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‘हीरो’ बनना चाहता था रामवृक्ष, कहा था- मैं पकड़ा जाऊं तो हिला देना सरकार

Sun, 12 Jun 2016 08:41 AM IST
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा Updated Sun, 12 Jun 2016 08:41 AM IST
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ramvriksh want to become a hero after his arrest in jawahar bagh issue mathura
रामवृक्ष जान गया था कि पुलिस खाली कराएगी बाग - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली

जवाहर बाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष समझ गया था कि पुलिस बाग खाली कराने के लिए बल प्रयोग करेगी। पहली कोशिश उसकी भीड़ जुटाकर दबाव बनाने और पुलिस प्रशासन से सीधे टकराने और गिरफ्तार होने की स्थिति में प्रदेश भर में गिरफ्तारी के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया कराने की थी। पुलिस जो प्लानिंग बना रही थी वह रामवृक्ष तक पहुंच रही थी। उसने अपने खास लोगों को कहना शुरू कर दिया था कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। 27 मई को जवाहर बाग में कब्जाधारियों की सभा में उसने कहा था, मैं पकड़ा जाऊं तो सरकार को हिला देना। उसका मकसद गिरफ्तारी को मुद्दा बनाना और अनुयायियों की नजर में ‘हीरो’ बनकर लोगों का ध्यान खींचना भी था।

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जवाहर बाग को खाली कराने के प्रयास महीनों से चल रहे थे। लेकिन फाइनल एक्शन की तैयारी पुलिस ने मई माह में शुरू कीं। ढाई साल से इस बाग पर काबिज रामवृक्ष को भी लगने लगा था कि अब प्रशासन सख्ती करने जा रहा है। इसी के चलते उसने अपने खास लोगों चंदन बोस, वीरेश यादव और राकेश गुप्ता को पूरे संगठन की कमान संभालकर भीड़ के साथ सड़कों पर आने को कहा था।
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रामवृक्ष ने जवाहर बाग में 27 मई को लोगों को भड़काते हुए कहा था कि प्रशासन हमारी मुहिम को कुचलना चाहता है। गरीबों पर जुल्म ढहाने की तैयारी हो रही है। लिहाजा हमें पूरा जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा। जवाहर बाग हिंसा में घायल केशव, अवतार, पूजा प्रसाद ने बताया कि तब कहा गया था कि गिरफ्तारी के साथ ही बवाल शुरू हो जाना चाहिए। अगर पुलिस यहां से निकालती है तो सभी लोग भीड़ के साथ सीधे जयगुरुदेव आश्रम में चले जाएंगे। 
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सियासी आकाओं ने भी खींच लिया था हाथ
जिस तरह से रामवृक्ष ढाई साल से जवाहर बाग पर काबिज था। सरकार उसे पूरा बाग ही 99 साल के पट्टे पर देने की तैयारी कर रही थी। 19 मुकदमे दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो रही थी। पुलिस प्रशासन उसके आगे हथियार डाल चुका था इससे साफ है कि उसके सियासी आका साथ खड़े थे। इन्हीं के बूते पर वह दम भी भर रहा था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि घटना से कुछ समय पहले से स्थिति में परिवर्तन आया था। अब सियासी आकाओं ने भी उसके ऊपर से अपना हाथ हटा लिया था। उसके फोन उठने भी बंद हो गए थे। इन सब हालातों को देखकर उसे लगने लगा था कि अब कोई मदद नहीं मिलेगी। लिहाजा उसने विगत महीनों में और भीड़ बढ़ानी शुरू कर दी थी। ताकि भीड़ दिखाकर दबाव बनाया जा सके।

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