महाराष्ट्र: महायुति के भीतर दरार! एमएलसी चुनाव में हार पर भाजपा ने शिंदे शिवसेना को घेरा, क्या आरोप लगाए?
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति को पांच में से केवल दो सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी महा विकास आघाड़ी ने तीन सीटें जीत लीं। इसके बाद भाजपा ने सहयोगी शिवसेना पर चुनाव में साथ नहीं देने और गठबंधन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। अब भाजपा नेता नतीजों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। क्या इस हार से महायुति के भीतर मतभेद और बढ़ेंगे? क्या भाजपा और शिवसेना के बीच तालमेल सुधरेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में आपसी मतभेद सामने आ गए हैं। पांच सीटों पर हुए चुनाव में विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने सहयोगी शिवसेना पर सहयोग नहीं करने और गठबंधन की एकता को कमजोर करने का आरोप लगाया है। इस विवाद ने महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के भीतर राजनीतिक खींचतान को सामने ला दिया है।
महायुति की हार पर भाजपा ने शिवसेना पर क्या आरोप लगाए?
महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर की सीटों पर गठबंधन के साथ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। उन्होंने कहा कि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को आखिरी समय में समर्थन देने से महायुति की एकजुटता को नुकसान पहुंचा। बन के मुताबिक, शिवसेना के इस फैसले से गठबंधन के सहयोगियों के बीच तालमेल प्रभावित हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अगर शिवसेना ने भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का साथ दिया होता, तो गठबंधन सभी पांच सीटें जीत सकता था।
शिवसेना के किस फैसले को हार की वजह बता रही है भाजपा?
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर गठबंधन के हितों के बजाय एक सीट पर ध्यान देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुणे में एक सीट के लिए अलग रुख अपनाने से सहयोगी दलों को नुकसान हुआ और गठबंधन तीन अतिरिक्त सीटें जीतने का अवसर गंवा बैठा। बन ने यह भी आरोप लगाया कि शिवसेना के मंत्री अब्दुल सत्तार ने छत्रपति संभाजीनगर में राकांपा के खिलाफ प्रचार किया, जिससे गठबंधन की संभावनाओं पर असर पड़ा। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। दिए गए विवरण में शिवसेना की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है।
भाजपा के दूसरे नेताओं ने नतीजों पर क्या सवाल उठाए?
महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने भी चुनाव नतीजों की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गठबंधन के पास पांचों सीटें जीतने का अवसर था, तो वह केवल दो सीटों पर क्यों सिमट गया। उन्होंने कहा कि महायुति के सभी घटक दलों को मिलकर विचार करना चाहिए कि चुनाव में कहां कमी रह गई। भाजपा नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी इन नतीजों के लिए गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल की कमी को जिम्मेदार मान रही है। महाराष्ट्र में महायुति में भाजपा, शिवसेना और राकांपा शामिल हैं।
पांच सीटों पर किस पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की?
23 अक्तूबर को पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था। इनमें पुणे स्नातक सीट पर राकांपा (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की। नागपुर स्नातक सीट कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के खाते में गई। छत्रपति संभाजीनगर यानी मराठवाड़ा स्नातक सीट पर भी राकांपा (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। वहीं, पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक सीट पर शिवसेना के किरण सरनाइक विजयी हुए। इस तरह विपक्षी महा विकास आघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटें मिलीं। अब भाजपा नेताओं की मांग है कि गठबंधन इस प्रदर्शन की समीक्षा करे और सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करे।