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भारत और चीन के बीच क्यों होते रहते हैं सैन्य विवाद, क्या है असल वजह

Wed, 27 May 2020 12:09 AM IST
गौरव पाण्डेय गौरव पाण्डेय, नई दिल्ली
गौरव पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 27 May 2020 12:09 AM IST
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सार
भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रक्षा अधिकारियों के साथ इसे लेकर बैठक की तो दूसरी ओर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का निर्देश दे दिया। वहीं, इससे पहले भी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव की स्थिति बनती रही है। साल 2017 में दोकलाम को लेकर दोनों देशों के बीच स्थितियां बिगड़ गई थीं। आइए जानते हैं दोनों देशों के बीच सैन्य विवाद की असल वजह क्या है...
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reason behind border disputes between India and China
भारत और चीन के जवान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

भारत और चीन एशिया की दो महाशक्तियां हैं। दोनों देशों के बीच विवाद पहले भी रहे हैं और कई मुद्दों पर रहे हैं लेकिन जो मुद्दा प्रमुख रहा है वह है दोनों देशों की सीमा। इसी सीमा विवाद के चलते साल 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो चुका है और अभी भी सीमा पर कुछ इलाके ऐसे हैं जिन्हें लेकर अक्सर तनाव की स्थित बन जाती है। 



हाल का मामला यह है कि चीन ने लद्दाख में अक्साई चिन की गलवां घाटी में भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। पांच मई को लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। सड़क का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। 


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सबसे खराब स्थिति के बारे में सोचते हुए अपनी सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का आदेश दे दिया। वहीं, इस विवाद पर भारत ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। भारत ने कहा है कि वह पूर्वी लद्दाख में चीन-भारत सीमा के साथ रणनीतिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को नहीं रोकेगा।

1950 में हुई थी अक्साई चिन पर विवाद की शुरुआत

मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक अक्साई चिन की गलवां घाटी इलाके में भारत की ओर से सड़क निर्माण और रक्षा संसाधनों की तैनाती बढ़ने से झल्लाए चीन ने भी अक्साई चिन इलाके में अवैध निर्माण आदि तेज कर दिया है। इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच विवाद नया नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत साल 1950 में ही हो गई थी। चीन इस इलाके पर अपना अधिकार जताता रहा है। 

अक्साई चिन पर चीन ने 1950 के दशक में कब्जा किया था। लंबे समय तक इससे नावाकिफ रहे भारत को इस बारे में साल 1957 में पता चला जब चीन ने यहां सड़क निर्माण शुरू कर दिया। साल 1958 में इस सड़क को चीन ने अपने नक्शे में भी दर्शाया। इस इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लंबा विवाद चला जो दोनों देशों के बीच युद्ध की वजह भी बना। अक्साई चिन चीन के जिनजियांग प्रांत से जुड़ा है।

दोकलाम को लेकर भी हुआ था दोनों देशों में विवाद

साल 2017 में दोनों देशों के बीच तनाव की शुरुआत तब हुई जब चीन ने दोकलाम में चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की और भारत ने इसका विरोध किया था। चीन में इस क्षेत्र को डोंगलोंग कहा जाता है। यह भारत के उत्तर-पूर्व में सिक्किम और भूटान की सीमा के पास है। भूटान और चीन दोनों इस पर दावा करते हैं और भारत इस मामले में भूटान का समर्थन करता है। 

हालांकि, भारत की यह आपत्ति केवल भूटान की वजह से नहीं थी। भारत का मानना है कि अगर यह सड़क पूरी बन गई तो उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत से जोड़ने वाले 20 किलोमीटर के इस इलाके तक चीन पहुंच जाएगा। 20 किमी का यह हिस्सा सामरिक रूप से बहुत अहम है और भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। इस इलाके में साल 1967 में भी चीन और भारत के बीच संघर्ष हुआ था।

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