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रेप पीड़िता की मां ने कहा- बच्ची को इतना पढ़ाऊंगी कि वो देश में मिसाल बने
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा
Updated Fri, 17 Nov 2017 08:48 PM IST
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rape victim
- फोटो : amar ujala
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अपनी पांच साल की बेटी के लिए एक मां इंसाफ मांग रही है। 3 महीने पहले 9 सितंबर को गांधी नगर स्थित टैगोर स्कूल में बच्ची के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया था। समय पर स्कूल की आया जाने के बाद बच्ची का हाल बुरा नहीं हो पाया लेकिन मां पिता इतने डर गए कि अपनी बेटी को स्कूल से ही निकाल लिया। घटना के तीन महीने बाद मां मीडिया से मुखातिब हुई तो गला बार-बार रुंध रहा था। वो पूछ रही थी कि मेरी 5 साल की बच्ची का गुनाह क्या है।
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अक्सर लोग लड़कियों के पहनावे को उकसाने वाला पहनावा कहते हैं और बलात्कार का कारण बताते हैं लेकिन मेरी बेटी के कपड़े किसे उकसा रहे थे। बहुत अरमानों से मैंने अपनी बेटी और बेटे का एडमिशन निजी स्कूल में कराया था कि बेटी पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी होगी और उसका देश में एक नाम होगा लेकिन आज मेरे दोनो बच्चे घर पर हैं। मैं अब उन्हें स्कूल भेजने में डरने लगी हूं कि कहीं मेरी बच्ची के साथ फिर कुछ न बुरा हो जाए।
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मां ने बताया कि बच्ची के साथ जब ये घटना हुई तो परिवार वालों ने चुप रहने और बात को दबा देने की बात कही। परिवार वालों ने भी हमारा साथ छोड़ दिया। लेकिन मैंने ठान लिया है कि न केवल बेटी को इंसाफ दिलाउंगी उसे इतना पढ़ाऊंगी कि अगर उसकी शादी न भी हो तो भी वो देश में मिसाल जरूर बने।
आईपीएस अधिकारी बनूंगी फिर अपनी इंसाफ की लड़ाई लड़ूगीं
rape victim
- फोटो : amar ujala
पावर फाउंडेशन द्वारा आयोजित लब आजाद हैं इवेंट में बलात्कार का दर्द हर दिन हर पल झेल रही मजबूत वीरांगनाओं ने अपनी बात ही नहीं रखी बल्कि उन्होंने कहा कि वो इस दुनिया को बदलने और अपने लिए इंसाफ लेकर रहेंगी। इस इवेंट में करीब कई गुड़ियाओं ने अपनी बात रखी और कहा कि यदि लड़कियों के साथ कुछ भी गलत होता है तो समाज लड़कियों को ही दोश देता है और महिलाओं को ही चुप कराया जाता है।
ऐसी ही एक सीतापुर की गुड़िया ने कहा कि वो सुबह गाय के लिए चारा लेने गई वहीं गांव के कुछ दबंगों ने उसे पकड़ लिया। गुड़िया पहली बार दिल्ली आईं हैं। वो आगे पढ़ना चाहती हैं। गुड़िया ने कहा कि हमारे गांव में 8 वीं तक ही स्कूल है, मेरे साथ बुरी बात हुई उसके बाद से मैं घर में हूं।
