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RSS के मुखिया ने एयर इंडिया के निजीकरण पर सरकार के चेताया- कहा स्वामित्व किसी भारतीय कंपनी को मिले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Tue, 17 Apr 2018 05:28 PM IST
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एयर इंडिया भारी घाटे से जूझ रही है। इसलिए सरकार कर्ज के बोझ से दबी अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन को बेच देना चाहती है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू को गई है। एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर तरह -तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।इसीबीच राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी एयर इंडिया की इस विनिवेश प्रक्रिया में अपनी राय दी है। उन्होंने कहा है कि एयर इंडिया का विनिवेश हो लेकिन इसका स्वामित्व उसी भारतीय कंपनी को दिया जाए जो इसे चलाने में सक्षम हो।
यही नहीं भागवत ने इशारों इशारों में मोहन भागवत ने सरकार को चेताया भी है। उन्होंने कहा कि देश में एयर इंडिया काफी महत्ता है, इसलिए जो इसे सही ढंग से चला सके, उसे ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने अपनी राय जाहिर करते हुए साफ किया कि एयर इंडिया को चलाने वाला नया ऑपरेटर भारतीय ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को आकाश का नियंत्रण और स्वामित्व नहीं गंवाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का सरकार ने परिचालन और प्रबंधन ठीक से नहीं किया इसीलिए आज वह इस तरह घाटे से गुजर रही है। भागवत ने कहा कि दुनिया में कहीं भी राष्ट्रीय एयरलाइन में 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी का जिक्र किया जहां विदेशी हिस्सेदारी की सीमा सिर्फ 29 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यदि विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49 प्रतिशत को पार कर जाती है तो शेयरों को जब्त कर उन्हें घरेलू निवेशकों को बेचा जाना चाहिए , जैसा अन्य देशों में होता है।
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बता दें कि एयर इंडिया लगातार घाटे में चल रही है। जिससे सरकार काफी चिंतित है। यही वजह है कि सरकार एयर इंडिया का निजीकरण कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल एयर इंडिया के निजीकरण को मंजूरी दे चुका है। साथ ही एयर इंडिया में 49 फीसदी विदेशी निवेश को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार साल 2012 से अब तक एयर इंडिया में करीब 23 हजार करोड़ रुपये की भारी पूंजी लगा चुकी है।
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यही नहीं भागवत ने इशारों इशारों में मोहन भागवत ने सरकार को चेताया भी है। उन्होंने कहा कि देश में एयर इंडिया काफी महत्ता है, इसलिए जो इसे सही ढंग से चला सके, उसे ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने अपनी राय जाहिर करते हुए साफ किया कि एयर इंडिया को चलाने वाला नया ऑपरेटर भारतीय ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को आकाश का नियंत्रण और स्वामित्व नहीं गंवाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का सरकार ने परिचालन और प्रबंधन ठीक से नहीं किया इसीलिए आज वह इस तरह घाटे से गुजर रही है। भागवत ने कहा कि दुनिया में कहीं भी राष्ट्रीय एयरलाइन में 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी का जिक्र किया जहां विदेशी हिस्सेदारी की सीमा सिर्फ 29 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यदि विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49 प्रतिशत को पार कर जाती है तो शेयरों को जब्त कर उन्हें घरेलू निवेशकों को बेचा जाना चाहिए , जैसा अन्य देशों में होता है।
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बता दें कि एयर इंडिया लगातार घाटे में चल रही है। जिससे सरकार काफी चिंतित है। यही वजह है कि सरकार एयर इंडिया का निजीकरण कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल एयर इंडिया के निजीकरण को मंजूरी दे चुका है। साथ ही एयर इंडिया में 49 फीसदी विदेशी निवेश को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार साल 2012 से अब तक एयर इंडिया में करीब 23 हजार करोड़ रुपये की भारी पूंजी लगा चुकी है।