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राम मंदिर निर्माण: छह माह बाद वापस घर लौटे मूर्तिकार योगीराज; पत्नी विजेता बोलीं- मुश्किल था इंतजार

Thu, 25 Jan 2024 03:28 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 25 Jan 2024 03:28 AM IST
सार

योगीराज की मूर्ति अयोध्या मंदिर ट्रस्ट द्वारा चुने गए तीन फाइनलिस्टों में से एक थी। योगीराज ने आगे बताया, 'लोग मुझे जो प्यार दिखा रहे हैं, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं इस अवसर के लिए भगवान का बहुत आभारी हूं।

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Ram temple construction Sculptor Yogiraj returns Bangalore after six months
मूर्तीकार की पत्नी विजेता - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अयोध्या के राम मंदिर में 500 साल के इंतजार के बाद आखिरकार रामलला विराजमान हो गए हैं। वहीं, नवनिर्मित राम मंदिर की शोभा बढ़ाने वाली रामलला की मूर्ति के मूर्तिकार अरुण योगीराज बुधवार को अपने घर बेंगलुरु पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मूर्तिकार की पत्नी ने उनके आते ही खुशी जताई और कहने लगीं कि छह महीने तक घर से दूर रहना उनके लिए कठिन समय था। 

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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद योगीराज के बेंगलुरु लौटने पर विजेता ने कहा, 'उन्हें (अरुण योगीराज को) पिछले छह महीनों के दौरान बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अविश्वसनीय रूप से अच्छी तरह से जीत हासिल की। मेरे लिए भी अकेले बच्चों की देखभाल करना (छह महीने तक उससे दूर रहना) मुश्किल था। हमारी भविष्य की कोई योजना नहीं है, आगे जो भी आएगा हम उसे पूरे दिल से लेंगे और समर्पण के साथ करेंगे।'
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लोगों के प्यार को देख निशब्द हुए योगीराज
योगीराज की मूर्ति अयोध्या मंदिर ट्रस्ट द्वारा चुने गए तीन फाइनलिस्टों में से एक थी। योगीराज ने आगे बताया, 'लोग मुझे जो प्यार दिखा रहे हैं, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं इस अवसर के लिए भगवान का बहुत आभारी हूं। भगवान राम की मूर्ति बनाने में इस्तेमाल किया गया पत्थर मैसूर जिले का है। मुझे लगता है कि यह भगवान राम का आशीर्वाद है कि मुझे मौका मिला। मैं पृथ्वी पर सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूं। मेरे पूर्वजों, परिवार के सदस्यों और भगवान रामलला का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा है। कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं सपनों की दुनिया में हूं। यह मेरे लिए सबसे बड़ा दिन है।'
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एयपोर्ट पहुंचते ही फूल मालाओं से हुआ स्वागत
योगीराज के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचने पर बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक फूल मालाओं से उनका स्वागत करने के लिए एकत्र हुए। 'जय श्री राम' और 'योगीराज अमर रहें' के नारों के बीच उन्होंने उन पर फूलों की वर्षा की। 

भगवान रामलला की 51 इंच की मूर्ति तीन अरब साल पुरानी चट्टान से बनाई गई है। मूर्तिकला के लिए इस्तेमाल किया गया नीले रंग का कृष्ण शिल (काला शिस्ट) मैसूर के एचडी कोटे तालुक के जयापुरा होबली में गुज्जेगौदानपुरा से निकाला गया था। यह महीन से मध्यम दाने वाली, आसमानी-नीली मेटामॉर्फिक चट्टान, जिसे आमतौर पर इसकी चिकनी सतह की बनावट के कारण सोपस्टोन के रूप में जाना जाता है, मूर्तियों को तराशने में मूर्तिकारों के लिए आदर्श है।


मूर्ति को बनारसी कपड़े से सजाया गया है, उन्होंने पीली धोती और लाल पताका या अंगवस्त्रम पहना हुआ है। अंगवस्त्रम' को शुद्ध सोने की 'जरी' और धागों से सजाया गया है, जो 'शंख', 'पद्म', 'चक्र' और 'मयूर' जैसे शुभ वैष्णव प्रतीकों को प्रदर्शित करता है।

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