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सेहत से खिलवाड़ करने वाली 328 दवाओं की बिक्री व उत्पादन पर प्रतिबंध
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Thu, 13 Sep 2018 04:02 AM IST
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सरकार ने मानव के इस्तेमाल वाली 328 निश्चित खुराक वाली (एफडीएस) दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का मानना है कि कोरेक्स जैसी सर्दी-खांसी व सामान्य बुखार की निश्चित खुराक वाली दवाएं लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करती हैं।
मंत्रालय ने ड्रग एडवायजरी बोर्ड की सिफारिशों पर अंतिम मंजूरी देते हुए मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। मंत्रालय इसके साथ ही 6 अन्य कॉम्बीनेशन की दवाइयों के भी बनाने, बेचने और वितरण पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है।
जानकारों की मानें तो इस प्रतिबंध के बाद फॉर्मा सेक्टर को करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। मंत्रालय का कहना है कि मरीजों के स्वास्थ्य से बड़ा नुकसान और कुछ नहीं हो सकता। इसमें पिरामल सेरिडॉन, मेक्लिऑड्स फॉर्मा पैंडर्म प्लस क्रीम और अल्कीम लैबोरेटरी टैक्सिम एजे जैसे ब्रांड शामिल हैं। प्रतिबंध में कफ सिरप और कोल्ड मेडिसिन फेंसेडिल, ग्रिलिंक्टस और डीकोल्ड टोटल शामिल नहीं हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ये दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर तय मानकों पर खरी साबित नहीं उतरती हैं, इसलिए इन पर प्रतिबंध लगाया गया है। दो साल पहले इन दवाओं पर लगे प्रतिबंध को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने प्रतिबंध के फैसले को रद्द कर दिया था जिसके बाद बाजार में फिर से 344 दवाएं बिकने लगी थीं।
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मंत्रालय ने ड्रग एडवायजरी बोर्ड की सिफारिशों पर अंतिम मंजूरी देते हुए मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। मंत्रालय इसके साथ ही 6 अन्य कॉम्बीनेशन की दवाइयों के भी बनाने, बेचने और वितरण पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है।
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जानकारों की मानें तो इस प्रतिबंध के बाद फॉर्मा सेक्टर को करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। मंत्रालय का कहना है कि मरीजों के स्वास्थ्य से बड़ा नुकसान और कुछ नहीं हो सकता। इसमें पिरामल सेरिडॉन, मेक्लिऑड्स फॉर्मा पैंडर्म प्लस क्रीम और अल्कीम लैबोरेटरी टैक्सिम एजे जैसे ब्रांड शामिल हैं। प्रतिबंध में कफ सिरप और कोल्ड मेडिसिन फेंसेडिल, ग्रिलिंक्टस और डीकोल्ड टोटल शामिल नहीं हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ये दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर तय मानकों पर खरी साबित नहीं उतरती हैं, इसलिए इन पर प्रतिबंध लगाया गया है। दो साल पहले इन दवाओं पर लगे प्रतिबंध को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने प्रतिबंध के फैसले को रद्द कर दिया था जिसके बाद बाजार में फिर से 344 दवाएं बिकने लगी थीं।