फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   RSS call for reviewing 'socialist', 'secular' words about restoring Constitution to original spirit: Organiser

RSS: होसबोले की मांग से संघ सहमत, कहा- समाजवादी-पंथनिरपेक्ष शब्द हटाना संविधान की मूल भावना को लौटाने की कोशिश

Fri, 27 Jun 2025 06:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 27 Jun 2025 06:06 PM IST
सार

इस लेख में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा गया कि वह आज भाजपा और संघ पर संविधान को खतरे में डालने का आरोप लगाती है, जबकि आपातकाल के दौरान खुद उसने संविधान में मनमाने बदलाव किए, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचला और हजारों लोगों को जेल में डाला। ऑर्गेनाइजर का कहना है कि कांग्रेस ने आज तक इसके लिए माफी नहीं मांगी।

विज्ञापन
RSS call for reviewing 'socialist', 'secular' words about restoring Constitution to original spirit: Organiser
दत्तात्रेय होसबले - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले द्वारा संविधान की प्रस्तावना में शामिल 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्दों की समीक्षा की मांग का मतलब संविधान को तोड़ना नहीं, बल्कि उसे उसकी मूल भावना में लौटाना है- यह बात संघ से जुड़ी साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर में शुक्रवार को प्रकाशित एक लेख में कही गई है। इस लेख में कहा गया है कि कांग्रेस की तरफ से आपातकाल के दौरान किए गए 42वें संशोधन से ये शब्द संविधान में जोड़े गए थे, जो कि संविधान सभा की मूल भावना या बहसों का हिस्सा नहीं थे। यह कदम एक 'राजनीतिक चाल' थी, न कि संविधान सभा के सोच-समझ कर लिए गए फैसले का परिणाम।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - RSS on Constitution: संविधान की प्रस्तावना से हटे समाजवाद और पंथनिरपेक्ष; होसबाले ने कहा- कांग्रेस माफी मांगे
विज्ञापन


ऑर्गेनाइजर के लेख में क्या कहा गया?
दत्तात्रेय होसबाले की टिप्पणी संविधान को 'आंबेडकर की लोकतांत्रिक सोच' के अनुरूप बनाने की दिशा में एक खुली बहस का न्योता है। संविधान सभा में 1948 में 'भारत को समाजवादी, संघीय और पंथनिरपेक्ष राज्य' कहने का प्रस्ताव आया था जिसे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि संविधान किसी खास विचारधारा को थोपने का माध्यम नहीं होना चाहिए। आंबेडकर ने कहा था कि समय और परिस्थितियों के अनुसार देश की जनता को अपने आर्थिक और सामाजिक ढांचे का फैसला खुद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि समाजवाद को भविष्य में छोड़कर कोई बेहतर रास्ता दिखता है तो लोग उसे अपनाने के लिए स्वतंत्र हों।
विज्ञापन
विज्ञापन


'पहले से ही सुनिश्चित है धार्मिक स्वतंत्रता'
इस लेख में कहा गया है कि पंथनिरपेक्ष शब्द पर आंबेडकर ने शायद इसलिए कोई विशेष टिप्पणी नहीं की क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 पहले से ही धार्मिक स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करते हैं। इस कारण, यह शब्द प्रस्तावना में जोड़ना आवश्यक नहीं था।

यह भी पढ़ें - Congress: 'संविधान की आत्मा पर हमला', समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष शब्द की समीक्षा को लेकर जयराम रमेश ने RSS को घेरा

होसबाले की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने होसबाले की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि संघ ने कभी संविधान को स्वीकार ही नहीं किया। यह आंबेडकर की समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की सोच को खत्म करने की एक साजिश है। पार्टी ने कहा कि यह संविधान की आत्मा पर एक जानबूझकर किया गया हमला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed