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रैपिड रेल दिल्ली की जरूरत, परियोजना में न हो देरी : सुप्रीम कोर्ट
Thu, 07 Mar 2019 02:12 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 07 Mar 2019 02:12 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के बीच प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की जरूरत बताते हुए कॉरिडोर के लिए 265 करोड़ रुपये जारी करने का निर्देश दिया है। दिल्ली सरकार को पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) से यह रकम जारी करने को कहा है। पहले चरण में यह दिल्ली से मेरठ को जोड़ेगा और 82.15 किलोमीटर के इस कॉरिडोर पर करीब 31632 करोड़ रुपये खर्च आएगा।
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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने दिल्ली सरकार को इस प्रोजेक्ट के लिए पहले वर्ष का शेयर (करीब 265 करोड़ रुपये) एक हफ्ते के भीतर जारी करने को कहा है। उसने कहा भले ही हमने दिल्ली सरकार को एक हफ्ते का वक्त दिया है, लेकिन आदेश का पालन तीन दिनों में हो जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि राजधानी दिल्ली में यातायात व्यवस्था सुगम बनाने के लिए इस कॉरिडोर की सख्त जरूरत है। पीठ का मानना है कि इस परियोजना में देरी नहीं होनी चाहिए।
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इससे पहले अमाइकस क्यूरी वकील अपराजिता सिंह ने पीठ को बताया कि दिल्ली सरकार के पास ईसीसी फंड में 1106 करोड़ रुपये हैं। वहीं दिल्ली सरकार के वकील ने पीठ से कहा कि सरकार ईसीसी फंड के इस्तेमाल के बारे में शीर्ष अदालत को अपनी योजना दे चुकी है। सरकार ने इस फंड से 1000 इलेक्ट्रिक बसें और 900 फीडर बस खरीदने की योजना बनाई है। इस पर पीठ ने कहा कि हम भी यह काम दिल्ली के लोगों के कल्याण के लिए कर रहे हैं।
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फंड देने में आनाकानी कर रही थी दिल्ली सरकार
पीठ को जानकारी दी गई थी कि इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार का शेयर 5687 करोड़ है। जबकि उत्तर प्रदेश का 5828 करोड़ और दिल्ली का 1138 करोड़ का शेयर है। दिल्ली सरकार इसके लिए फंड देने में आनाकानी कर रही थी। पीठ ने बुधवार को कहा कि हमारा मानना है कि दिल्ली सरकार कानूनी व सांविधानिक रूप से इस प्रोजेक्ट के लिए फंड उपलब्ध करने के लिए बाध्य है।