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शादी का वादा कर बनाया रिश्ता: महिला के प्रेग्नेंट होने पर मुकरा; कोर्ट ने क्या कह ठुकराई आरोपी की जमानत अर्जी?
Fri, 10 Jul 2026 12:16 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:16 PM IST
सार
ठाणे की एक अदालत ने शादी का झूठा वादा कर महिला के साथ दुष्कर्म करने, उसे प्रेग्नेंट करने और धमकाने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि आरोपी की रिहाई से पीडिता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने शादी का झूठा वादा करके महिला के साथ दुष्कर्म करने, उसे प्रेग्नेंट करने और धमकाने के आरोपी व्यक्ति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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एडिशनल सेशंस जज वी जी मोहिते ने आरोपी शुभम भगवान शिंदे की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उसकी रिहाई से महिला और उसके होने वाले बच्चे के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। 7 जुलाई के कोर्ट आदेश की कॉपी गुरुवार को सामने आई।
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कैसे हुई थी महिला और आरोपी की मुलाकात?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला और शिंदे की जान पहचान पिछले साल दिसंबर में हुई थी। कुछ हफ्तों बाद शिंदे ने उसे अपने घर बुलाया और शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद महिला प्रेग्नेंट हो गई और शिंदे के घर में रहने लगी। हालांकि, जब भी उसने शादी की बात की, शिंदे कथित तौर पर टालमटोल करता रहा। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि दबाव बनाए जाने पर उसने आत्महत्या करने की धमकी भी दी।
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सरकारी पक्ष ने कोर्ट में क्या दलील दी?
एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीषा पावसे ने शिंदे की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि उसने महिला के साथ धोखा किया और उसके प्रेग्नेंट होने के बाद उसे छोड़ दिया। महिला ने भी जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि शिंदे के रिश्तेदारों ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
बचाव पक्ष ने खुद को बचाने के लिए क्या तर्क दिया?
वहीं, शिंदे की ओर से पेश वकील यासीन नबी ने दलील दी कि यह एक असफल प्रेम संबंध का मामला है। उन्होंने दोनों के बीच नजदीकी दिखाने के लिए कुछ तस्वीरें भी कोर्ट में पेश कीं। साथ ही कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
बचाव पक्ष की दलीलों को कोर्ट ने क्यों नहीं माना?
कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष अपने दावों की पुष्टि के लिए चार्जशीट की कॉपी रिकॉर्ड पर पेश करने में नाकाम रहा। तस्वीरों के संबंध में जज मोहिते ने कहा कि केवल तस्वीरें आरोपी के बचाव के लिए पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि महिला ने खुद स्वीकार किया है कि दोनों के बीच दोस्ताना संबंध थे। जज ने यह भी गौर किया कि आरोपी ने अपनी अर्जी और बहस के दौरान महिला की प्रेग्नेंसी के मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी।
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कोर्ट ने आखिर क्या टिप्पणी करते हुए जमानत अर्जी खारिज की?
कोर्ट ने शिंदे की नियमित जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा, 'अगर आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो उसके द्वारा पीडिता या उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचाने या जान से मारने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, वह पीडिता पर प्रेग्नेंसी खत्म करने का दबाव भी बना सकता है।'