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गुवाहाटी: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले- सीएए से किसी मुसलमान को दिक्कत नहीं
Wed, 21 Jul 2021 02:30 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 21 Jul 2021 02:30 PM IST
सार
सीएए और एनआरसी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए इसे साम्प्रदायिक रूप दिया जा रहा है। इससे किसी को दिक्कत नहीं है।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सभी भारतीय का डीएनए एक वाले बयान के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर कहा कि इससे किसी मुसलमान को कोई दिक्कत नहीं होगी। सीएए और एनआरसी का हिंदू-मुस्लिम विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है। गुवाहाटी में भागवत ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए इसे साम्प्रदायिक रूप दिया गया है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख ने बताया कि नागरिकता कानून पड़ोसी देशों में उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेगा। "हम आपदा के दौरान इन देशों में बहुसंख्यक समुदायों तक भी पहुंचते हैं। इसलिए अगर कुछ ऐसे हैं जो खतरों और डर के कारण देश में आना चाहते हैं, तो हमें निश्चित रूप से उनकी मदद करनी चाहिए।"
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भागवत ने कहा कि नागरिकता कानून के कारण किसी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा। भागवत ‘सिटिजनशिप डिबेट ओवर एनआरसी एंड सीएए-असम एंड द पॉलिटिक्स ऑफ हिस्ट्री’ (एनआरसी और सीसीएए-असम पर नागरिकता को लेकर बहस और इतिहास की राजनीति) शीर्षक वाली पुस्तक के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि अल्पसंख्यकों का ध्यान रखा जाएगा और अब तक ऐसा ही किया गया है। हम ऐसा करना जारी रखेंगे। सीएए के कारण किसी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा।
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भागवत ने रेखांकित किया कि नागरिकता कानून पड़ोसी देशों में उत्पीड़ित हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि हम आपदा के समय इन देशों में बहुसंख्यक समुदायों की भी मदद करते हैं... इसलिए अगर कुछ ऐसे लोग हैं, जो खतरों और भय के कारण हमारे देश में आना चाहते हैं, तो हमें निश्चित रूप से उनकी मदद करनी होगी। भागवत ने दावा किया कि भारत को नेताओं के एक समूह ने स्वतंत्रता सेनानियों और आम लोगों की सहमति लिए बगैर विभाजित कर दिया तथा कई लोगों के सपने बिखर गए।
विभाजन ने मजूबर किया: भागवत
उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के बाद भारत ने अल्पसंख्यकों की चिंताओं को सफलतापूर्वक दूर किया लेकिन पाकिस्तान ने नहीं... उन्होंने हजारों उत्पीड़ित हिंदुओं, सिखों और जैन परिवारों को घरबार छोड़ने तथा भारत में आने को मजबूर किया। सीएए उन शरणार्थियों की मदद करता है, इसका भारतीय मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने एनआरसी के बारे में कहा कि सभी देशों को यह जानने का अधिकार है कि उनके नागरिक कौन हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक क्षेत्र में है क्योंकि इसमें सरकार शामिल है... लोगों का एक वर्ग इन दोनों मामलों को सांप्रदायिक रूप देकर राजनीतिक हित साधना चाहता है। भागवत ने कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अनधिकृत रूप से बसे लोगों (शरणार्थियों) की पहचान करे ताकि वह अपने लोगों के फायदे के लिए कल्याणकारी योजनाएं बना सके।
तब पैदा होता है सामाजिक मूल्य को खतरा
उन्होंने कहा कि इन लोगों की संख्या बढ़ती रही और अन्य क्षेत्रों सहित चुनावी राजनीति पर हावी होते रहे तो मूल निवासी निश्चित रूप से भयभीत होंगे। उन्होंने कहा कि समस्या तब शुरू होती है जब एक खास समूह के लोग पांच हजार साल पुरानी सभ्यता की अवज्ञा करते हैं और वे अपनी बढ़ती आबादी के बूते अपनी लोकतांत्रिक शक्ति का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे मूल निवासियों की संस्कृति और सामाजिक मूल्य को खतरा पैदा होता है।
भागवत ने कहा कि मुस्लिम परिवारों का भारत में सुव्यस्थित रूप से प्रवास करना, एक खास तरीके से अपनी आबादी बढ़ाना, असमी सहित विभिन्न समुदायों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोगों का एक बड़ा हिस्सा सभी संवैधानिक अधिकार मांग रहा है लेकिन वे अपने कर्तव्य निभाने को इच्छुक नहीं हैं, जबकि इसे भी उसी संविधान ने परिभाषित किया है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और पुस्तक के लेखक प्रोफेसर एन गोपाल महंत ने भी संबोधित किया।
सांप्रदायिक कहानी बनाकर लाभ लेना चाहते हैं कुछ लोग- भागवत
पुस्तक विमोचन पर मोहन भागवत ने कहा कि सभी देशों को यह जानने का अधिकार है कि उसके नागरिक कौन हैं। उन्होंने कहा, "मामला राजनीतिक क्षेत्र में है क्योंकि सरकार इसमें शामिल है। लिहाजा लोगों का एक वर्ग इन दो मुद्दों के इर्द-गिर्द एक सांप्रदायिक कहानी बनाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहता है।"