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मकान के खरीदारों को बड़ी राहत, राज्यसभा में रियल एस्टेट बिल पारित

Thu, 10 Mar 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Mar 2016 11:05 PM IST
सार

  • रियल एस्टेट के क्षेत्र में पारदर्शिता और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करेगा रियल एस्टेट बिल।
  • बिल्डरों और डेवलपरों के लिए कड़े किए गए प्रावधान, ठगी पर लगेगा अंकुश।
  • बिना रजिस्ट्रेशन लुभावने विज्ञापन नहीं दे सकेंगे बिल्डर, वादे पूरे नहीं करने पर सजा का है प्रावधान।

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real estate bill passed in rajya sabha
रियल एस्टेट रेग्युलरटी अथॉरिटी बिल को राज्य सभा में पास - फोटो : Reuters

विस्तार

मकान के खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए राज्यसभा ने रियल एस्टेट बिल पारित कर दिया है। अब इसे लोकसभा में पारित होना है। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) बिल में ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए बिल्डरों, प्रमोटरों और डेवलपरों को कड़े प्रावधानों के दायरे में लाया गया है।

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विधेयक के पारित होने के बाद शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू ने कहा कि इससे रियल एस्टेट में पारदर्शिता आएगी और ठगी पर अंकुश लग सकेगा। एआईडीएमके को छोड़कर कांग्रेस समेत तमाम दलों ने विधेयक का समर्थन किया और यह ध्वनि मत से पारित हो गया।
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विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद किसी बिल्डर के लिए बिना रजिस्ट्रेशन कराए लुभावने विज्ञापन देकर ग्राहकों को फांसना आसान नहीं होगा। लुभावने वादे पूरे नहीं करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
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पुराने विधेयक में 20 संशोधनों को शामिल कर लिया गया है। संसद की स्थायी समिति और सेलेक्ट कमेटी के सुझावों को शामिल करने के बाद बिल के बारे में तमाम आशंकाओं को समाप्त करने की कोशिश की गई।

विधेयक के प्रावधानों के तहत अब आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी जो लेन-देन पर नजर रखने के अलावा विवादों का निपटारा भी करेगी।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी आठ अपार्टमेंट्स और 500 वर्गमीटर वाले परियोजना का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही उसका विज्ञापन किया जा सकेगा। खरीदारों से पूर्व में वसूली गई राशि और भूमि लागत की 70 फीसदी राशि को बैंकों के एस्क्रो एकाउंट में रखना अनिवार्य होगा। तीस प्रतिशत राशि को बिल्डर हस्तांतरित कर सकते हैं।

पहले बैंक एकाउंट में 50 प्रतिशत राशि रखने का प्रावधान किया जा रहा था लेकिन संशोधनों के बाद इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया। इस व्यवस्था के बाद पैसे लेने के बाद बिल्डर के लिए प्रोजेक्ट बंद करना मुश्किल होगा। प्रोजेक्ट में देर होने पर बिल्डरों के लिए ग्राहकों को ब्याज का भुगतान भी करना पड़ेगा।

निर्माण में दोष के जिम्मेदार होंगे बिल्डर

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रियल एस्टेट रेग्युलरटी अथॉरिटी बिल को राज्य सभा में पास - फोटो : Reuters

निर्माण में दोष होने पर बिल्डर को पांच साल तक की अवधि के लिए उसका जिम्मेदार बनाया गया है। ग्राहकों द्वारा भुगतान में देर किए जाने पर जिस अनुपात में ब्याज लगाया जाता है, बिल्डरों को प्रोजेक्ट में होने वाले विलंब के बदले उसी अनुपात में ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा।

वर्तमान में भुगतान में देर होने पर ग्राहकों से 16 से 18 प्रतिशत का ब्याज वसूला जाता है जबकि बिल्डर की तरफ से प्रोजेक्ट में विलंब होने पर उसकी तरफ से सिर्फ दो या तीन फीसदी ब्याज दिया जाता है।

कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी न हुए सभी प्रोजेक्ट पर होगा लागू

घर खरीदारों के मन में तमाम सवाल उठ रहे होंगे कि अगर रजिस्ट्री नहीं हुई लेकिन मकान सुपुर्द कर दिया गया है तो क्या यह नये रियल एस्टेट कानून के दायरे में आएगा?

अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट क्या इस कानून के दायरे में आएंगे? रियल एस्टेट विधेयक के अनुसार, जिन रियल एस्टेट परियोजनाओं को इस कानून के लागू होने तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिलता है वे सब इसके दायरे में आएंगे। यह कानून वर्तमान में चल रहे रियल एस्टेट परियोजनाओं पर भी लागू होगा।

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