MEA: 'SCO में आतंकवाद पर भारत मुखर, ऑपरेशन सिंधु से ईरान-इस्राइल से भारतीयों की सुरक्षित वापसी', बोले जायसवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कई अहम मामलों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भारतीय रक्षा मंत्री ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया, लेकिन एक देश की असहमति के चलते संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इसके साथ ही जायसवाल ने ईरान-इस्राइल के बीच जारी तनाव के बीच भारतीय नागरिकों की वापसी को लेकर चलाए गए ऑपरेशन सिंधुं के बारे में भी जानकारी दी।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कई अहम मुद्दों पर जानकारी दी। सबसे पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के बैठक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक संपन्न हुई। इसमें भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया और आतंकवाद के मुद्दे पर सभी सदस्य देशों से एकजुट होकर लड़ने की अपील की। हालांकि इस बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। जायसवाल ने बताया कि कुछ सदस्य देशों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिसकी वजह से दस्तावेज को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
जायसवाल बोले- नहीं जारी हो सका संयुक्त बयान
जायसवाल ने बताया कि भारत चाहता था कि इस बयान में आतंकवाद और उससे जुड़ी चिंताओं को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, लेकिन एक देश को यह मंजूर नहीं था, इसलिए सहमति नहीं बन पाई। रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में 11 सदस्य देशों से आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों के खिलाफ मिलकर लड़ने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी घटनाओं के दोषियों, योजनाकारों, वित्त देने वालों और समर्थन करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह सीमा पार से हो या कहीं और से। साथ ही बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी मुखर आलोचना करता रहेगा।
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ऑपरेशन सिंधु के तहत भारतीयों की वापसी पर जोर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आगे तनावपूर्ण स्थिति में इस्राइल और ईरान से भारतीय नागरिकों की वापसी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने ईरान और इस्राइल में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए 18 जून को ऑपरेशन सिंधु शुरू किया। इस अभियान के तहत हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया है।
ईरान से निकाले गए तीन हजार से ज्यादा लोग
जयसवाल ने कहा कि ईरान में करीब 10,000 भारतीय थे। बढ़ते तनाव को देखते हुए ऑपरेशन सिंधु के तहत वहां से अब तक 3,426 भारतीय नागरिक, 11 ओसीआई कार्डधारक, 9 नेपाली नागरिक, कुछ श्रीलंकाई नागरिक, और एक ईरानी नागरिक, जो एक भारतीय नागरिक के पति हैं, को सुरक्षित निकाला गया। इसके लिए ईरान, आर्मेनिया और तुर्कमेनिस्तान से कुल 14 उड़ानें चलाई गईं।
जायसवाल ने आगे इस्राइल से निकाले गए भारतीय नागरिकों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस्रालइ में लगभग 40,000 भारतीय हैं। अब तक 818 भारतीय नागरिकों को वहां से निकाला गया है। इसके लिए जॉर्डन और मिस्र से कुल 4 उड़ानें चलाई गईं।
अमेरिका के वीजा दिशानिर्देशों पर भारत की प्रतिक्रिया
जायसवाल ने कहा कि वीजा और इमिग्रेशन से जुड़ी बातें किसी भी देश के संप्रभु अधिकार में आती हैं। हालांकि, अमेरिका द्वारा वीजा आवेदनों में सोशल मीडिया की जानकारी मांगने वाले नए दिशा-निर्देशों पर भारत की नजर है। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि भारतीय नागरिकों के वीजा आवेदन केवल योग्यता के आधार पर परखे जाने चाहिए। हम अमेरिका के साथ सभी 'मोबिलिटी' और वाणिज्यिक मामलों पर लगातार संपर्क में हैं, ताकि भारतीयों के हित सुरक्षित रहें।
पाकिस्तान सेना प्रमुख की व्हाइट हाउस यात्रा पर भारत की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की अमेरिका यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने यह दौरा देखा है। इस पर हमारे पास कहने को और कुछ नहीं है। भारत-अमेरिका संबंधों पर बोलते हुए जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है और यह रणनीतिक दृष्टि से लगातार मजबूत हो रही है। यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और कई क्षेत्रों में सहयोग के रूप में सामने आ रही है।
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भारत-कनाडा रिश्तों में सुधार के संकेत
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त की बहाली को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Carney नहीं) की जी-7 सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात में दोनों नेताओं ने रिश्तों में स्थिरता लाने पर सहमति जताई थी।
जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी। दोनों देश अब उच्चायुक्तों की वापसी को लेकर रचनात्मक कदम उठा रहे हैं।