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दयाशंकर के सहारे वोटों को साधना चाहती थी भाजपा, उल्टा पड़ा दांव

Thu, 21 Jul 2016 08:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 21 Jul 2016 08:43 PM IST
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Real story of BJP leader dayashankar
- फोटो : indian express

जिस भाजपा नेता दयाशंकर ने अपने बयान से पूरी पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है कभी उनके सहारे भाजपा बड़ी रणनीति बनाने में जुटी थी। दयाशंकर भाजपा की उस रणनीति का बड़ा मोहरा थे जिसमें पार्टी पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षत्रिय और भूमिहार वोटों को साधने की कवायद में लगी थी। 

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इसी कड़ी में पिछले सप्ताह ही उन्हें प्रमोशन देकर मंत्री से प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। 2017 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा धीरे धीरे दयाशंकर को आगे करने के प्रयास में थी लेकिन उनके एक बयान ने पार्टी का सारा खेल बिगाड़ दिया। राजनीति की बिसात पर भाजपा एक बार फिर बैकफुट पर है तो बसपा फ्रंटफुट पर।
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इं‌डियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार भाजपा नेता दयाशंकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा की रणनीति का खास हिस्सा रहे हैं। 44 साल के दयाशंकर भी आगामी विधानसभा चुनावों में बलिया सीट से टिकट की आस टिकाए बैठे थे। असल में पिछले कई चुनावों में भाजपा का पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन काफी लचर रहा है। 
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ऐसे में पार्टी यहां युवा उम्‍मीदवारों को आगे कर जातिगत समीकरणों को साधने का पूरा प्रयास कर रही है। ‌पिछले महीने हुए एमएलसी चुनावों में भी भाजपा ने दयाशंकर को दूसरे उम्‍मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा था, हालांकि वो जरूरी मत नहीं जुटा सके थे।

कभी राजनाथ के काफी करीबी रहे हैं दयाशंकर

Real story of BJP leader dayashankar

दयाशंकर को कुछ समय पूर्व तक गृहमंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह का नजदीकी भी माना जाता था। लेकिन यह नजदीकियां तब दूरियों में बदल गई थी जब दयाशंकर ने 2012 में विधानसभा चुनावों से पूर्व राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को राज्य संगठन में महासचिव बनाए जाने का विरोध कर दिया था। 

लेकिन इसके बाद वह फिर वरिष्ठ नेताओं का विश्वास जीतने में सफल रहे। दयाशंकर को संगठन का मजबूत व्यक्ति माना जाता है पूर्व में वह भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। एक मई को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलिया में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की शुरूआत की थी तो भीड़ जुटाने का जिम्मा दयाशंकर को ही  सौंपा गया था। 

यहां उनकी परफारमेंस के आधार पर ही प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर उपाध्यक्ष बनाया था। पार्टी की मंशा उन्हें युवा नेता के तौर पर आगे कर पूर्वी उत्तर प्रदेश में मजबूत प्रभाव रखने वाले क्षत्रिय और भूमिहार वोटों को अपने साथ जोड़ने की थी। 

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं दयाशंकर

Real story of BJP leader dayashankar

1999 में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष और पूर्व में महामंत्री रहे दयाशंकर बेशक पार्टी में कोई बड़ा नाम न हों लेकिन उनकी छवि काफी लोकप्रिय मानी जाती है। लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करते ही वह भाजपा में शामिल हो गए, पार्टी ने उन्हें भाजयुमो का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया। 

इसके बाद उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनावों में बलिया विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई लेकिन पांचवे स्‍थान पर रहे। हालांकि अगले चुनावों में उन्हें टिकट नहीं मिल सका। 

उन्हें उम्‍मीद थी कि 2017 के चुनावों में पार्टी उन्हें दोबारा टिकट जरूर देगी, लेकिन उससे पहले ही मायावती पर की गई एक टिप्पणी ने उनके भविष्य पर तो ग्रहण लगाया ही भाजपा के अरमानों पर भी पानी फेर दिया।

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