{"_id":"5c622674bdec2273771f35c7","slug":"robert-vadra-interrogated-about-villa-in-dubai-after-flats-in-london","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंदन के फ्लैट के बाद अब दुबई में विला को लेकर रॉबर्ट वाड्रा ईडी के निशाने पर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
लंदन के फ्लैट के बाद अब दुबई में विला को लेकर रॉबर्ट वाड्रा ईडी के निशाने पर
Tue, 12 Feb 2019 07:20 AM IST
sapna singla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: sapna singla
Updated Tue, 12 Feb 2019 07:20 AM IST
विज्ञापन
रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जांच वाड्रा द्वारा बेनामी लेनदेन से विदेश में महंगी संपत्तियों को खरीदने पर फोकस है। अब जांचकर्ताओं ने लंदन में संपत्तियों के साथ दुबई में खरीदे गए विला में भी रुचि ली है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ताओं ने पहले वाड्रा से 26 करोड़ रुपये कीमत वाले लंदन के 12, अलॉर्टन हाउस, ब्रायनस्टोन स्क्वायर को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था, वहीं अब वाड्रा से यह भी पूछा गया है कि क्या वह दुबई के जुमैरा में 14 करोड़ रुपये कीमत वाले विला ई-74 से उनका क्या संबंध है।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार वाड्रा से दुबई की कंपनी स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट्स में भारी मात्रा में नकदी जमा करने को लेकर भी सवाल किए। इस कंपनी का नाम वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से मिलता जुलता है। सूत्रों के मुताबिक वाड्रा से सीसी थम्पी से उनके संबंधों को स्पष्ट करने के लिए कहा गया। थम्पी स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट का शेयरहोल्डर था, जिसने भगोड़े हथियार कारोबारी संजय भंडारी से लंदन का फ्लैट जून 2010 में खरीदा था। ईडी को शक है कि यह कंपनी केवल एक शेल कंपनी है।
विज्ञापन
वहीं, स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट कंपनी के साथ संबंधों को वाड्रा ने नकार दिया। जांच से जुड़े एक सूत्र के अनुसार वाड्रा घबराए से लग रहे थे। बता दें कि स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट का नाम 30 मार्च 2013 को मेफेयर इन्वेस्टमेंट में बदल दिया गया था, जब भगोड़ा हथियार कारोबारी संजय भंडारी इनकम टैक्स की जांच में घेरे में आया था। यह आरोप है कि भंडारी ने इस फ्लैट का भुगतान उस राशि से किया जो उसे एक ओएनजीसी कांट्रैक्ट एक दक्षिण कोरियाई मल्टीनेशनल कंपनी को दिलवाने पर मिली थी।