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RSS: 'जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण रहना चाहिए', मोहन भागवत का बड़ा बयान

Wed, 06 Sep 2023 09:21 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नागपुर
पीटीआई, नागपुर Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 06 Sep 2023 09:21 PM IST
सार

मोहन भागवत ने कहा कि संघ की संस्कृति में जहां भी राष्ट्र के गौरव और राष्ट्रीय ध्वज का सवाल होगा, संघ कार्यकर्ता अपने जीवन का बलिदान देने के लिए हमेशा सबसे आगे रहेंगे।

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Rashtriya Swayamsevak Sangh Sarsanghchalak Mohan Bhagwat statement on reservation Latest News Update
मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमारे समाज में भेदभाव मौजूद है और जब तक असमानता बनी रहेगी तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। बुधवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘अखंड भारत’ आज के युवाओं के बूढ़े होने से पहले एक वास्तविकता बन जाएगा, क्योंकि 1947 में भारत से अलग होने वाले लोग अब महसूस कर रहे हैं कि उन्होंने गलती की है।

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'संविधान में प्रदत्त आरक्षण का हम संघवाले पूरा समर्थन करते हैं'
आरक्षण पर भागवत का बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए मराठा समुदाय का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। भागवत ने कहा, हमने अपने ही साथी मनुष्यों को सामाजिक व्यवस्था में पीछे रखा। हमने उनकी परवाह नहीं की और यह सिलसिला 2000 साल तक चलता रहा। जब तक हम उन्हें समानता प्रदान नहीं करते, तब तक कुछ विशेष उपाय करने होंगे और आरक्षण उनमें से एक है। इसलिए आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक ऐसा भेदभाव हो। हम आरएसएस में संविधान में प्रदत्त आरक्षण को पूरा समर्थन देते हैं।
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 आरक्षण सम्मान देने के लिए भी: भागवत
सरसंघचालक ने कहा कि यह केवल वित्तीय या राजनीतिक समानता सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान देने के लिए भी है। उन्होंने कहा कि भेदभाव झेलने वाले समाज के कुछ वर्गों ने 2000 सालों तक यदि परेशानियां उठाईं तो क्या हम हम और 200 साल कुछ दिक्कतें नहीं उठा सकते?
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भारत होना यानी भारत के स्वभाव को स्वीकार करना: आरएसएस प्रमुख
उन्होंने 'अखंड भारत' पर कहा कि जो लोग भारत से अलग हो गए, उन्हें लगता है कि उन्होंने गलती की है। भारत होना यानी भारत के स्वभाव को स्वीकार करना...। मोहन भागवत ने कहा कि संघ की संस्कृति में जहां भी राष्ट्र के गौरव और राष्ट्रीय ध्वज का सवाल होगा, संघ कार्यकर्ता अपने जीवन का बलिदान देने के लिए हमेशा सबसे आगे रहेंगे।

 

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