पूर्व सैनिकों की चिट्ठी के दावे पर राष्ट्रपति भवन का खंडन, पूर्व जनरल ने भी बताया फर्जी
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सेना के राजनीतिकरण के आरोप को लेकर 150 पूर्व सैनिकों के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को खत लिखने की बात झूठी साबित होती दिख रही है। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने इन खबरों का खंडन करते हुए किसी भी खत के मिलने से इनकार किया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी में कहा गया है कि पूर्व सैनिकों द्वारा लिखित कोई भी खत राष्ट्रपति को नहीं मिला है।
राष्ट्रपति भवन के इन खबरों का खंडन करने के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रॉड्रिग्ज ने भी इन खबरों को झूठ बताया है। उन्होंने किसी भी तरह के हस्ताक्षर करने से भी इनकार किया है।
Rashtrapati Bhavan Source denies receiving any letter supposedly written by armed forces veterans to the President which is circulating in the media. pic.twitter.com/rOWedMumsk
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 12, 2019
#WATCH Goa: General SF Rodrigues who is mentioned as the first signatory in the purported letter written by armed forces veterans to President, denies signing it. pic.twitter.com/h1PNBCV909
— ANI (@ANI) April 12, 2019
रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताय कि राष्ट्रपति को यह चिट्ठी एडमिरल रामदास ने नहीं लिखी जैसा दावा किया जा रहा है। बल्कि यह किसी मेजर चौधरी ने लिखी है। ये व्हॉट्सएप और ईमेल पर घूम रही थी।
पूर्व सेना उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एमएल नायडु का नाम कथित चिट्ठी में 20वें नंबर पर है। उन्होंने कहा, 'नहीं इस तरह के किसी भी पत्र के लिए मेरी सहमति नहीं ली गई और न ही मैंने कोई पत्र लिखा है।'
चिट्ठी में मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ का नाम 31वें नंबर पर है। उन्होंने पत्र लिखने की बात स्वीकार करते हुए कहा, 'हां मैंने पत्र में हस्ताक्षरकर्ता होने के लिए अपनी सहमति दी है। मैंने इसकी सामग्री जानने के बाद ही अपनी सहमति दी थी।'
बता दें कि गुरूवार से खबरें आ रही हैं कि सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया। पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर की बात कही जा रही है उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रॉड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं।
खबरों में दावा किया जा रहा है कि तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र गुरूवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया। पूर्व सैनिकों ने लिखा, ‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं।’
पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेवारत तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के बीच यह चिंता और असंतोष का मामला है कि सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है। पत्र में पूर्व सैनिकों ने चुनाव प्रचार अभियानों में भारतीय वायु सेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान और अन्य सैनिकों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी नाखुशी जताई है।