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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हुआ भ्रमित और साधु-संतों में भाजपा का रुख देखकर छाई चुप्पी

Sat, 22 Dec 2018 05:23 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Sat, 22 Dec 2018 05:23 PM IST
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RSS is confused, saints are silent after looking front of BJP
राम मंदिर - फोटो : self

पूर्व सांसद व राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ. राम विलास वेदांती अब क्या बोलें? वेदांती ने अमर उजाला से कहा कि वह भाजपा के खिलाफ बोल नहीं सकते। राम मंदिर बनाने के लिए भाजपा के सिवा किसी और पर भरोसा नहीं कर सकते, लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का नतीजा आने के बाद से भाजपा ने चुप्पी साध ली है। वेदांती का कहना है कि न तो अब भाजपा कुछ बोल रही है और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। इसके कारण एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

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कुंभ पर पड़ेगा असर, आएगा नया एजेंडा

प्रयागराज (पुराना नाम इलाहाबाद) में संगम के किनारे कुंभ नगरी सज गई है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन में न केवल भारी भरकम धनराशि खर्च की है, बल्कि भव्य आयोजन का इंतजाम भी किया है। बताते हैं सबकुछ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सलाह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ की मंजूरी मिलने के बाद हुआ है। संघ भी इसे लेकर काफी उत्साह में था। 
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उद्देश्य था कि कुंभ में धर्म संसद की बैठक के दौरान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को धार दी जाएगी। साधु संत समाज भी इसके लिए आवाज उठाएगा। इसका असर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के कई राज्यों में पड़ेगा और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में मदद मिलेगी। राम मंदिर निर्माण की आवाज उठाने वाले वर्ग के मुंह पर इसको लेकर ताला सा जड़ गया है। 
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डॉ. वेदांती भी मानते हैं कि भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। समझा जा रहा है कि कुंभ में अब भाजपा हिंदुत्व की राह पर रहेगी, लेकिन राम मंदिर निर्माण के मुद्दे से बचती नजर आएगी। सांधु संत समाज ही अपने हिसाब से चर्चा करेगा और अपनी राय व्यक्त करेगा।

क्या संघ भ्रमित है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई भी पदाधिकारी अपने संगठन के खिलाफ नहीं बोलता। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी चंपक राय और अन्य कुछ समय पहले तक अयोध्या में जोरदार तरीके से राम मंदिर की वकालत कर रहे थे। दो महीने पहले महंत नृत्य गोपाल दास की मौजूदगी में विहिप के विनोद बंसल समेत अन्य ने केन्द्र और राज्य  सरकार को दिसंबर तक राम मंदिर निर्माण पर निर्णय लेने की चेतावनी दे दी थी, लेकिन अब चंपक राय के पास राम मंदिर पर चर्चा के लिए समय नहीं है। 

बजरंग दल के एक नेता इस विषय में अभी कुछ नहीं कह पा रहे हैं। संघ के एक वरिष्ठ नेता ने फोन पर पीछा छुड़ाते हुए कहा कि अभी इंतजार कीजिए। भगवान राम हमारे आदर्श हैं और राम मंदिर निर्माण के प्रति हम प्रतिबद्ध हैं। संघ के सूत्र बताते हैं कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ-साथ आरएसएस को राम मंदिर मुद्दे से काफी उम्मीद थी। संघ का गांव-गांव तक फैला संगठन है। लेकिन जिस तरह से नतीजे आए हैं, उसके बाद सारी सोच धरी की धरी रह गई है।

सर संघ चालक भी नहीं बोल रहे हैं

सर संघ चालक मोहन भागवत ने केंद्र सरकार से राम जन्मभूमि में मंदिर निर्माण के लिए कानून लाने की मांग की थी। सर सह कार्यवाह भैय्या जी जोशी ने राम मंदिर निर्माण का रास्ता खोलने की मांग की थी, लेकिन संघ अब इस मांग को धार नहीं दे रहा है। जबकि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है।

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