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भारतीय मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक संतुष्ट: भागवत
Sat, 10 Oct 2020 02:55 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 10 Oct 2020 02:55 AM IST
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : ANI
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीय मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि जब भारतीयता की बात आती है तो सभी आस्थाओं के लोग एकसाथ खड़े होते हैं। महाराष्ट्र की एक हिंदी पत्रिका को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, कट्टरता और अलगाववाद वही लोग फैलाते हैं जिनके खुद के स्वार्थ प्रभावित होते हैं।
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संघ प्रमुख ने मुगल शासक अकबर के खिलाफ जंग में महाराणा प्रताप की सेना में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के शामिल होने का का उल्लेख करते हुए कहा, देश में जब भी संस्कृति पर हमला हुआ सभी धर्मों के लोग साथ मिलकर खड़े हुए।
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उन्होंने कहा, क्या दुनिया में एक भी ऐसा उदाहरण है जहां किसी देश की जनता पर शासन करने वाला कोई विदेशी धर्म अभी अस्तित्व में हो। कहीं नहीं, ऐसा केवल भारत में है। उन्होंने कहा, भारत के विपरीत पाकिस्तान ने कभी दूसरे धर्मों के लोगों को अधिकार नहीं दिए और इसे मुसलमानों के अलग देश की तरह बना दिया गया।
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धर्म सब को एकता के सूत्र में पिरोने वाला होता है
संघ प्रमुख ने कहा, संविधान में यह नहीं कहा गया है कि देश में केवल हिंदू रह सकते हैं। यह भी नहीं कहा गया है कि केवल हिंदुओं की बात सुनी जाएगी, या अगर यहां रहना है तो आपको हिंदुओं की सर्वोच्चता स्वीकार करनी होगी।
आगे कहा कि हमने उनके लिए जगह बनाई। यह हमारे देश का स्वभाव है और अंतर्निहित स्वभाव ही हिंदू कहलाता है। हिंदू का इससे लेना-देना नहीं है कि कौन किसकी पूजा करता है। धर्म जोड़ने वाला, उत्थान करने वाला और सभी को एक सूत्र में पिरोने वाला होना चाहिए।
राममंदिर निर्माण राष्ट्रीय मूल्य और चरित्र का प्रतीक
भागवत ने कहा, जब भी भारत और इसकी संस्कृति तथा पूर्वजों के प्रति गौरव की भावना पैदा होती है तो सभी धर्मों के बीच भेद खत्म हो जाते हैं। सभी धर्मों के लोग साथ खड़े होते हैं। राममंदिर निर्माण पर उन्होंने कहा, यह केवल कर्मकांड के उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि मंदिर राष्ट्रीय मूल्य और चरित्र का प्रतीक है।
असलियत यह है कि इस देश के लोगों के मनोबल और मूल्यों का दमन करने के लिए मंदिरों को ध्वस्त किया गया। इस वजह से लंबे समय से हिंदू समाज मंदिरों का पुनर्निर्माण चाहता था। हमारे आदर्श श्रीराम के मंदिर को गिराकर हमें अपमानित किया गया। हम इसका पुनर्निर्माण करना चाहते हैं, इसका विस्तार करना चाहते हैं और इसलिए भव्य मंदिर बनाया जा रहा है।