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चूहे खा गए रिश्वत के पैसे: सुप्रीम कोर्ट भी हैरान, भ्रष्टाचार के मामले में दोषी महिला को दी जमानत; कही ये बात
Sat, 25 Apr 2026 04:03 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 25 Apr 2026 04:03 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी एक महिला को जमानत दे दी है। वो भी इसलिए क्योंकि मामले का मुख्य साक्ष्य यानी रिश्वत के पैसे पुलिस मालखाने में चूहों ने नष्ट कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर चिंता व्यक्त की है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अदालतों में अक्सर अजीबोगरीब दलीलें सामने आती हैं, लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऐसा मामला आया जिसने जजों को भी हैरान कर दिया। यह मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जहां मुख्य साक्ष्य यानी रिश्वत की रकम के बारे में दावा किया गया कि उसे चूहों ने कुतर डाला। खबर है कि अब शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराई गई एक महिला को जमानत दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला बिहार से जुड़ा है। दरअसल, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर कार्यरत अरुणा कुमारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाया गया था। उन पर 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। पटना उच्च न्यायालय ने महिला को सजा सुनाई थी। हालांकि, जब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंचा, तो वहां साक्ष्यों के रखरखाव को लेकर राज्य पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि जो नोट रिश्वत के तौर पर जब्त किए गए थे, उन्हें पुलिस के मालखाने में रखा गया था। लेकिन जब इन नोटों को अदालत में पेश करने की बारी आई, तो पता चला कि उन्हें चूहों ने पूरी तरह से कुतर दिया है। यानी, अपराध को साबित करने वाला सबसे अहम सबूत अब अस्तित्व में नहीं था।
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यह भी पढ़ें: स्वाति मालीवाल का AAP से इस्तीफा: राज्यसभा सांसद बोलीं- मैं PM मोदी के नेतृत्व पर भरोसा करके भाजपा में आई
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस दलील पर न केवल आश्चर्य जताया बल्कि कड़ी नाराजगी भी व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों का इस तरह गायब होना कानून व्यवस्था और राज्य के राजस्व के लिए एक बड़ा नुकसान है। पीठ ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस कस्टडी में रखे गए महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित क्यों नहीं थे?
अदालत ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है जहां चूहों द्वारा साक्ष्य नष्ट किए जाने की बात कही गई हो। इससे पहले भी कई मामलों में नशीले पदार्थों और नकदी के बारे में इसी तरह के बहाने बनाए गए हैं, जो व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
न्यायालय का फैसला
महिला के वकील ने तर्क दिया कि मुख्य साक्ष्य के अभाव में सजा को बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं है, खासकर जब अपील लंबित हो। सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करते हुए महिला की सजा को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया और उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोषी को जेल में रखना आवश्यक नहीं है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला बिहार से जुड़ा है। दरअसल, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर कार्यरत अरुणा कुमारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाया गया था। उन पर 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। पटना उच्च न्यायालय ने महिला को सजा सुनाई थी। हालांकि, जब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंचा, तो वहां साक्ष्यों के रखरखाव को लेकर राज्य पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई।
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इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि जो नोट रिश्वत के तौर पर जब्त किए गए थे, उन्हें पुलिस के मालखाने में रखा गया था। लेकिन जब इन नोटों को अदालत में पेश करने की बारी आई, तो पता चला कि उन्हें चूहों ने पूरी तरह से कुतर दिया है। यानी, अपराध को साबित करने वाला सबसे अहम सबूत अब अस्तित्व में नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस दलील पर न केवल आश्चर्य जताया बल्कि कड़ी नाराजगी भी व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों का इस तरह गायब होना कानून व्यवस्था और राज्य के राजस्व के लिए एक बड़ा नुकसान है। पीठ ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस कस्टडी में रखे गए महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित क्यों नहीं थे?
अदालत ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है जहां चूहों द्वारा साक्ष्य नष्ट किए जाने की बात कही गई हो। इससे पहले भी कई मामलों में नशीले पदार्थों और नकदी के बारे में इसी तरह के बहाने बनाए गए हैं, जो व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
न्यायालय का फैसला
महिला के वकील ने तर्क दिया कि मुख्य साक्ष्य के अभाव में सजा को बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं है, खासकर जब अपील लंबित हो। सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर करते हुए महिला की सजा को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया और उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोषी को जेल में रखना आवश्यक नहीं है।
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