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SC: संपत्ति विवाद में सैफ अली खान के परिवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत, MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
Fri, 08 Aug 2025 07:31 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 08 Aug 2025 07:31 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की संपत्ति विवाद को नये सिरे से सुनवाई के लिए निचली अदालत को भेजने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल रियासत की संपत्ति को लेकर छिड़े विवाद में मशहूर अभिनेता सैफ अली खान के परिवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान की संपत्ति विवाद को नये सिरे से सुनवाई के लिए निचली अदालत को भेजने का आदेश दिया था।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल चंदुरकर की पीठ ने नवाब हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के वंशज उमर फारुक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, इसमें 14 फरवरी, 2000 को निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया गया था। फैसले में नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान) और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों, अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के संपत्ति पर विशेष अधिकार को बरकरार रखा गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि उच्च न्यायालय का रिमांड आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत उल्लिखित प्रक्रियात्मक मानदंडों के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था
उच्च न्यायालय ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर विचार किए बिना इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार प्रकरण को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट इस तथ्य पर विचार करने में विफल रहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा विलय करने पर सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम को खारिज कर दिया गया था। विचाराधीन मामला विरासत के विभाजन का है, इसलिए सीपीसी के 14 नियम 23 ए के प्रावधान के मद्देनजर मेरी राय है कि इन मामलों को नए सिरे से तय करने के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेजा जाता है।
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ट्रायल कोर्ट ने यह कहा था
ट्रायल कोर्ट ने नवाब की मृत्यु के बाद साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन नहीं है और सांविधानिक प्रावधानों के तहत उसे हस्तांतरित की गई है। 1960 में नवाब की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने 1962 में एक प्रमाण पत्र जारी किया। इसमें संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत साजिदा सुल्तान को शासक और व्यक्तिगत संपत्ति का वास्तविक उत्तराधिकारी दोनों के रूप में मान्यता दी गई। जबकि वादीगण ने तर्क दिया कि नवाब की निजी संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सभी कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच वितरित की जानी चाहिए।
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न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल चंदुरकर की पीठ ने नवाब हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के वंशज उमर फारुक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, इसमें 14 फरवरी, 2000 को निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया गया था। फैसले में नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान) और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों, अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के संपत्ति पर विशेष अधिकार को बरकरार रखा गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि उच्च न्यायालय का रिमांड आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत उल्लिखित प्रक्रियात्मक मानदंडों के विपरीत है।
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हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था
उच्च न्यायालय ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं पर विचार किए बिना इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार प्रकरण को खारिज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट इस तथ्य पर विचार करने में विफल रहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा विलय करने पर सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम को खारिज कर दिया गया था। विचाराधीन मामला विरासत के विभाजन का है, इसलिए सीपीसी के 14 नियम 23 ए के प्रावधान के मद्देनजर मेरी राय है कि इन मामलों को नए सिरे से तय करने के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेजा जाता है।
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ट्रायल कोर्ट ने यह कहा था
ट्रायल कोर्ट ने नवाब की मृत्यु के बाद साजिदा सुल्तान को नवाब घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन नहीं है और सांविधानिक प्रावधानों के तहत उसे हस्तांतरित की गई है। 1960 में नवाब की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने 1962 में एक प्रमाण पत्र जारी किया। इसमें संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत साजिदा सुल्तान को शासक और व्यक्तिगत संपत्ति का वास्तविक उत्तराधिकारी दोनों के रूप में मान्यता दी गई। जबकि वादीगण ने तर्क दिया कि नवाब की निजी संपत्ति मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सभी कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच वितरित की जानी चाहिए।
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