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Hindi News ›   India News ›   Retired top officials of several PSU companies have written a 13-page letter to Prime Minister Narendra Modi against the PSU privatisation decision of government

विनिवेश पर सवाल: सेवानिवृत वरिष्ठ अफसरों ने प्रधानमंत्री को लिखा 13 पन्नों का पत्र, पूछा- इन परिवारों का क्या होगा?

Fri, 12 Mar 2021 10:28 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 12 Mar 2021 10:28 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने बजट में विभिन्न पीएसयू कंपनियों के विनिवेश के जरिए पैसे जुटाने को बनाया लक्ष्य, सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं इन कंपनियों के कर्मचारी...

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Retired top officials of several PSU companies have written a 13-page letter to Prime Minister Narendra Modi against the PSU privatisation decision of government
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के विनिवेश का विरोध - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार ने विभिन्न पीएसयू कंपनियों का विनिवेश कर इसके जरिए पैसा जुटाने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। लेकिन सरकार के इस निर्णय का हर स्तर से विरोध किया जा रहा है। अब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और कई पीएसयू कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 13 पन्नों का पत्र लिखकर इन कंपनियों का विनिवेश रोकने की मांग की है।

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अधिकारियों ने कहा है कि ये कंपनियां लंबे समय तक देश की सेवा करती रही हैं और ये आज भी लाभकारी रहते हुए देश को सर्वश्रेष्ठ सेवा दे रही हैं। ऐसे में इन कंपनियां का विनिवेश कर सब कुछ प्राइवेट सेक्टर के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए।
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पत्र लिखने वाले अधिकारियों में पूर्व एडिशनल डायरेक्टर जनरल वीवी लक्ष्मीनारायण और राष्ट्रीय इ्स्पात निगम (RINL) के पूर्व चेयरमैन शिवसागर राव शामिल हैं। ये अधिकारी आरआईएनएल के विनिवेश का विरोध कर रहे हैं और इस कंपनी के विनिवेश पर उन परिवारों के हक का मामला उठा रहे हैं, जिन्होंने इस कंपनी की स्थापना के समय अपनी जमीनें गवाईं थीं और जिन लोगों के परिवारों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में अधिकारियों ने कहा है कि वे सरकार के इस विचार से पूर्ण सहमति रखते हैं कि देश को 2025 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए उन पीएसयू कंपनियों का विनिवेश कर दिया जाना चाहिए, जो अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं। लेकिन इसके लिए विभिन्न चरणों में कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इन्हें एक झटके में प्राइवेट सेक्टर के हवाले कर देने से भारी नकारात्मक असर पैदा होंगे जिससे बचा जाना चाहिए। विनिवेश के देश की समाजिक-आर्थिक स्थिति का भी आकलन करना चाहिए।

अधिकारियों ने कहा है कि देश की आजादी के बाद सरकार ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का ढांचा अपनाया था। इसके जरिए मूलभूत ढांचे में विकास के साथ-साथ सामाजिक बराबरी पाने का प्रयास भी किया गया था। लेकिन इन कंपनियों को प्राइवेट सेक्टर के हवाले कर देने से सामाजिक न्याय पाने की कोशिशों पर चोट पहुंच सकती है।

पीएसयू कंपनियों के जरिए सामाजिक न्याय पाने की राह में इनकी भूमिका का जिक्र करते हुए विशाखा स्टील प्लांट का उदाहरण देते हुए अधिकारियों ने कहा है कि 1966-69 के दौरान 'विशाखा विक्कू आंध्रलु हक्कू’ यानी विशाखापत्तनम स्टील प्लांट पर आंध्रप्रदेश के लोगों का अधिकार है, के नाम से आंदोलन चलाया गया था। इस आंदोलन में 32 नागरिकों-छात्रों को शहीद होना पड़ा था। इस प्लांट को बनाने में लगी भूमि के उपयोग के बदले में इन किसानों को घर के साथ-साथ एक व्यक्ति को नौकरी का अधिकार दिया गया था।

लेकिन अब इसी विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, जिसका नाम बाद में बदलकर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) कर दिया गया था, के विनिवेश का फैसला लिया गया है। ऐसे में एक बार फिर उन परिवारों के हक की बात पैदा हो गई है जिनकी जमीनें इस कंपनी को बनाने में लगाई गई थीं और जिन्होंने इस कंपनी के निर्माण के वक्त अपना जीवन गंवाया था।


अधिकारियों ने कहा है कि सरकार को इन पीड़ित परिवारों के हकों का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कंपनी के विनिवेश से इन परिवारों के जीवन पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है।

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