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बैंक ऑफ इंडिया का 500 करोड़ दबाए हैं कोठारी बंधु
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 21 Feb 2018 03:29 AM IST
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रोटोमैक पेन के मालिक विक्रम कोठारी
- फोटो : Facebook
पूरे देश में जहां नीरव मोदी और कानपुर के कोठारी बंधुओं के बैंक के साथ धोखाधड़ी की खबर चर्चा है। कोठारी बंधुओं तथा कई अन्य समूहों की बैंकों के साथ धोखाधड़ी और एनपीए की आंच ने बैंक ऑफ इंडिया को भी अपने लपेटे में लिया है।
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बैंक ऑफ इंडिया को 800 करोड़ का चूना कानपुर के रोटोमैक पेन के मालिक कोठारी बंधु, एलएमएल वेस्पा के मालिक, महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग ग्रुप एवं क्राउन अल्बा इंस्ट्रूमेंटेशन प्राइवेट लिमिटेड के मालिकों ने लगाया है। इलाहाबाद में बैंक ऑफ इंडिया का क्षेत्रीय कार्यालय होने के कारण इस बात की यहां चर्चा है।
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डीआरटी की नोटिस के बाद भी पैसा जमा नहीं
0 बैंक ऑफ इंडिया (लीड बैंक) के बार-बार नोटिस देने के बाद भी बकाया मूलधन और ब्याज नहीं जमा कर रहे हैं। बैंक की ओर से नीलामी की नोटिस को नजरअंदाज करते हुए यह प्रतिष्ठान मनमानी कर रहे हैं। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शहर स्थित ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) में मुकदमा दाखिल किया गया है। अधिकरण मामले की निगरानी कर रहे एक वरिष्इ अधिकारी ने बताया कि बैंक के सबसे बड़े बकायेदारों में कानपुर के रोटोमैक पेन के निर्माता कोठारी बंधु हैं।
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इस समूह पर बैंक का 557 करोड़ 56 लाख रुपये का बकाया है। बैंक के सूत्रों ने बताया कि पैसा नहीं लौटाए जाने के कारण जिन संपत्तियों की कुर्की होनी है उनमें मेसर्स क्राउन अल्वा इंस्ट्रूमेंटेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कानपुर, कोठारी फूड्स एण्ड फ्रागरेंसी प्राइवेट लिमिटेड, रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड सहित कई अन्य शामिल हैं। इन संपत्तियों के मालिक विक्रम कोठारी, साधना कोठारी, राहुल कोठारी एवं अर्चना कोठारी हैं।
दूसरे कई समूहों पर है बड़ा बकाया
इसी प्रकार महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज ग्रुप मंघना कानपुर पर 10 करोड़ 76 लाख रुपये बकाया है। इन कंपनियों को बार-बार नोटिस के बाद भी पैसा जमा नहीं करने पर ऋण अधिकरण में वाद दाखिल किया गया है। इसी प्रकार की देनदारी कानपुर के शाह बिल्डर पर तीन करोड़, नौशाद लेदर्स एण्ड फिनिसर्स पर करीब तीन करोड़, एलएमएल वेस्पा पर 19 करोड़ 59 लाख से अधिक की धनराशि बकाया है।
बैंक के अधिकारी ने बताया कि इसी प्रकार से हरदोई की बधौली शुगर मिल पर 36 करोड़ से अधिक का बकाया है। बैंक के अधिकारी ने बताया कि दबाव बनाए जाने पर इन बकायेदारों ने कुछ समय पूर्व लगभग पांच करोड़ जमा किया था।