लेकिन मैं पढ़ना चाहती हूं, मैं सोशल वर्कर बन कर उन लड़कियों की मदद करना चाहती हूं । मैं आप लोगों की तरह ही बड़ी बनना चाहती हूं कि लोग मुझे सुने, मुझे जाने। मैं लोगों से खुलकर बात करना चाहती हूं। गुड़िया ने समाज को एक बार फिर कहा कि हम जैसी पीड़ित लड़कियां भी सम्मान की अधिकारी हैं और हमें भी सम्मान मिलना चाहिए।
इस मौके पर दिल्ली पावर फाउंडेशन की शमीना और टीवी जगत का जाना-माना चेहरा अभिज्ञान प्रकाश भी मौजूद थे। अभिज्ञान प्रकाश ने इस कार्यक्रम में आए पुरुषों से कहा कि समय आ गया है कि हम आगे आएं और इन बच्चियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
गुड़िया, उम्र- 13 वर्ष बोली कि मेरे साथ और मेरी मां के साथ बलात्कार हुआ लेकिन समाज ने हमें सपोर्ट करने की जगह हमारे साथ और भी बुरा व्यवहार किया। इतना परेशान की मुझे स्कूल तक छोड़ना पड़ा। मुझे पता है कई रेप विक्टिम लड़कियां इंसाफ के इंतजार में कोर्ट के चक्कर लगा रहीं है और पूरी जिंदगी चक्कर लगाती रहेंगी लेकिन उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा। मैं पढ़ना चाहती हूं। मैं खूब पढ़ना चाहती हूं और पढ़कर आईपीएस अधिकारी बनूंगी फिर अपनी इंसाफ की लड़ाई लड़ूगीं।
ऐसी ही एक सीतापुर की गुड़िया ने कहा कि वो सुबह गाय के लिए चारा लेने गई वहीं गांव के कुछ दबंगों ने उसे पकड़ लिया। गुड़िया पहली बार दिल्ली आईं हैं। वो आगे पढ़ना चाहती हैं। गुड़िया ने कहा कि हमारे गांव में 8 वीं तक ही स्कूल है, मेरे साथ बुरी बात हुई उसके बाद से मैं घर में हूं।
लेकिन मैं पढ़ना चाहती हूं, मैं सोशल वर्कर बन कर उन लड़कियों की मदद करना चाहती हूं । मैं आप लोगों की तरह ही बड़ी बनना चाहती हूं कि लोग मुझे सुने, मुझे जाने। मैं लोगों से खुलकर बात करना चाहती हूं। गुड़िया ने समाज को एक बार फिर कहा कि हम जैसी पीड़ित लड़कियां भी सम्मान की अधिकारी हैं और हमें भी सम्मान मिलना चाहिए।
इस मौके पर दिल्ली पावर फाउंडेशन की शमीना और टीवी जगत का जाना-माना चेहरा अभिज्ञान प्रकाश भी मौजूद थे। अभिज्ञान प्रकाश ने इस कार्यक्रम में आए पुरुषों से कहा कि समय आ गया है कि हम आगे आएं और इन बच्चियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
गुड़िया, उम्र- 13 वर्ष बोली कि मेरे साथ और मेरी मां के साथ बलात्कार हुआ लेकिन समाज ने हमें सपोर्ट करने की जगह हमारे साथ और भी बुरा व्यवहार किया। इतना परेशान की मुझे स्कूल तक छोड़ना पड़ा। मुझे पता है कई रेप विक्टिम लड़कियां इंसाफ के इंतजार में कोर्ट के चक्कर लगा रहीं है और पूरी जिंदगी चक्कर लगाती रहेंगी लेकिन उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा। मैं पढ़ना चाहती हूं। मैं खूब पढ़ना चाहती हूं और पढ़कर आईपीएस अधिकारी बनूंगी फिर अपनी इंसाफ की लड़ाई लड़ूगीं।
मुझे नहीं पता कि मेरी क्या गलती थी
rape victim
- फोटो : amar ujala
मुझे नहीं पता कि मेरी क्या गलती थी। अक्सर लड़कियों के पहनावे को लेकर बात की जाती है। दीदी, मैंने और मां ने, हम दोनों ने पूरे कपड़े पहने थे। हम कहीं से भी भड़काऊ नहीं लग रहे थे। फिर भी हमारे फिर हमारे साथ ऐसा हुआ क्यों?
