एएमयू में आरक्षण को लेकर छिड़ी नाक की जंग, एससी कमीशन जाएगा सुप्रीम कोर्ट
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसिर्टी में आरक्षण लागू करने को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित एवं जनजाति आयोग और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन के अड़ियल रुख को देखते हुए इसे नाक की लड़ाई बना कर आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आयोग का कहना है कि वह विश्वविद्यालय के जवाब से संतुष्ट नहीं है और वह जल्द ही आरक्षण लागू करने को लेकर सप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।
कुलपति ने कहा मामला सुप्रीम कोर्ट में
गुरुवार का दिन राष्ट्रीय अनुसूचित एवं जनजाति आयोग में काफी गहमागहमी भरा रहा। आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग को आरक्षण नहीं देने पर कुलपति और रजिस्ट्रार को दिल्ली तलब किया था। लेकिन घंटेभर चली बैठक का नतीजा सिफर ही रहा। कुलपति तारिक मंसूर ने इस मुद्दे पर मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की बात कह कर कमेंट करने से मना कर दिया।
अल्पसंख्यक होने को लेकर विश्वविद्यालय के पास नहीं है कोई दस्तावेज
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. राम शंकर कठेरिया ने बताया कि वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति अल्पसंख्यक संस्थान होने को लेकर कोई दस्तावेज नहीं पेश कर पाए। उन्होंने कहा कि बैठक में आए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है।
यूजीसी से लिए 7 हजार करोड़ रुपए
कठेरिया ने बताया कि विश्वविद्यालय ने यूजीसी से पिछले 10 सालों में 7 हजार करोड़ से ज्यादा का सरकारी अनुदान लिया है। अगर फंडिंग लेने वाले सभी संस्थान आरक्षण देते हैं, तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय क्यों नहीं आरक्षण लागू कर रहा है। उन्होंने बताया कि न तो यूजीसी के पास और न ही मानव संसाधन मंत्रालय के पास अल्पसंख्यक संस्थान होने संबंधी कोई दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 1968, 2005 एवं 2006 के फैसले के मद्देनजर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों एवं कर्मचारियों को आरक्षण देना चाहिए।
फंडिंग रोकने को लेकर यूजीसी को लिखेगा आयोग
उन्होंने कहा कि वह यूजीसी को विश्वविद्यालय की फंडिंग रोकने के लिए पत्र लिखेंगे। साथ ही, 15 दिनों के भीतर ही फुल कमीशन की बैठक बुलाएंगे, जिसमें आरक्षण लागू करने को लेकर कड़ा फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फुल कमीशन की बैठक में जो फैसला होगा, उसे लेकर वह सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे, साथ ही अदालत में अपना पक्ष भी रखेंगे।
मुसलमानों के शैक्षणिक हालात बहुत खराब
इस मामले में अदालत में विश्वविद्यालय की तरफ से याचिकाकर्ता अलीगढ़ मुस्लिम ओल्ड ब्वॉयज, नई दिल्ली के महासचिव मुदस्सिर हयात ने कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है और इस मामले में विश्वविद्यालय के पास सारे कागजात हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि मुसलमानों के शैक्षणिक हालात बहुत खराब हैं और यह विश्वविद्यालय मुसलमानों के शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है, लिहाजा इससे कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
कोर्ट में मामला लंबा चलेगा
वहीं सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला अल्पसंख्यक संस्थान के स्टेटस को लेकर है, न कि आरक्षण लागू करने को लेकर। अगर आयोग इसमें पार्टी बनता है कि अदालत में मामला और लंबा चलेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की 11 सदस्यों की बैंच ने 2002 में पंजाब में अल्पसंख्यक मामले की सुनवाई करते हुए टीएमए पाई केस में माइनॉरिटी पर सवाल उठाते हुए था कि देश में राज्यों का विभाजन भाषाई आधार पर हुआ है, न कि धर्म के आधार पर। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने की बजाय राज्य स्तर पर ही अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए।
गुरुवार को हुई फुल कमीशन बैठक में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार समेत मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव, सामाजिक कल्याण सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन समेत विभिन्न विभागों के तकरीबन 30 लोग शामिल हुए।
इससे पहले सरकार ने भी लोकसभा में माना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया खुद को 'अल्पसंख्यक संस्थान' मानते हुए सरकार की आरक्षण नीति का पालन नहीं कर रहे हैं। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 के फैसले में 1967 के फैसले को सही मानते हुए कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार के 1981 के संशोधन अधिनियम को भी रद्द करते हुए कहा था कि यह संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसे अनुच्छेद 15 (5) के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को अनुच्छेद 30 के अन्तर्गत संवैधानिक आरक्षण से छूट प्राप्त है।