बढ़ सकती है रंजीत सिन्हा की मुश्किलें, कोयला खदान मामले की जांच कर रही कमेटी को मिले सबूत
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पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने यह इशारा किया है कि प्रथम दृष्टïया पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
मंगलवार को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सीबीआई केपूर्व स्पेशल डायरेक्टर एमएल शर्मा की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कमेटी ने इशारा किया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी और अपने निवास पर इस मामले के आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी।
अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया है। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है उस दौरान रंजीत सिन्हा ने आरोपियों से मुलाकात की थी। इन मुलाकातों के संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।
इस रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है
मुकुल रोहतगी ने यह भी बताया कि रिपोर्ट में रंजीत सिन्हा पर गंभीर टिप्पणी भी की गई है। मालूम हो कि इस रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अटॉर्नी जनरल को कमेटी की रिपोर्ट देते हुए इस पर गौर करने के लिए कहा था।
मुकुल रोहतगी ने पीठ को यह भी बताया कि हालांकि कमेटी ने फिलहाल अंतिम रूप से निष्कर्ष पर पहुंचने में असमर्थता जताई है क्योंकि कमेटी ने दर्ज किए गए मामलों के रिकार्ड पर गौर किया है न कि प्राथमिक जांच (पीई) पर। इस पर पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या कमेटी को पीई मुहैया कराई जानी चाहिए या नहीं?
साथ ही पीठ ने यह भी पूछा कि क्या इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नही? जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मुझे लगता है कि कमेटी को पीई नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले ही केंद्रीय सतर्कता आयोग उन मामलों पर गौर कर चुकी है जिन्हें बंद करने की सिफारिश की गई थी। आयोग ने कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया था। उन्होंने कहा कि अगर कमेटी को पीई दिया गया तो हर मामले को आयोग के पास भेजना का मकसद ही क्या रहेगा। यह अंतहीन प्रक्रिया बन जाएगी।
क्या कमेटी को सार्वजनिक करने का फैसला सुरक्षित
इसके अलावा पीठ ने अटॉर्नी जनरल से यह भी पूछा कि हम किस तरह विजिटर्स डायर में की गई एंट्री को सत्यापित कर सकते है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इसे सत्यापित करने का कोई जरिया नहीं है। वहीं रंजीत सिन्हा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि ऐसा एक भी मामला नहीं है जबकि सभी अधिकारियों ने किसी मामले में एफआईआर दर्ज करने की बात कही हो और रंजीत सिन्हा ने उसे बंद करने के लिए कहा हो।
उन्होंने विजिटर्स डायरी की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए कि उस दौरान अधिकतर दिन रंजीत सिन्हा दिल्ली में नहीं थे। वहीं याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इस मामले में आपराधिक मुकदमा दायर किया जाना चाहिए।
सभी पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने इस बात पर फैसला सुरक्षित रख लिया है कि क्या कमेटी को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं। साथ ही पीठ यह भी निर्धारित करेगी कि क्या कमेटी को पीई का रिकार्ड दिया जाना चाहिए या नहीं।