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स्मार्ट बेटियां: रोली बनी गांव में रोल मॉडल सिलाई के साथ जारी पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Nov 2018 09:01 PM IST
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Roli Mishra
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वकील लखाई खास गांव की खासियत भी यही है कि यहां की लड़कियों की शादी 16-17 तक कर दी जाती है। सामाजिक दबाव और आर्थिक मजबूरियों ने रोली मिश्रा को भी इसी गर्त में ढकेल दिया होता अगर उसने जिद न ठानी होती।
श्रावस्ती के गिलौला ब्लॉक के इस गांव के बाल विवाह के चलन को 17 साल की रोली ने चुनौती दी। आर्थिक मजबूरियों से पार पाने के लिए उसने सिलाई से कमाई की राह पकड़ी और घर की मदद करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी है। किसान की बेटी रोली की तीन और बहनें और एक भाई है। दो बहनों की शादी हो चुकी है और रोली अपने परिवार का सहारा और रोल मॉडल बनने के साथ अपने भविष्य की इबारत अपने ढंग से लिख और संवार रही है।
रोली के संकल्प की वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी सुमन देवी ने। अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
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श्रावस्ती के गिलौला ब्लॉक के इस गांव के बाल विवाह के चलन को 17 साल की रोली ने चुनौती दी। आर्थिक मजबूरियों से पार पाने के लिए उसने सिलाई से कमाई की राह पकड़ी और घर की मदद करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी है। किसान की बेटी रोली की तीन और बहनें और एक भाई है। दो बहनों की शादी हो चुकी है और रोली अपने परिवार का सहारा और रोल मॉडल बनने के साथ अपने भविष्य की इबारत अपने ढंग से लिख और संवार रही है।
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रोली के संकल्प की वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी सुमन देवी ने। अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
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