आदर्श सोसायटीः जब घोटाले में आया था बड़े-बड़े दिग्गजों का नाम
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मुंबई के कोलाबा में स्थित आदर्श सोसायटी काफी समय बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह बना है मुंबई हाईकोर्ट का वो आदेश, जिसमें आदर्श सोसायटी में बनी गगनचुंबी बिल्डिंग को गिराने का आदेश दिया गया है। मुंबई के पॉश इलाके में बनी यह बिल्डिंग अपने निर्माण के समय से ही विवादों में हैं।
कारगिल शहीदों के आश्रितों के लिए बनाई गई इस बिल्डिंग में उन्हें फ्लैट आवंटित किए जाने थे, लेकिन भ्रष्टाचार और व्यवस्था के गठजोड़ ने इस पर बदनामी का दाग लगा दिया। आदर्श सोसायटी उस समय चर्चा में आई जब इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों, महाराष्ट्र के बड़े मंत्रियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और सेना के बडे़ अधिकारियों के नाम अवैध रूप से फ्लैट आवंटन करने का मामला सामने आया।
मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री को अपने पद से भी हाथ धोना पड़ा था। आइए हम आपको बताते हैं क्या था आदर्श सोसायटी घोटाला और किस किस दिग्गज के नाम पर लगी थी कालिख।
कारगिल शहीदों के परिजनों के लिए बनी थी बिल्डिंग
कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजनों और सेवानिवृत्त फौजियों के लिए साल 1999 में कोलाबा में एक छह मंजिला इमारत का प्रस्ताव दिया गया। कुछ दिन बाद ही सेवानिवृत्त और शहीदों के साथ ही सेवा में कार्यरत सैन्य कर्मियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया। फरवरी 2002 में महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए जमीन का आवंटन कर दिया जिसके साथ यहां निर्माण कार्य शुरू हो गया।
जमीन के आवंटन के साथ ही इस पर विवाद भी शुरू हो गया, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नौ सेना ने इस जमीन के आवंटन पर आपत्ति भी जताई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। इसके अलावा नियमों को ताक पर रखकर छह मंजिला की बजाय 31 मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई।
बिल्डिंग तैयार होते ही आनन फानन में फ्लैट का चुपचाप आवंटन भी कर दिया गया। आवंटन के दौरान ही इसमें भ्रष्टाचार की दीमक भी लग गई। बड़ा खेल उस समय सामने आया जब साल 2010 में एक आरटीआई के माध्यम से पता चला कि जिन फ्लैट्स को सैन्यकर्मियों और उनके परिजनों को आवंटित किया जाना था उन्हें औने पौने दामों में राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों ने अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम करवा लिया।
इसके साथ ही इस घोटाले की एक एक परतों से परदा उठना शुरू हुआ। बाद में पता चला कि इस बिल्डिंग के निर्माण के लिए नौ सेना से एनओसी भी नहीं ली गई, बकि वहां बनने वाले किसी भी भवन के लिए नौ सेना से एनओसी लिए जाने का नियम है। मामला कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने पहली बार में ही कहा यह सीधे सीधे धोखेबाजी का मामला है।
घोटाले में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के नाम
इसी बीच घोटाले की आंच तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक च्वहाण तक भी पहुंची। आरटीआई के माध्यम से ही पता चला कि उनके कई रिश्तेदारों के नाम सोसायटी में फ्लैट आवंटित किए गए हैं। घोटाले की आंच पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, सुशील शिंदे और शिवाजीराव तक भी पहुंची।
उन पर अनैतिक तरीके से सोसायटी के निर्माण की अनुमति देने और रिश्तेदारों के नाम फ्लैट आवंटन करवाने के आरोप लगे। आदर्श सोसायटी के प्रति नौकरशाहों और राजनेताओं के आकर्षण की वजह उसकी खास लोकेशन थी। समुंद्र तट से कुछ दूरी पर निर्मित इस बिल्डिंग में फ्लैट लेने के लिए नेताओं और नौकरशाहों ने सभी नियम कायदों को ताक पर रख दिया।
मामले की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 2011 में दो सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन किया। हाइकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जेए पाटिल की अध्यक्षता में बनी समिति ने दो साल की जांच के दौरान 180 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कुल 102 आवंटियों में से 25 आवंटियों को गलत तरीके से आवंटन किया गया।
कोर्ट में मामला जाने के बाद इसकी जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक च्वहाण को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीबीआई ने जांच शुरू की तो इसमें अशोक चव्हाण, सेना के दो रिटायर मेजर जनरल टीके ठाकुर और एआर कुमार, रिटायर्ड बिग्रेडियर एमएम वांचू, राज्य के दो पूर्व शहरी विकास मंत्री सुनील ततकारे और राजेश तोपे, सोसायटी के प्रमोटर कन्हैयालाल गिडवाणी, प्रदीप व्यास सहित कई वरिष्ठ नौकरशाहों को आरोपी बनाया। विदेश सेवा की चर्चित अधिकारी देवयानी खोरबागड़े का नाम भी आवंटियों की सूची में शामिल था।
बाद में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने दो आईएएस को सस्पेंड कर दिया। इसी बीच केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सिफारिश की कि नियमों को ताक पर रखकर बनी इस अवैध इमारत को तीन महीने के अंदर गिरा दिया जाए। वहीं मामले में सीबीआई ने दो मेजर जनरल सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
हालांकि सीबीआई निर्धारित 60 दिनों में चार्जशीट अदालत में पेश नहीं कर सकी जिसकी वजह से सभी को जमानत मिल गई। अभी तक सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।