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'न्याय चौपाल' से जनता के विवादों को 'हल' करेगा संघ, कई पूर्व जजों को किया शामिल

Sun, 24 Jun 2018 09:12 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
हरेन्द्र, नई दिल्ली Updated Sun, 24 Jun 2018 09:12 PM IST
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RSS made will give justice and resolve the disputes of the public by Choupal 
- फोटो : PTI

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने एक नया सहयोगी मंच बनाया है, जिसमें मुख्य रूप से वरिष्ठ वकीलों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया गया है। इस मंच के जरिए संघ परिवारिक विवादों, संपत्ति विवादों और पड़ोसियों से जुड़े जैसे सिविल मामलों में समझौता कराने में मदद करेगा।

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संघ के इस नए मंच का नाम है न्याय चौपाल, जिसकी अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी करेंगे। न्याय चौपाल में लाहोटी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अनिल आर दवे, सुप्रीम कोर्ट में वकील गोविंद गोयल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष और वकील आलोक कुमार को भी शामिल किया गया है।
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सूत्रों के मुताबिक न्याय चौपाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबंधित संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के दिमाग की उपज है। इसकी पहली कार्यशाला हाल ही में आयोजित की गई थी, जिसमें संघ नेता कृष्ण गोपाल, लाहोटी, दवे और 16 राज्यों से आए दूसरे संघ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।

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RSS made will give justice and resolve the disputes of the public by Choupal 

सूत्रों के मुताबिक इस मंच को शुरू करने का यह मकसद यह नहीं है कि इससे अदालतों के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी जाएगी, इसके जरिए बल्कि टूट रहे परिवारिक ढांचे को जोड़ने में मदद की जाएगी। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के मुताबिक न्याय चौपाल को बनाने का मकसद नए सामाजिक परिवेश में जिस तरह से परिवार टूट रहे हैं और उनसे सिविल मामले बढ़े रहे हैं, उन्हें शुरुआती स्तर पर हल करना है। न्याय चौपाल किसी भी इलाके में प्रतिष्ठित लोगों के जरिए किसी भी प्रकार के सिविल मामलों को सुलह कराने में मदद करेगी। 

यह ठीक वैसा ही जैसे आज भी गांवों में किसी भी प्रकार के नागरिक विवादों को सुलझाने में गांव की पंचायतें करती हैं। 

चौपाल के मुताबिक हमारी अदालतों पर केसों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। 2017 तक देश की विभिन्न अदालतों में घरेलू और व्यक्तिगत विवादों समेत साढ़े तीन करोड़ केस पेंडिग थे। वहीं सुप्रीम कोर्ट में 60 हजार और विभिन्न हाई कोर्ट्स में 42 लाख और निचली अदालतों में 2.7 करोड़ मामले लंबित हैं। 

अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा

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न्याय चौपाल से जुड़े एक प्रतिनिधि का कहना है कि यह अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा। इस उद्देश्य न तो न्यायपालिका से जुड़ा है और न ही इनसे संबंध स्थापित करना है। हम कोई भी समानांतर प्रणाली चलाना नहीं चाहते। बल्कि अपने आसपास ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं, जहां किसी भी प्रकार का कोई विवाद न हो। 

सूत्रों का कहना है कि चौपाल में समाज के प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाएगा और देशभऱ में एक हजार से ज्यादा टीमें बनाई जाएंगी। अब तक, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने उन लोगों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की हैं, जो चौपाल का हिस्सा बनेंगे और प्रत्येक टीम से इलाके के 10 'प्रतिष्ठित लोगों' के शामिल होने की उम्मीद है।

न्याय चौपाल से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक इस तरह के मंच की जरूरत महसूस की गई थी क्योंकि अदालतों की निगरानी में चलने वाले मध्यस्थता केंद्र भी अदालतों की तरह ही मुश्किलों का सामना करते हैं।

न्होंने बताया कि इन मध्यस्थता केंद्रों में एक दोस्त और शुभचिंतक की कमी खलती है। वहीं ज्यादातर मामलों में हमने देखा है कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति है जो लोगों के साथ तर्क कर सकता है और चीजों को हल कर सकता है, तो बहुत से लोगों को अदालतों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हालांकि लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए न्याय चौपाल जल्द ही कई अभियान और एक वेबसाइट भी लॉन्च करने की योजना बना रही है।  

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