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कराची में रोहिंग्याई युवकों को मिल रही आतंकी ट्रेनिंग
गुंजन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 02 Apr 2017 04:48 AM IST
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Saudi Arabia is responsible for spreading terrorism in the World
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एजेंसियां म्यांमार में बौद्धों की हिंसा से पलायन कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को अपने नापाक जाल में फंसा रही हैं। धर्म के नाम पर बरगला कर रोहिंग्याई युवकों को आतंकवाद की पाठशाला में पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है। सुरक्षा एजेंसियों को मिली सूचना के मुताबिक यह पाठशाला पाकिस्तान के कराची के पास होरंगी में है। यहां अब तक करीब 700 रोहिंग्याई युवकों को आतंकवाद की ट्रेनिंग दी गई है। इन्हें बड़े सुनियोजित तरीके से कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में जैश-ए-मोहम्मद इस काम को अंजाम दे रहा है। जैश के मूल संगठन हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी का वरिष्ठ मौलाना अब्दुल हुद्दूस पूरी साजिश का मुखिया है। गौरतलब है कि मौलाना मसूद अजहर इसी जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है जिसके सिर पर पाकिस्तान के साथ इन दिनों चीन सरकार का हाथ भी है।
इन खुफिया सूचनाओं से भारतीय एजेंसियां सतर्क हैं। एजेंसी ने गृहमंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) को इस बाबत विस्तार से एक रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के पास पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की गतिविधि भी देखी गई है।
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एजेंसी का मानना है कि लश्कर सीमा से ही युवकों को अपने जाल में फंसाता है। भारत की चिंता है कि बौद्ध बहुल म्यांमार की घरेलू हिंसा से भाग कर रोहिंग्याई पड़ोसी देशों में पलायन कर रहे हैं। बांग्लादेश में इनका जमावड़ा वहां की सरकार के लिए जटिल मसला बनता जा रहा है। इसके अलावा उत्तर पूर्वी राज्यों में भी रोहिंग्याई पहुंच रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में भी इनकी मौजूदगी पर पैनी निगाह रखी जा रही है। जम्मू में रोहिंग्याई कैंप भी है। लेकिन एजेंसी के मुताबिक, जम्मू के कैंप के लोगों के इन गतिविधियों से जुड़े होने की कोई खबर नहीं है। गृहमंत्रालय ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर सरकार से रोहिंग्याई पर पूरी रिपोर्ट तलब की है।
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पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की सरपरस्ती में जैश-ए-मोहम्मद इस काम को अंजाम दे रहा है। जैश के मूल संगठन हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी का वरिष्ठ मौलाना अब्दुल हुद्दूस पूरी साजिश का मुखिया है। गौरतलब है कि मौलाना मसूद अजहर इसी जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है जिसके सिर पर पाकिस्तान के साथ इन दिनों चीन सरकार का हाथ भी है।
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इन खुफिया सूचनाओं से भारतीय एजेंसियां सतर्क हैं। एजेंसी ने गृहमंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) को इस बाबत विस्तार से एक रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के पास पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की गतिविधि भी देखी गई है।
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एजेंसी का मानना है कि लश्कर सीमा से ही युवकों को अपने जाल में फंसाता है। भारत की चिंता है कि बौद्ध बहुल म्यांमार की घरेलू हिंसा से भाग कर रोहिंग्याई पड़ोसी देशों में पलायन कर रहे हैं। बांग्लादेश में इनका जमावड़ा वहां की सरकार के लिए जटिल मसला बनता जा रहा है। इसके अलावा उत्तर पूर्वी राज्यों में भी रोहिंग्याई पहुंच रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में भी इनकी मौजूदगी पर पैनी निगाह रखी जा रही है। जम्मू में रोहिंग्याई कैंप भी है। लेकिन एजेंसी के मुताबिक, जम्मू के कैंप के लोगों के इन गतिविधियों से जुड़े होने की कोई खबर नहीं है। गृहमंत्रालय ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर सरकार से रोहिंग्याई पर पूरी रिपोर्ट तलब की है।