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जम्मू-कश्मीर: हिंसा फैलाने वाले उग्रवादियों को सता रही कैश की किल्लत

Tue, 09 May 2017 10:15 AM IST
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर Updated Tue, 09 May 2017 10:15 AM IST
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Rise in number of locals joining Jammu & Kashmir militancy causing cash crunch
घाटी में पत्थरबाज - फोटो : Dawn
हाल ही में घाटी में हुई बैंक डकैतियों पर ध्यान दिया जाए तो साफ पता है कि स्थानीय युवाओं के उग्रवादियों के साथ जुड़ने से धाटी में कैश और हथियारों की कमी हो गई हैं। बीते 6-7 महीने घाटी में 13 डकैतियों और लूट की खबर सामने आई हैं, जिसमें से 9 वारदातों की तारीख नोटबंदी के बाद की है। 8 नवंबर के बाद हुई घोषणा के बाद से ही घाटी में ऐेसे संगठनों के पास पैसा कम है, जो इसका इस्तेमाल युवाओँ को भड़काने में करते हैं।
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लूट के ज्यादार मामलों में उन बैंकों को निशाने पर लिया गया, जिनका नेटवर्क काफी बड़ा था। 21 नवंबर 2016 से 3 मई 2017 तक जेएंडके बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, इलाकी देहात बैंक से करीब 91 लाख रुपये लूटे जा चुके हैं। 9 प्रयासों में से 7 बार सिर्फ जेएंडके बैंक की बडगाम, अनंतनाग औऱ कुलगाम शाखाओं को निशाने पर लिया गया है। साथ ही शोपियान और पुलवामा में भी इलाकी देहात बैंक और एसबीआई को निशान पर लिया गया है।
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पाकिस्तान भी नहीं कर पा रहा मदद

Rise in number of locals joining Jammu & Kashmir militancy causing cash crunch
घाटी में पत्थरबाज - फोटो : twitter
इसके अलावा कैश और हथियारों की छोटी-मोटी लूट की वारदात में घाटी में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, "8 नवंबर से पहले उग्रवादियों के पास काफी संख्या में नकदी थी और उस समय इनकी संख्या भी ज्यादा नहीं थी। पाकिस्तान भले ही इस तरह के आतंकवाद को स्पॉन्सर कर, मगर उन्हें पैसा भारत का ही चाहिए। ऐसे में वो लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देते हैं।"

इसके अलावा अधिकारी ने बताया, "सीमापार से आ रहे मैसेजों में उनका प्रॉपोगेंडा साफ नजर आ रहा है। उनके संदेशों के अनुसार लूट का किसी को अपना बनाना धर्म में सही बताया गया है। वो इसे 'माल-ए-गनीमत' मान रहे हैं।" साथ ही पाकिस्तान से की जाने वाली मदद सामान के रूप में ज्यादा होती है, मगर अपने खर्चों के लिए उन्हें कैश की जरूरत होती है। ऐसे लोगों की ट्रेनिंग, हथियारों और पगार कैश में ही दी जाती है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार पाकिस्तान से नकद और हथियार सीमा पर भारत के पहुंचा पाना संभव नहीं। ऐसे में स्थानीय उग्रवादियों को कैश की सख्त जरूरत पड़ती है। पुलिस का कहना है कि उसने ज्यादातर संदिग्ध बैंक अकाउंट फ्रीज करवा दिए हैं और अब वो उन लोगों की तलाश कर रही है जो लूट और डकैती की घटनाओं की प्लानिंग करते हैं।
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