TMC Rift: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पास पहुंचीं बागी सांसद शताब्दी रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय भी रहे साथ
टीएमसी की बागी सांसद शताब्दी रॉय शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी मौजूद रहे हैं। इसके साथ ही लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ संसदीय समूह के रूप में मान्यता की तैयारी शुरू हो गई है।
टीएमसी की बागी सांसद शताब्दी रॉय शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी मौजूद रहे हैं। इसके साथ ही लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ संसदीय समूह के रूप में मान्यता की तैयारी शुरू हो गई है।
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने बागी सांसद शताब्दी रॉय के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस बीच, टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर 'असली टीएमसी' संसदीय समूह के रूप में मान्यता प्राप्त करने की मांग करने की तैयारी कर रहे हैं।
19 सदस्यों ने किया समर्थन
शनिवार को हुई बैठक का विवरण तत्काल ज्ञात नहीं हो सका। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर गहराते संकट के बीच आया है, जिसमें बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि 19 लोकसभा सदस्य असंतुष्ट खेमे का समर्थन कर रहे हैं। अगर बंद्योपाध्याय भी उनसे जुड़ जाते हैं, तो बागी समूह में सांसदों की संख्या बढ़कर 20 हो जाएगी।
किसको बनाना चाहते हैं अपना नेता?
विद्रोही खेमे के एक सूत्र ने बताया कि वह लोकसभा में बंद्योपाध्याय को अपना नेता बनाना चाहते हैं। सोमवार को इससे पहले भी बागी सांसदों के एक समूह ने यादव के आवास पर बैठक की थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी राज्य और केंद्र में अपने विधायकों के एक बड़े वर्ग के विद्रोह से हिल गई है। पार्टी के लोकसभा में 28 सदस्य और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं, जिनमें से तीन अब तक इस्तीफा दे चुके हैं। टीएमसी नेताओं ने भाजपा पर पार्टी में दलबदल कराने के उद्देश्य से ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगाया है।
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बागी तेवर दिखा रहे नेताओं को लेकर पूर्व सीएम ममता के गुट का क्या रुख?
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी में बढ़ते आंतरिक मतभेद, इस्तीफे और बागी नेताओं के दावों ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। बयानबाजी का सिलसिला जारी है। बागी धड़े के नेता का दावा है कि वे 15 जून यानी सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अलग गुट की तरह मान्यता देने की मांग करेंगे। पार्टी में फूट और अस्तित्व के संकट से जूझ रही तृणमूल के एक धड़े में ममता बनर्जी के करीबी और वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने भी गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि बागी नेता सत्ता के भूखे हैं और बीजेपी के सत्ता में होने के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं।
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तृणमूल से अब तक किन नेताओं का मोहभंग हुआ?
गौरतलब है कि गुरुवार को प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बराइक और कोयल मल्लिक से पहले सुखेंदु शेखर रॉय और बंगाल से निर्वाचित महिला सांसद सुष्मिता देव ने भी सांसदी छोड़ दी है। सुखेंदु शेखर ने पद छोड़ने के बाद तृणमूल के कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि उन्होंने आरजी कर अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद ही पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था। दूसरी तरफ सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ने के बाद अपने गृह राज्य असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।