अब मैं बहुत पढ़ूंगी और पुलिस की बड़ी अधिकारी बनूंगी, उसके बाद अपने इंसाफ के लिए खुद लड़ूंगी और इंसाफ लेकर रहूंगी। मेरे पिता अपनी बेटी और पत्नी की इंसाफ के लिए पुलिस, कोर्ट और वकीलों के चक्कर लगा रहे हैं।
वहीं जिंदगी और मौत से लड़कर बाहर आईं एक गुड़िया ने बताया कि मैं निकली दूध लेने निकली थी लेकिन बीच में ही मुझे दंरिंदों ने उठा लिया, 13 दिनों तक वो लोग मेरे साथ दरिंदगी कर रहे थे। वो मुझे मारते थे। मेरे साथ बलात्कार के दौरान मारपीट की जाती थी। मैं हर दिन मर रही थी। फिर एक दिन वो आया जब उन्हें लगा कि मैं मर चुकी हूं तो वो मुझे एक खुले मैदान में ले गए। मैं उनका चेहरा पहचान चुकी थी वो दरिंदे हर दिन बात करते थे कि वो मुझे मार दें अगर मैं जिंदा रही तो उनकी पहचान उजागर हो जाएगी।
लेकिन मैंने कही मन ही मन में ठान लिया था कि मैं जिंदा रहूंगी। मुझे जीना है। मेरे साथ हुई दरिंदगी भी मेरे जीने के जज्बे को खत्म नहीं कर सका। मेरे सीने में आज भी एक गोली फंसी हुई है। मेरे साथ जो कुछ भी हुआ उसके बारे में पूरे मुहल्ले का पता चल चुका था। मुझे लोग गलत नजरों से देखते थे मुझे अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी।
मैं कुछ करना चाहती हूं। मैं पढ़ लिख कर सोशल वर्कर बनना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि जो मेरे साथ हुआ वो किसी के साथ न हो लेकिन अगर किसी के साथ ऐसा होता है तो मैं उसके लिए मजबूती से लड़े। मैं उनकी मदद के लिए और उनका आत्मबल बढ़ाने के लिए मदद करना चाहती हूं।
अब मैं बहुत पढ़ूंगी और पुलिस की बड़ी अधिकारी बनूंगी, उसके बाद अपने इंसाफ के लिए खुद लड़ूंगी और इंसाफ लेकर रहूंगी। मेरे पिता अपनी बेटी और पत्नी की इंसाफ के लिए पुलिस, कोर्ट और वकीलों के चक्कर लगा रहे हैं।
वहीं जिंदगी और मौत से लड़कर बाहर आईं एक गुड़िया ने बताया कि मैं निकली दूध लेने निकली थी लेकिन बीच में ही मुझे दंरिंदों ने उठा लिया, 13 दिनों तक वो लोग मेरे साथ दरिंदगी कर रहे थे। वो मुझे मारते थे। मेरे साथ बलात्कार के दौरान मारपीट की जाती थी। मैं हर दिन मर रही थी। फिर एक दिन वो आया जब उन्हें लगा कि मैं मर चुकी हूं तो वो मुझे एक खुले मैदान में ले गए। मैं उनका चेहरा पहचान चुकी थी वो दरिंदे हर दिन बात करते थे कि वो मुझे मार दें अगर मैं जिंदा रही तो उनकी पहचान उजागर हो जाएगी।
इसीलिए उन्होंने मेरी छाती पर दो गोलियां भी मारीं। लेकिन मैं तो जिंदा रहना चाहती थी। मैंने खुद से ही एक गोली निकाल ली। मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी मैं बेहोश हो चुकी थी। वो दरिंदे मुझे मरा समझकर छोड़ गए थे। मुझे ये भी नहीं पता चला कि मैं अस्पताल कैसे पहुंची। जब मुझे होश में आया तो मैं अस्पताल में थी।
लेकिन मैंने कही मन ही मन में ठान लिया था कि मैं जिंदा रहूंगी। मुझे जीना है। मेरे साथ हुई दरिंदगी भी मेरे जीने के जज्बे को खत्म नहीं कर सका। मेरे सीने में आज भी एक गोली फंसी हुई है। मेरे साथ जो कुछ भी हुआ उसके बारे में पूरे मुहल्ले का पता चल चुका था। मुझे लोग गलत नजरों से देखते थे मुझे अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी।
मैं कुछ करना चाहती हूं। मैं पढ़ लिख कर सोशल वर्कर बनना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि जो मेरे साथ हुआ वो किसी के साथ न हो लेकिन अगर किसी के साथ ऐसा होता है तो मैं उसके लिए मजबूती से लड़े। मैं उनकी मदद के लिए और उनका आत्मबल बढ़ाने के लिए मदद करना चाहती हूं।