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चिंताजनक: शोधकर्ता बोले- वैश्विक स्तर पर हरित नीतियों को अपनाने की जरूरत, जलवायु में स्थायी बदलाव घातक

Wed, 30 Apr 2025 04:55 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 30 Apr 2025 04:55 AM IST
सार

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की 16 प्रमुख प्रणालियों का गहन विश्लेषण किया, जिसमें अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों के पिघलने से लेकर अमेजन वर्षावनों के सूखने और उष्णकटिबंधीय प्रवाल भित्तियों के नष्ट होने जैसी घटनाएं शामिल हैं। अध्ययन पांच प्रमुख साझा सामाजिक-आर्थिक परिदृश्यों पर आधारित है जो यह दर्शाते हैं कि भविष्य में सामाजिक संरचनाओं, जनसंख्या और आर्थिक बदलावों के साथ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 
 

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Researchers says need to adopt green policies globally
जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक) - फोटो : Freepic

विस्तार

वर्तमान वैश्विक जलवायु नीतियों में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो पृथ्वी पर कई क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स सक्रिय हो सकते हैं। मौजूदा नीतियों के कारण ऐसी घटनाएं होने की संभावना 62 फीसदी है, जो धरती की जलवायु व्यवस्था में गंभीर और स्थायी परिवर्तन ला सकती है। यह चेतावनी यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर और हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में दी गई है। इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल अर्थ सिस्टम डायनामिक्स में प्रकाशित हुए हैं।

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वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की 16 प्रमुख प्रणालियों का गहन विश्लेषण किया, जिसमें अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों के पिघलने से लेकर अमेजन वर्षावनों के सूखने और उष्णकटिबंधीय प्रवाल भित्तियों के नष्ट होने जैसी घटनाएं शामिल हैं। अध्ययन पांच प्रमुख साझा सामाजिक-आर्थिक परिदृश्यों पर आधारित है जो यह दर्शाते हैं कि भविष्य में सामाजिक संरचनाओं, जनसंख्या और आर्थिक बदलावों के साथ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अध्ययन में कहा गया है कि यदि वैश्विक स्तर पर हरित नीतियों को अपनाया जाए और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में ठोस कमी लाई जाए तो इन खतरनाक बदलावों की आशंका काफी हद तक कम की जा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टिपिंग पॉइंट्स के सक्रिय होने से बचाव अब भी संभव है, बशर्ते कि त्वरित और निर्णायक कदम उठाए जाएं।
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जलवायु में अपरिवर्तनीय व स्थायी बदलाव घातक
टिपिंग पॉइंट वह बिंदु है जहां जलवायु प्रणाली में छोटे बदलाव धीरे-धीरे अपरिवर्तनीय और स्थायी बने रहते हैं। उदाहरण के लिए आर्कटिक समुद्री बर्फ का पिघलना। तापमान बढ़ने से बर्फ पिघलती है जिससे और अधिक गर्मी अवशोषित होती है और यह चक्र तेज हो जाता है। ग्रीनलैंड व अंटार्कटिका की बर्फीली चादरों का निरंतर पिघलाव इनके स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है। इसी तरह अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन कमजोर पड़ने से यूरोप समेत कई क्षेत्रों का मौसम गम्भीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

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ये संकेत कहीं धरती के अंत की घंटी तो नहीं
ग्लोबल सिस्टम्स इंस्टीट्यूट, एक्सेटर विवि के प्रोफेसर टिम लेंटन के अनुसार यदि जलवायु टिपिंग पॉइंट्स सक्रिय हो जाते हैं तो मानवता पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं। अब तक के संकेत स्पष्ट रूप से बताते हैं कि हम एक खतरनाक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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