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RSS: 'पाकिस्तान से नहीं, इंडोनेशिया से लें प्रेरणा', भारतीय मुसलमानों पर और क्या बोले आरएसएस नेता सुनील आंबेकर

Wed, 17 Jun 2026 10:34 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 17 Jun 2026 10:34 PM IST
सार

Sunil Ambekar Statement: आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि हिंदू-मुस्लिम संघर्ष समाप्त होना चाहिए क्योंकि सभी का डीएनए एक ही है। उन्होंने भारतीय मुसलमानों से सांस्कृतिक आदर्शों के लिए पाकिस्तान नहीं बल्कि इंडोनेशिया की ओर देखने की बात कही। आंबेकर ने जनसंख्या संतुलन पर जोर दिया और कहा कि आरएसएस परिवार के आकार को लेकर कोई निर्देश नहीं देता। उन्होंने संघ को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संगठन भी बताया।

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RSS Sunil Ambekar for Indian Muslims says take inspiration from indonesia not pakistan population balance
सुनील आंबेकर, आरएसएस नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने हिंदू-मुस्लिम संबंधों, जनसंख्या संतुलन और संघ की वैधानिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। पुणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम संघर्ष को अब समाप्त होना चाहिए क्योंकि सभी भारतीयों का डीएनए एक ही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मुसलमानों को सांस्कृतिक आदर्शों के लिए पाकिस्तान की ओर देखने के बजाय इंडोनेशिया की ओर देखना चाहिए। उनके इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

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हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर आरएसएस नेता ने क्या कहा?

सुनील आंबेकर ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम विवाद आरएसएस के गठन से भी पहले का है। उनके मुताबिक समय के साथ कुछ लोगों के बीच यह धारणा बनी कि धर्म परिवर्तन के साथ राष्ट्र और इतिहास भी बदल जाता है। उन्होंने कहा कि इसी अलगाववादी सोच ने आगे चलकर देश के विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार की। आंबेकर ने कहा कि अब इस संघर्ष को समाप्त होना चाहिए। सभी का डीएनए एक ही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज के भीतर से भी सामाजिक सुधार के सकारात्मक प्रयास सामने आ रहे हैं, जो एक अच्छा संकेत है।

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इंडोनेशिया का उदाहरण क्यों दिया गया?

आरएसएस नेता ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को सांस्कृतिक दृष्टि से पाकिस्तान के बजाय इंडोनेशिया की ओर देखना चाहिए। उन्होंने इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है, लेकिन वहां हिंदू और बौद्ध सांस्कृतिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। आंबेकर का संकेत इस बात की ओर था कि धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत साथ-साथ चल सकती हैं। उनका मानना है कि भारतीय मुसलमानों को भारत की सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं के साथ जुड़ाव बनाए रखना चाहिए।

जनसंख्या संतुलन को लेकर क्या बोले आंबेकर?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हिंदू परिवारों के लिए तीन बच्चों की नीति की वकालत से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि संघ का मुख्य जोर जनसंख्या नियंत्रण नहीं बल्कि जनसंख्या संतुलन पर है। उन्होंने कहा कि यूरोप और चीन जैसे कई देशों को अब अपनी पुरानी जनसंख्या नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा है। आंबेकर ने कहा कि भारत में भी जनसंख्या का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस की ओर से परिवारों पर बच्चों की संख्या को लेकर कोई निर्देश या दबाव नहीं है। प्रत्येक परिवार को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता है।

आरएसएस की वैधानिक स्थिति पर उठे सवालों का क्या जवाब दिया?

कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा आरएसएस की कानूनी स्थिति और उसकी आय के स्रोतों पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में आंबेकर ने कहा कि संघ एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त सामाजिक संगठन है। उन्होंने कहा कि आरएसएस की गतिविधियों को विभिन्न स्तरों पर सरकारी अनुमति मिलती है। संघ के पथ संचलनों के लिए पुलिस की मंजूरी ली जाती है और उसकी शाखाओं को बैंक खाते संचालित करने की अनुमति भी होती है। आंबेकर ने कहा कि आरएसएस के सभी वित्तीय लेन-देन बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से होते हैं। उनके अनुसार संगठन की वैधानिक स्थिति को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं है और इस विषय पर राजनीतिक कारणों से भ्रम पैदा किया जा रहा है।

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