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नागपुर में होगी संघ के अगले सरकार्यवाह की घोषणा, जानिए कैसे चुने जाते हैं RSS प्रमुख

Sat, 10 Mar 2018 10:05 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Updated Sat, 10 Mar 2018 10:05 AM IST
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RSS chief executive election is important
आरएसएस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हर तीन साल बाद होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा नागपुर में जारी है। इसमें सबसे अहम घोषणा उसके सरकार्यवाह (महामंत्री) के नाम की होनी है। खबरों के मुताबिक, अगर मौजूदा सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी पद छोड़ते हैं तो उनकी जगह दत्तात्रेय होसबोले को नियुक्त किया जा सकता है। इस नियुक्ति के लिए चयन का अलग तरीका है। इसमें मतदान नहीं होता है। 
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आरएसएस की देशभर में लगभग 60 हजार शाखाएं हैं। आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में नए सरकार्यवाह या महासचिव का चुनाव होना है। इसके लिए देशभर से आए स्वंयसेवक सप्ताह के आखिर में मिलेंगे। इसका चुनाव होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि संघ में सरकार्यवाह पर बड़ी जिम्मेदारी होती है। इनकी नजर दिन प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रमों पर रहती है। यह पद आरएसएस के टॉप मैनेजमैंट का हिस्सा होता है जोकि संगठन में सलाहकार की भूमिका निभाता हैं। 
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ऐसे होता है सरकार्यवाह का चयन

सरकार्यवाह के चयन के लिए अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की 9 मार्च से 11 मार्च तक मीटिंग चल रही है। यह आरएसएस में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली बॉडी होती है। इसकी मीटिंग हर साल मार्च के दूसरे और तीसरे सप्ताह में होती है। यह मीटिंग महीने के दूसरे और तीसरे रविवार को होती है। 
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अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में 1300 सदस्य होते हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा अखिल भारतीय प्रतिनिधि का भी होता है। जो सक्रिय स्वयंसेवकों का है। इसमें शामिल करीब 50 सक्रिय स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व एक प्रान्त प्रतिनिधि (राज्य प्रतिनिधि) द्वारा किया जाता है। प्रत्येक अखिल भारतीय प्रतिनिधि 20 राज्य प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व करता है।
 

आरएसएस की देशभर में लगभग 60 हजार शाखाएं प्रतिदिन लगती हैं

RSS chief executive election is important
आरएसएस

अखिल भारतीय प्रतिनिधियों के अतिरिक्त संघ के अन्य संगठन भी हैं। इनमें से विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) को सबसे बड़ा संगठन माना जाता है, जिसमें करीब 40 प्रतिनिधि होते हैं।  संघ के सभी पूर्व प्रचारक (राज्य के नेताओं) को एबीपीएस के लिए आमंत्रित किया जाता है। आम तौर पर भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव की बैठक में प्रतिनिधित्व करती है।

बता दें कि कोयंबटूर में पिछले साल की एबीपीएस बैठक में सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, आरएसएस का काम अब भारत में 59,136 स्थानों पर पहुंच गया है। यानि आसएसएस की देशभर में लगभग 60 हजार शाखाएं प्रतिदिन लगती हैं। 

बता दें कि संघ में शीर्ष पद सरसंघचालक (अध्यक्ष) का होता है और इस पद पर मोहन भागवत काबिज हैं। जिनकी भूमिका संगठन को दिशानिर्देश देना है। जबकि सरकार्यवाह सहयोगी संगठनों से तालमेल से लेकर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करने जैसे रोजमर्रा के फैसले लेते हैं। उनका कार्यकाल तीन साल का होता है, जिसे प्रतिनिधि सभा जितनी बार चाहे बढ़ा सकती है।

सत्तर साल के भैयाजी लगातार तीन बार से सरकार्यवाह हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ हैं। इसीलिए उन्होंने जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जताई है। कर्नाटक के मूल निवासी दत्तात्रेय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लंबे समय तक प्रभारी रहे।

63 वर्षीय दत्तात्रेय संघ के युवा कार्यकर्ताओं में बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी खास पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी निकटता भी है। यूपी में भाजपा की अभूतपूर्व जीत और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनवाने तक में दत्ता की अहम भूमिका थी।

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