। जबकि इनके पास जानकारी देने के लिए 30 दिन का समय था।
विज्ञापन
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग में 13 अप्रैल को एक आरटीआई आवेदन फाइल की गई। जिसमें पूछा गया था कि वर्ष 2017 में इस विभाग के पास कितने आरटीआई आवेदन आए और उनमें से कितनों का निस्तारण किया गया।
विज्ञापन
शाम 4 बजकर 35 मिनट पर यह आरटीआई आवेदन ऑनलाइन फाइल की गई। तेजी दिखाते हुए इस विभाग के जन सूचना अधिकारी ने ऑनलाइन ही शाम 5 बजकर 33 मिनट पर इस आवेदन का निस्तारण कर आरटीआई आवेदन यह कहते हुए वापस कर दी कि इस तरह की सूचना इनके पास नहीं है।
जन सूचना अधिकारी बेहद लापरवाह रवैया
गौरलतब है कि आरटीआई एक्ट 2005 के तहत हर आरटीआई आवेदन और उनके निस्तारण की जानकारी हर हर विभाग को रखनी होती है उसकी रिपोर्ट मंत्रालय में भेजनी पड़ती है। जबकि आरटीआई आवेदन का जवाब देने के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। यह मामला इसलिए भी और गंभीर हो जाता है क्योंकि हाल ही केन्द्र सरकार पर आरटीआई एक्ट में तमाम संसोधन कर कमजोर करने के आरोप लगे थे।
बेहद लापरवाह रवैया -
आरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के सदस्य और आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक का इस मामले में कहना है कि आरटीआई आवेदन का जवाब न देने के लिए विभाग का इतनी तेजी दिखाने यह अनोखा मामला है।
अगर जन सूचना अधिकारी के पास इसका जवाब नहीं था तो वह इसे आरटीआई की धारा 6 के तहत किसी अन्य विभाग में स्थानान्तरित कर सकते थे या कुछ और वक्त लेकर इसकी जानकारी जुटा सकते थे, जबकि मांगी गई जानकारी बेहद साधारण थी, जिसे हर विभाग को रिकॉर्ड में रखना अनिवार्य है। सिर्फ 58 मिनट में आरटीआई आवेदन का निस्तारण करना यह जाहिर करता है कि जनसूचना अधिकारी की जानकारी देने की मंशा नहीं थी।
बेहद लापरवाह रवैया -
आरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के सदस्य और आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक का इस मामले में कहना है कि आरटीआई आवेदन का जवाब न देने के लिए विभाग का इतनी तेजी दिखाने यह अनोखा मामला है।
अगर जन सूचना अधिकारी के पास इसका जवाब नहीं था तो वह इसे आरटीआई की धारा 6 के तहत किसी अन्य विभाग में स्थानान्तरित कर सकते थे या कुछ और वक्त लेकर इसकी जानकारी जुटा सकते थे, जबकि मांगी गई जानकारी बेहद साधारण थी, जिसे हर विभाग को रिकॉर्ड में रखना अनिवार्य है। सिर्फ 58 मिनट में आरटीआई आवेदन का निस्तारण करना यह जाहिर करता है कि जनसूचना अधिकारी की जानकारी देने की मंशा नहीं थी।