कोरोना काल में एक चौथाई मासूमों पर बढ़ गया कई बीमारियों का खतरा, सरकार अब पूरा करेगी लक्ष्य
- एक चौथाई बच्चे कोरोना काल में नहीं लगवा सके नियमित टीकाकरण
- 21 लाख बच्चे छूटे, टीकाकरण न होने से बीमारियों का खतरा बढ़ा
- अब मिशन इंद्रधनुष से पूरा होगा यह टीकाकरण
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कोरोना ने न सिर्फ लोगों की जिंदगियां छीनी, बल्कि मासूमों के खिलखिलाते बचपन को भी नजर लगा दी। दरअसल जिन जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए केंद्र सरकार मासूमों को मुफ्त टीका लगवाती है, वो कोरोना की वजह से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 21 लाख बच्चे विभिन्न बीमारियों से बचाव वाले नियमित टीकाकरण करवा ही नहीं सके। अब केंद्र सरकार एक विशेष योजना के तहत सभी बच्चों का टीकाकरण करा कर उनको निरोगी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। जिम्मेदारों को पूरा भरोसा है कि जल्द ही विशेष अभियान के तहत यह टीकाकरण पूरा हो जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग और परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 19 फरवरी से नियमित टीकाकरण कार्यक्रम 'मिशन इन्द्रधनुष-तीन' के पहले चरण की शुरुआत हो गयी है। जिसमें वैक्सीन ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा मिशन से जोड़ा जाएगा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 की अपेक्षा वर्ष 2020 में टीकाकरण में 26 फीसदी की कमी रही। यही वजह थी कि बीते साल नियमित टीकाकरण का तय लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका।
हेल्थ मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (एचएमआईआईएस) के पिछले साल अक्तूबर के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में मार्च से जून के बीच कुल 8,440,136 बच्चों का टीकाकरण हुआ। जबकि वर्ष 2020 में मार्च से जून के बीच 6,276,798 बच्चों का ही टीकाकरण हो सका। यानि कि तकरीबन 21 लाख बच्चों का टीकाकरण हो ही नहीं सका।
दो चरण में होगा मिशन इन्द्रधनुष
टीकाकरण के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार दो चरणों में इंटेंसिफाइड मिशन इन्द्रधनुष (आईएमआई) शुरू कर चुकी है। पहला चरण 22 फरवरी से शुरू हो चुका है। जबकि दूसरा चरण 22 मार्च से शुरू किया जाएगा। प्रत्येक चरण पन्द्रह दिन के लिए आयोजित किया जाएगा।
ईविन एप से होगी टीकाकरण की मॉनिटरिंग
इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ईविन) प्लेटफॉर्म के जरिए राज्यों से टीकाकरण की जिलेवार सूचना जमा की जाएगी। जिसमें वैक्सीन संरक्षण के अलावा वैक्सीन की उपलब्धता का भी पता लगाया जा सकेगा। सेफवैक के जरिए वैक्सीन लेने के बाद किसी तरह के एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) के मामलों की जानकारी तुरंत दी जा सकेगी।
हर साल ढाई करोड़ बच्चे और तीन करोड़ महिलाओं को लगता है टीका
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1985 में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम (यूआईपी) की शुरुआत की थी। इसके तहत हर साल 2.6 करोड़ बच्चों और 2.9 गर्भवती महिलाओं को हर साल नियमित टीकाकरण के तहत वैक्सीन दी जाती है। इन वैक्सींस से दस जानलेवा बीमारियां जिसमें, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, खसरा, रूबेला, टीबी, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, मेनिंजाइटिस, हीमोफिलिक इंफ्लूएंजा, न्यूमोकॉकल और जैपनीज इंसेफेलाइटिस से बचाव होता है। जबकि जेई की वैक्सीन प्रभावित जिलों में ही दी जाती है।